ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 24 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 24 अगस्त 2023

24 अगस्त 2023 दिन गुरुवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज बुध देवता पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएंगे। आज श्रीदुर्गाष्टमी व्रत है। आज सूर्य देवता मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में प्रवेश कर जायेंगे। आज सर्वार्थसिद्धियोग यायि (मुद्दई) जयद् आप सभी सनातनियों को श्रीदुर्गाष्टमी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 03:10 AM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र।इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र विशाखा 09:04 AM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी गुरू है।विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं।
📣 योग : इन्द्र योग 08:36 PM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : विष्टि – 03:26 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 03:10 ए एम, अगस्त 25 तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय- सुबह 5:54 AM
🌅 सूर्यास्त- शाम 6:51 PM
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:49 ए एम से 05:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:49 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:33 पी एम से 03:25 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:52 पी एम से 07:14 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:52 पी एम से 07:58 पी एम
💧 अमृत काल : 10:46 पी एम से 12:22 ए एम, अगस्त 25
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अगस्त 25 से 12:46 ए एम, अगस्त 25
सर्वार्थ सिद्धि योग : 09:04 ए एम से 05:55 ए एम, अगस्त 25
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दुर्वाष्टमी/ दुर्गा अष्टमी, महान स्वतंत्रता सेनानी राजगुरु जयन्ती, समाज सुधारक रामकृष्ण गोपाल भंडारकर पुण्यतिथि, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के सहयोगी साहित्यकार नरसिंह चिन्तामन केलकर जयन्ती, कलकत्ता शहर स्थापना दिवस, यूक्रेन स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रीय वफ़ल दिवस, कोबे ब्रायंट दिवस, बर्गर दिवस, प्लूटो डिमोटेड दिवस, राष्ट्रीय चाकू दिवस
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे धातु की चीज़ें सही दिशा में रखने के बारे में। वास्तु शास्त्र स्त्र में हर एक चीज को रखने के लिए एक सही दिशा निर्धारित होती है, जिससे उस चीज के और उस दिशा के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। उसी प्रकार धातु की चीजों को रखने के लिए भी एक सही दिशा निर्धारित है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में धातु की चीजें रखने के लिए सबसे सही दिशा पश्चिम और वायव्य कोण, यानि उत्तर-पश्चिम दिशा है। इन दोनों ही दिशाओं में धातु की कोई चीज रखना शुभ फलदायी होता है।
वास्तु के मुताबिक, पश्चिम दिशा में धातु की चीजें रखने से सबसे अधिक फायदा घर की छोटी बेटी को होता है। इससे उनका हर्ष तत्व मजबूत होता है और उनकी खुशी बनी रहती है। साथ ही मुंह से जुड़ी परेशानियां नहीं होती और चेहरे का निखार बना रहता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पश्चिम दिशा में धातु की चीजें रखने से पिता को लाभ मिलता है। उनका दिमाग स्वस्थ रहता है। आपको मानसिक रूप से किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। साथ ही आपकी बौद्धिक क्षमता में बढ़ोतरी होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पहली मुलाकात में लड़कियां क्या नोटिस करती हैं ड्रेसिंग सेंस लड़कियां हमेशा अपने पहनावे पर खास ध्यान देती हैं और ऐसे में वह किसी लड़के से मिलते हुए भी सबसे पहले यही नोटिस करती हैं कि लड़के का ड्रेसिंग सेंस कैसा है। अगर आप किसी लड़की को इंप्रेस करना चाहते हैं तो अपने पहनावे का खास ध्यान रखें।
बोलने का तरीका लड़कियां उस लड़के के साथ रिलेशनशिप में आना और दोस्ती करना पसंद करती हैं जो बोलने में अच्छे हों। अगर आपको चिल्लाकर बोलने या फिर भद्दे शब्दों का प्रयोग करने की आदत है तो इसे सुधार लें और जब किसी लड़की से मिलें तो अपने बोलने के तरीके से उसे इंप्रेस कर दें।
लुक्स सुंदरता का कोई पैमाना नहीं होता है लेकिन जब आप किसी से मिलने जाएं तो अपने लुक्स का खास ख्याल रखें। लड़की से मिलने जाने पर आप अच्छे से तैयार होकर जाएं।
खुशबू शरीर से आने वाली बदबू आपके पहले इंप्रेशन को बिगाड़ सकती है। लड़कियां ये देखती हैं कि लड़के से अच्छी महक आए, ऐसे में आप अच्छा परफ्यूम लगाकर जाएं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
वायरल इंफेक्शन में पिएं लौंग और हल्दी की चाय-वायरल इंफेक्शन में लौंग और हल्दी की चाय पीना आपको इस दौरान कई समस्याओं में आराम दिला सकता है। पहले तो आपको सर्दी-जुकाम की समस्या में आराम महसूस होगा और दूसरा ये आपके फेफड़े को शांत करने व बेहतर महसूस करवाने में मदद करेगा। इसके पीछे कारण दो हैं और असर कई। जैसे कि एंटीवायरल गुणों से भरपूर है लौंग एंटीवायरल गुणों से भरपूर लौंग, सीने में जमा कफ को तोड़ने में मदद कर सकता है। इसकी वजह से आपकी खांसी में कमी आ सकती है और फिर आपके फेफड़ों की सिकाई हो सकती है। इसके अलावा, लौंग का एक खास गुण ये भी है कि ये आपके नैसल पैसेज को साफ करता है और सांस लेने में हो रही दिक्कत में कमी लाता है। इतना ही नहीं ये गले की खिचखिच को भी कम करता है और वायरल इंफेक्शन से बचाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
महाराज मनु ने बहुत दिनों तक इस सप्तद्वीपवती पृथ्वी पर राज्य किया। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी। इन्हीं ने ‘मनु स्मृति’ की रचना की थी जो आज मूल रूप में नहीं मिलती। उसके अर्थ का अनर्थ ही होता रहा है। उस काल में वर्ण का अर्थ रंग होता था और आज जाति।
प्रजा का पालन करते हुए जब महाराज मनु को मोक्ष की अभिलाषा हुई तो वे संपूर्ण राजपाट अपने बड़े पुत्र उत्तानपाद को सौंपकर एकान्त में अपनी पत्नी शतरूपा के साथ नैमिषारण्य तीर्थ चले गए, लेकिन उत्तानपाद की अपेक्षा उनके दूसरे पुत्र राजा प्रियव्रत की प्रसिद्धि ही अधिक रही।
मनु ने सुनंदा नदी के किनारे सौ वर्ष तक तपस्या की। दोनों पति-पत्नी ने नैमिषारण्य नामक पवित्र तीर्थ में गौमती के किनारे भी बहुत समय तक तपस्या की। उस स्थान पर दोनों की समाधियां बनी हुई हैं।
स्वायम्भु मनु के काल के ऋषि मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलह, कृतु, पुलस्त्य, और वशिष्ठ हुए। राजा मनु सहित उक्त ऋषियों ने ही मानव को सभ्य, सुविधा संपन्न, श्रमसाध्य और सुसंस्कृत बनाने का कार्य किया।
राजा प्रियव्रत के ज्येष्ठ पुत्र आग्नीध्र जम्बूद्वीप के अधिपति हुए। अग्नीघ्र के नौ पुत्र जम्बूद्वीप के नौ खण्डों के स्वामी माने गए हैं, जिनके नाम उन्हीं के नामों के अनुसार इलावृत वर्ष, भद्राश्व वर्ष, केतुमाल वर्ष, कुरु वर्ष, हिरण्यमय वर्ष, रम्यक वर्ष, हरि वर्ष, किंपुरुष वर्ष और हिमालय से लेकर समुद्र के भूभाग को नाभि खंड कहते हैं। नाभि और कुरु ये दोनों वर्ष धनुष की आकृति वाले बताए गए हैं। नाभि के पुत्र ऋषभ हुए और ऋषभ से ‘भरत’ का जन्म हुआ। भरत के नाम पर ही बाद में इस नाभि खंड को भारतवर्ष कहा जाने लगा।
आप सोच रहे होंगे कि जब स्वायंभुव मनु ही धरती के पहले मानव थे जो अन्य ऋषि, प्रजापति आदि कहां से आए? दरअसल, प्राचीनकाल में इस पृथ्‍वी के कई विभाजन थे। पाताल, धरती, स्वर्ग आदि। स्वर्ग से ही ब्रह्मा ने स्वयंभुव मनु को धरती पर उतारा था। उनके इस अवतरण की कथाएं भिन्न भिन्न मिलती है।
इति समाप्ति
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

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