ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 30 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 30 अगस्त 2023

30 अगस्त 2023 दिन बुधवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी उपरान्त पुर्णिमा तिथि है। आज से पंचक (पचखा) आरंभ हो जाएगा। व्रत की पुर्णिमा भी आज ही मनायी जाएगी। आज भद्रा का भी प्रभाव बना रहने वाला है। परंतु भद्रा के उपरान्त रक्षिका बंधनम् (रक्षाबंधन) का पर्व भी आज ही मनाया जाएगा। आज किसी भी अच्छे कार्य की शुरुआत करने के लिए अच्छा दिन है। आज हयग्रीव भगवान की जन्म जयन्ती भी है। आप सभी सनातनियों को व्रत की पुर्णिमा, हयग्रीव जयन्ती एवं रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
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आज भद्रा का प्रभाव तो बना ही रहने वाला है। और भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में रक्षाबंधन के लिए बुधवार 30 अगस्त को भद्राकाल समाप्त होने के बाद रात 9 बजकर 3 मिनट से लेकर अगले दिन सूर्योदय के बाद प्रातः 07:44 AM तक शुभ मुहूर्त है। इन समय के अन्दर ही राखी बांधना शुभ रहेगा। सबसे पहले बहनें श्रीगणेशजी को राखी अर्पित करें। ऐसा करने से अशुभ योगों का असर समाप्त हो जाता है। इस पर्व पर भाई-बहन यदि दूर हैं तो बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करते हुए भगवान श्रीगणेश या भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को भी भाई के निमित्त राखी बांध सकती हैं।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – श्रावण माह शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 10:58 AM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर।चतुर्दशी तिथि में भगवान देवदेवेश्वर सदाशिव की पूजा करके मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से समन्वित हो जाता है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 08:46 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है।
🔕 योग – अतिगण्ड योग 09:32 PM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
प्रथम करण : वणिज – 10:58 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 09:01 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:46:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:22:00
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:51 ए एम से 05:58 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:45 पी एम से 07:08 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:45 पी एम से 07:53 पी एम
💧 अमृत काल : 11:42 ए एम से 01:06 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 31
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी मंदिर में साबुत मूंग चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/रक्षाबंधन/श्रावणी/नारियली पूर्णिमा/शुक्ल यजु: श्रावणी/हयग्रीवोत्पी/ बलभद्र पूजा (उड़ीसा)/ झूलन यात्रा समाप्ति/ लघु उद्योग दिवस, हिन्दी साहित्यकार जी.पी. श्रीवास्तव स्मृति दिवस, उद्योगपति कृष्ण कुमार बिड़ला पुण्य तिथि, पत्रकार राजेन्द्र राठौर जन्म दिवस, (International Friendship Day) फ्रेंडशिप डे, पूर्णिमा प्रारंभ सुबह 10.18
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗽 Vastu Tips
वास्तु शास्त्र में आज जानिए आचार्य श्री गोपी राम से पूर्व दिशा के बारे में। पूर्व दिशा का तत्व काष्ठ यानि लकड़ी है। इसका संबंध गति और मार्ग से है। शरीर में पूर्व दिशा का प्रभाव पैरों पर अधिक पड़ता है। अतः अगर आपके पैरों में किसी प्रकार की तकलीफ है तो आपको पूर्व दिशा के वास्तु सुधार और सही रंग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस दिशा का नैसर्गिक रंग हरा है और हरा रंग वृक्ष या पेड़-पौधों के विकास का सूचक है।
अतः वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा में हरे रंग के पेड़-पौधे लगाना आपके लिए शुभ रहेगा। पूर्व दिशा में हरा रंग करवाने से या इस रंग की चीजों का इस्तेमाल करने से इस दिशा संबंधी तत्वों के अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। वास्तु शास्त्र में ये थी चर्चा पूर्व दिशा के वास्तु के बारे में |
घर की पूर्व दिशा में ना रखें ये चीजें
घर की पूर्व दिशा में भारी सामान नहीं रखना चाहिए और रखें भी तो उसकी गिनती ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अन्यथा इससे पूर्व दिशा में दबाव बढ़ता है। इस दिशा में हमेशा ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि हवा का संचार घर के अन्दर हमेशा बना रहे। साथ ही इस दिशा में किसी भी प्रकार का कबाड़ न रखें। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें और पूर्व दिशा में कम से कम एक खिड़की जरूर होनी चाहिए।
▶️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पुरुषों और महिलाओं में हार्ट अटैक क्यों अलग है। पुरुष और महिलाएं फेफड़ों और मस्तिष्क से लेकर मांसपेशियों और जोड़ों तक अपनी शारीरिक रचना के कारण अलग होते हैं। पुरुषों और महिलाओं की हृदय प्रणाली में भी अंतर होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं का दिल छोटा और रक्त वाहिकाएं संकरी होती हैं। तो, पुरुषों का दिल बड़ा होता है और ब्लड वेसेल्स बड़े हो सकते हैं। इन अंतरों के कारण, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग अलग तरह से विकसित हो सकता है।
दिल का दौरा तब होता है जब कोलेस्ट्रॉल प्लाक धमनियों की दीवारों के अंदर जमा हो जाता है और ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाता है। पुरुषों में आमतौर पर दिल तक खून पहुंचाने वाली सबसे बड़ी धमनियों में यह प्लाक जमा हो जाता है। महिलाओं में हृदय की सबसे छोटी ब्लड वेसेल, जिन्हें माइक्रोवैस्कुलचर कहा जाता है, में इस बिल्डअप के विकसित होने की अधिक संभावना होती है। इसलिए, दोनों का हार्ट अटैक अलग होता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
अगर आपका शुगर इंटेक ज्यादा है यानी कि आपका उन चीजों का ज्यादा सेवन कर रहे हैं जिससे शरीर में शुगर बढ़ रहा है तो ये फेस फैट को बढ़ा सकता है। इसके अलावा ये इस बात का भी संकेत है कि शरीर में शुगर मेटाबोलिज्म बिगड़ा हुआ, शुगर सही से पच नहीं रहा और इसका असर आपके चेहरे पर नजर आ रहा है।
स्ट्रेस हार्मोन यानी कार्टिसोल का बढ़ना, फेस फैट का कारण बन सकता है। दरअसल, जब आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस में होते हैं तो शरीर में कार्टिसोल लेवल बढ़ जाता है और ये शरीर में मेटाबोलिज्म सिस्टम को प्रभावित करता है, शरीर सही से खाना पचा नहीं पाता है और अनहेल्दी फैट बढ़ता है और इस तरह ये फेस फैट बढ़ाने का कारण बन जाता है।
पानी की कमी से आपका फेस फैट तेजी से बढ़ सकता है।दरअसल, पानी आपके शरीर को डिटॉक्सीफाई करता है और ये फैट पचाने में मददगार भी है। पानी का सेवन लिपोलिसिस को भी बढ़ावा देता है।लिपोलिसिस तब होता है जब शरीर फैट को फैटी एसिड में तोड़ देता है और एनर्जी के रूप में इस्तेमाल होता है। तो, इन तमाम बातों का ध्यान रखें और फेस फैट कम करने की कोशिश करें।
📚 गुरु भक्ति योग
कल का शेष
मंदिर तो मैं अक्सर आता हूँ पर आज की इस घटना ने मन पर गहरी छाप छोड़ दी, मेंने सोचा कि मैं कट्टर सनातनी राजपूत हूं और नियमानुसार मुझे भी जनेऊ बदलना चाहिए, उस ब्राह्मण के पीछे-पीछे मैं भी मंदिर से बाहर आया उन्हें रोककर प्रणाम करने के बाद अपना परिचय दिया और कहा कि मुझे भी एक जोड़ी शुद्ध जनेऊ की आवश्यकता है, तो उन्होंने असमर्थता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तो वह बस हनुमान जी के लिए ही ले आये थे हां यदि आप चाहें तो मेरे घर कभी भी आ जाइएगा घर पर जनेऊ बनाकर मैं रखता हूँ जो लोग जानते हैं वो आकर ले जाते हैं |
मेंने उनसे उनके घर का पता लिया और प्रणाम कर वहां से चला आया..!
शाम को उनके घर पहुंचा तो देखा कि वह अपने दरवाजे पर तखत पर बैठे एक व्यक्ति से बात कर रहे हैं , गाड़ी से उतरकर मैं उनके पास पहुंचा मुझे देखते ही वो खड़े हो गए, और मुझसे बैठने का आग्रह किया अभिवादन के बाद मैं बैठ गया, बातों बातों में पता चला कि वह अन्य व्यक्ति भी पास का रहने वाला ब्राह्मण है तथा उनसे जनेऊ लेने आया है |
ब्राह्मण अपने घर के अन्दर गए इसी बीच उनकी दो बेटियाँ जो क्रमश: 12 वर्ष व 8 वर्ष की रही होंगी एक के हाथ में एक लोटा पानी तथा दूसरी के हाथ में एक कटोरी में गुड़ तथा दो गिलास था, हम लोगों के सामने गुड़ व पानी रखा गया, मेरे पास बैठे व्यक्ति ने दोनों गिलास में पानी डाला फिर गुड़ का एक टुकड़ा उठा कर खाया और पानी पी लिया तथा गुड़ की कटोरी मेरी ओर खिसका दी, पर मैने पानी नहीं पिया, कारण आप सभी लोग जानते होंगे कि हर जगह का पानी कितना दूषित हो गया है कि पीने योग्य नहीं होता है घर पर आर.ओ. लगा है इसलिए ज्यादातर आर.ओ. का ही पानी पीता हूँ बाहर रहने पर पानी की बोतल खरीद लेता हूँ |
इतनी देर में ब्राह्मण अपने घर से बाहर आए और एक जोड़ी जनेऊ उस व्यक्ति को दिए, जो पहले से बैठा था उसने जनेऊ लिया और 21 रुपए ब्राह्मण को देकर चला गया | मैं अभी वहीं रुका रहा इस ब्राह्मण के बारे में और अधिक जानने का कौतुहल मेरे मन में था, उनसे बात-चीत में पता चला कि वह संस्कृत से स्नातक हैं नौकरी मिली नहीं और पूँजी ना होने के कारण कोई व्यवसाय भी नहीं कर पाए, घर में बृद्ध मां पत्नी दो बेटियाँ तथा एक छोटा बेटा है, एक गाय भी है |
वे बृद्ध मां और गौ-सेवा करते हैं दूध से थोड़ी सी आय हो जाती है और जनेऊ बनाना उन्होंने अपने पिता व दादा जी से सीखा है यह भी उनके गुजर-बसर में सहायक है | इसी बीच उनकी बड़ी बेटी पानी का लोटा वापस ले जाने के लिए आई किन्तु अभी भी मेरी गिलास में पानी भरा था उसने मेरी ओर देखा लगा कि उसकी आँखें मुझसे पूछ रही हों कि मेंने पानी क्यों नहीं पिया, मेंने अपनी नजरें उधर से हटा लीं, वह पानी का लोटा गिलास वहीं छोड़ कर चली गयी शायद उसे उम्मीद थी की मैं बाद में पानी पी लूंगा |
अब तक मैं इस परिवार के बारे में काफी हद तक जान चुका था और मेरे मन में दया के भाव भी आ रहे थे |
खैर ब्राह्मण ने मुझे एक जोड़ी जनेऊ दिया, तथा कागज पर एक मंत्र लिख कर दिया और कहा कि जनेऊ पहनते समय इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करूं
मैंने सोच समझ कर 500 रुपए का नोट ब्राह्मण की ओर बढ़ाया तथा जेब और पर्स में एक का सिक्का तलाशने लगा, मैं जानता था कि 500 रुपए एक जोड़ी जनेऊ के लिए बहुत अधिक है पर मैंने सोचा कि इसी बहाने इनकी थोड़ी मदद हो जाएगी | ब्राह्मण हाथ जोड़ कर मुझसे बोले कि सर 500 सौ का फुटकर तो मेरे पास नहीं है, मेंने कहा अरे फुटकर की आवश्यकता नहीं है आप पूरा ही रख लीजिए तो उन्हें कहा नहीं बस मुझे मेरी मेहनत भर का 21 रूपए दे दीजिए, मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी कि गरीब होने के बावजूद वो लालची नहीं हैं, पर मेंने भी पांच सौ ही देने के लिए सोच लिया था इसलिए मैंने कहा कि फुटकर तो मेरे पास भी नहीं है, आप संकोच मत करिए पूरा रख लीजिए आपके काम आएगा |
उन्होंने कहा, अरे नहीं मैं संकोच नहीं कर रहा आप इसे वापस रखिए जब कभी आपसे दुबारा मुलाकात होगी तब 21रू. दे दीजिएगा |
इस ब्राह्मण ने तो मेरी आँखें नम कर दीं उन्होंने कहा कि शुद्ध जनेऊ की एक जोड़ी पर 13-14 रुपए की लागत आती है 7-8 रुपए अपनी मेहनत का जोड़कर वह 21 रू. लेते हैं कोई-कोई एक का सिक्का न होने की बात कह कर बीस रुपए ही देता है |
मेरे साथ भी यही समस्या थी मेरे पास 21रू. फुटकर नहीं थे, मेंने पांच सौ का नोट वापस रखा और सौ रुपए का एक नोट उन्हें पकड़ाते हुए बड़ी ही विनम्रता से उनसे रख लेने को कहा तो इस बार वह मेरा आग्रह नहीं टाल पाए और 100 रूपए रख लिए और मुझसे एक मिनट रुकने को कहकर घर के अन्दर गए, बाहर आकर और चार जोड़ी जनेऊ मुझे देते हुए बोले मेंने आपकी बात मानकर सौ रू. रख लिए अब मेरी बात मान कर यह चार जोड़ी जनेऊ और रख लीजिए ताकी मेरे मन पर भी कोई भार ना रहे |
मैंने मन ही मन उनके स्वाभिमान को प्रणाम किया साथ ही उनसे पूछा कि इतना जनेऊ लेकर मैं क्या करूंगा तो वो बोले कि मकर संक्रांति, पितृ विसर्जन, चन्द्र और सूर्य ग्रहण, घर पर किसी हवन पूजन संकल्प परिवार में शिशु जन्म के सूतक आदि अवसरों पर जनेऊ बदलने का विधान है, इसके अलावा आप अपने सगे सम्बन्धियों रिस्तेदारों व अपने ब्राह्मण मित्रों को उपहार भी दे सकते हैं जिससे हमारी ब्राह्मण संस्कृति व परम्परा मजबूत हो साथ ही साथ जब आप मंदिर जांए तो विशेष रूप से गणेश जी, शंकर जी व हनूमान जी को जनेऊ जरूर चढ़ाएं… उनकी बातें सुनकर वह पांच जोड़ी जनेऊ मेंने अपने पास रख लिया और खड़ा हुआ तथा वापसी के लिए बिदा मांगी..!!
उन्होंने कहा कि आप हमारे अतिथि हैं पहली बार घर आए हैं हम आपको खाली हाथ कैसे जाने दो सकते हैं इतना कह कर उनहोंने अपनी बिटिया को आवाज लगाई वह बाहर निकाली तो ब्राह्मण देव ने उससे इशारे में कुछ कहा तो वह उनका इशारा समझकर जल्दी से अन्दर गयी और एक बड़ा सा डंडा लेकर बाहर निकली, डंडा देखकर मेरे समझ में नहीं आया कि मेरी कैसी बिदायी होने वाली है |
अब डंडा उसके हाथ से ब्राह्मण देव ने अपने हाथों में ले लिया और मेरी ओर देख कर मुस्कराए जबाब में मेंने भी मुस्कराने का प्रयास किया | वह डंडा लेकर आगे बढ़े तो मैं थोड़ा पीछे हट गया उनकी बिटिया उनके पीछे पीछे चल रह थी मेंने देखा कि दरवाजे की दूसरी तरफ दो पपीते के पेड़ लगे थे डंडे की सहायता से उन्होंने एक पका हुआ पपीता तोड़ा उनकी बिटिया वह पपीता उठा कर अन्दर ले गयी और पानी से धोकर एक कागज में लपेट कर मेरे पास ले आयी और अपने नन्हें नन्हा हाथों से मेरी ओर बढ़ा दिया उसका निश्छल अपनापन देख मेरी आँखें भर आईं, मैं अपनी भीग चुकी आंखों को उससे छिपाता हुआ दूसरी ओर देखने लगा तभी मेरी नजर पानी के उस लोटे और गिलास पर पड़ी जो अब भी वहीं रखा था इस छोटी सी बच्ची का अपनापन देख मुझे अपने पानी न पीने पर ग्लानि होने लगी, मैंने झट से एक टुकड़ा गुड़ उठाकर मुँह में रखा और पूरी गिलास का पानी एक ही साँस में पी गया, बिटिया से पूछा कि क्या एक गिलास पानी और मिलेगा…. वह नन्ही परी फुदकती हुई लोटा उठाकर ले गयी और पानी भर लाई, फिर उस पानी को मेरी गिलास में डालने लगी और उसके होंठों पर तैर रही मुस्कराहट जैसे मेरा धन्यवाद कर रही हो..!!
मैं अपनी नजरें उससे छुपा रहा था पानी का गिलास उठाया और गर्दन ऊंची कर के वह अमृत पीने लगा पर अपराधबोध से दबा जा रहा था, अब बिना किसी से कुछ बोले पपीता गाड़ी की दूसरी सीट पर रखा, और घर के लिए चल पड़ा, घर पहुंचने पर हाथ में पपीता देख कर मेरी पत्नी ने पूछा कि यह कहां से ले आए तो बस मैं उससे इतना ही कह पाया कि….
एक ब्राह्मण के घर गया था तो उन्होंने खाली हाथ आने ही नहीं दिया……
इति समाप्ति
❀꧁ 𓇽𝐻𝑎𝑟𝑒 𝐾𝑟𝑖𝑠ℎ𝑛𝑎𓇽꧂❀
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

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