आंवले के पेड़ की पूजा कर लगाई परिक्रमाअक्षय नवमीं पर मंदिरो में लगी भीड़, पूजा के बाद किया भोजन
सिलवानी । कार्तिक मास की अक्षय नवमीं पर आंवले के पेड़ की परिक्रमा कर पूजा पाठ की गई। बताया जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होगा, इसके साथ ही सुख समृद्धि बनी रहेगी। वहीं 23 नवंबर को देवउठनी ग्यारस होगी ।
इस बार प्रबोधिनी एकादशी का विशिष्ट योग बन रहा है। इस दिन तुलसी विवाह के साथ शादियां शुरू हो जाएंगी। इस दिन से विवाह सहित अन्य शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। इस बार चातुर्मास की अवधि 5 महीने रही, जिससे मांगलिक कार्य नहीं हो रहे थे। अब जल्द ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी।
आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर करे भोजन
अक्षय नवमीं पर पूजा पाठ सुबह से ही शुरू हो गयें थे। अक्षय नवमीं पर किए गए पूजा से धर्म, कर्म, पुण्य कभी नष्ट नहीं होते और स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अति शुभ माना गया है। महिलाओं ने आंवले के पेड़ की पूजन कर भगवान विष्णु से अक्षय प्राप्त कर अपने परिवार की सुख की कामना कर आंवले के पेड़ के परिक्रमा की गई। महिलाओं का मानना है कि आंवला के पेड़ की परिक्रमा से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। पंडित भूपेंद्र शास्त्री ने बताया कि एकादशी पर विशिष्ट योग बन रहा है । इस बार प्रमोदिनी एकादशी आ रही है। इस पर तुलसी विवाह के साथ ही शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। शास्त्री जी ने बताया कि इस बार चातुर्मास 5 महीने का होने के कारण अब विवाह मुहूर्त 23 नवंबर से शुरू हो जाएंगे तुलसी विवाह के साथ शादियां शुरू होंगी।

