ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 26 नवम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 26 नवम्बर 2023

26 नवम्बर 2023 दिन रविवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का चतुर्दशी तिथि है। व्रत की पुर्णिमा आज ही है। आज औदायिक रूप से भगवान श्रीकाशीविश्वनाथ जी की प्रतिष्ठा का दिन है। इसलिए आज काशी के विश्वनाथ मंदिर में उत्सव का सा माहौल होता है। आज महारविवार व्रत का आरंभ भी होता है। प्रदोष व्यापिनी पुर्णिमा है, इसलिए त्रिपुर (अर्थात तीनों लोकों में) उत्सव होता है। इसलिए आज के दिन सर्वप्रथम मंदिर में दीप जलाना चाहिए उसके बाद भगवान का दर्शन करना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “श्रीकाशीविश्वनाथ प्रतिष्ठा दिवस एवं व्रत के पुर्णिमा” की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – कार्तिक मास शुक्ल पक्ष वार रविवार चतुर्दशी तिथि 03:53 PM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथी स्वामी : पूर्णिमा के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्‍य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र भरणी 02:05 PM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। तथा नक्षत्र के देवता यम और लिंग स्री है।
🔊 योग : परिघ योग 01:36 AM तक, उसके बाद शिव योग
प्रथम करण : वणिज – 03:53 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 03:16 ए एम, नवम्बर 27 तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:19:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:45 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:10 ए एम से 06:27 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:41 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:37 पी एम से 06:03 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:40 पी एम से 06:56 पी एम
💧 अमृत काल : 09:27 ए एम से 11:00 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:38 पी एम से 12:29 ए एम, नवम्बर 27
❄️ रवि योग : 06:27 ए एम से 02:05 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वैकुंठ चतुर्दशी/व्रत पूर्णिमा/ भगवान श्रीकाशीविश्वनाथ जी की प्रतिष्ठा दिवस/ महारविवार व्रत का आरंभ/ पंजाबी गायक जसदीप सिंह गिल जन्म दिवस, भारतीय छायाकार वेंकटराम पंडित कृष्णमूर्ति जन्म दिवस, दहेज निषेध दिवस – महाराष्ट्र, भारत के राजनेता शंकर दयाल सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध इतिहासकार राम शरण शर्मा जन्म दिवस, प्रसिद्ध लेखक नाथूराम प्रेमी जयन्ती, विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस, संविधान दिवस, राष्ट्रीय दुग्ध दिवस, राष्ट्रीय कानून दिवस
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इस पूर्णिमा तिथि के देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णिमा तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🗼 Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे सीढ़ियों में वास्तु संबंधी समस्याओं के उपाय के बारे में। घर बनवाते समय सीढ़ियां बनवाने के स्थान पर मिट्टी के कलश में बारिश का पानी भरकर और उसे मिट्टी के ढक्कन से ढककर जमीन के नीचे दबा दें। इससे सीढ़ियों का वास्तु संबंधी समस्या खत्म हो जाएगा, लेकिन यदि आप किसी कारण वश ऐसा करने में समर्थ नहीं हो पाए तो भी घबराने की बात नहीं है, वास्तु शास्त्र में इसके लिए भी एक उपाय है। इसके लिए घर की छत पर एक मिट्टी के बर्तन में प्रतिदिन सतनाज और दूसरे बर्तन में जल भरकर पक्षियों के लिए रख दें।
इससे आपकी सारी परेशानियां अपने आप खत्म हो जाएंगी। इस उपाय के अलावा कुछ बातें और हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। सीढ़ियों का प्रारंभ कभी भी त्रिकोणात्मक रूप में नहीं करना चाहिए और सीढ़ियों के दोनों ओर रेलिंग लगवानी चाहिए। साथ ही सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम होनी चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शत्रु नाश के लिए साधना विधि
मंत्र: “ऊँ भूर्भुवः स्वः रक्षा काराय नमः”
प्रयोग विधि:

  1. सुबह-सुबह स्नान करें और पवित्र हों जाए ।
  2. एक शुभ मुहूर्त में ये मंत्र 108 बार बोलें।
  3. मंत्र उच्च स्वर में बोलें और ध्यान के साथ बोलें। ध्यान केंद्र में दुश्मन का चेहरा विचार करें।
  4. इस मंत्र को नियमित रूप से 42 दिन तक जारी रखें।
  5. उसके बाद किसी भी दुश्मन को आपातकाल में इस मंत्र की मदद से नष्ट करने के लिए उपयोग करें।
    👉🏼 सभी सावधानियों के साथ इस मंत्र का प्रयोग करें और किसी भी दुश्मन के प्रति अनुचित प्रयोग न करें। सत्यापित और विश्वसनीय संस्थानों द्वारा से प्राप्त किए गए तरीक़े का प्रयोग करें।
    🍃 आरोग्य संजीवनी 🍁
    खट्टी डकार की समस्या को दूर करने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू टिप्स
    नींबू पानी कभी-कभी ऐसा होता है कि सुबह उठते ही खट्टी डकार आने लगती है। अगर आपको भी ऐसी समस्या होती है तो आप तुरंत एक गिलास नींबू पानी घोलकर पी लें। अगर सादा नमक की जगह नींबू-पानी के साथ काला नमक लें तो आपको जल्दी आराम मिलेगा।
    सौंफ और मिश्री अगर आपको रात के समय खट्टी डकार की समस्या आ रही है तो नींबू पानी और दही का सेवन बिल्कुल न करें। ये आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। रात के समय आप सौंफ के साथ मिश्री का सेवन कर सकते हैं। इससे आपको जरूर राहत मिलेगी। दरअसल, सौंफ पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और पेट में गैस नहीं बनने देता जबकि मिश्री से पेट को ठंडक मिलती है।
    काला नमक पाचन के लिए काफी फायदेमंद है। खट्टी डकार की समस्या में काला नमक और जीरे के प्रयोग से राहत पाई जा सकती है। अगर आपको अक्सर खाने के बाद खट्टी डकार की समस्या होती है तो 100 ग्राम जीरे को तवा पर भून लें और फिर महीन पीस लें। रोज खाने के बाद एक ग्लास पानी में आधा चम्मच भुने जीरे का पाउडर और आधा चम्मच काला नमक डालकर पिएं। इससे आपको आराम मिल सकता है।
    📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
    गीता में भगवान श्री कृष्ण ने आसुरी संपत्ति की पहचान के लिए कितने लक्षण बताए हैं?
    गीता में भगवान श्री कृष्ण ने आसुरी संपत्ति की पहचान के लिए छह लक्षण बताए हैं:
    अभिमान: आसुरी संपत्ति वाले लोग दूसरों पर अहंकार करते हैं और खुद को सबसे श्रेष्ठ समझते हैं।
    क्रोधा: आसुरी संपत्ति वाले लोग जल्दी क्रोधित हो जाते हैं और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार रहते हैं।
    मद: आसुरी संपत्ति वाले लोग दूसरों पर दया नहीं करते हैं और खुद को ही सबसे महत्वपूर्ण समझते हैं।
    लोभ: आसुरी संपत्ति वाले लोग हमेशा दूसरों की चीजों को हड़पने की कोशिश करते हैं।
    ईर्ष्या: आसुरी संपत्ति वाले लोग दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करते हैं और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।
    अज्ञानता: आसुरी संपत्ति वाले लोग सत्य और असत्य में भेद नहीं कर पाते हैं और हमेशा गलत कामों में लिप्त रहते हैं।
    इन लक्षणों को पहचानकर, हम आसुरी संपत्ति वाले लोगों से बच सकते हैं और स्वयं को आसुरी गुणों से दूर रख सकते हैं।
    भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि आसुरी संपत्ति वाले लोग अंततः विनाश के भागी बनते हैं। इसलिए, हमें आसुरी गुणों से दूर रहना चाहिए और दैवी गुणों को अपनाना चाहिए।
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    ⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज शरद पूर्णिमा है और आज ही के दिन सांसारिक जीवन एवं आध्यात्मिक जीवन का अंतर भगवान श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में गोपियों के साथ रास रचाकर बताया था। इसीलिये आज के दिन देश के बहुधा क्षेत्रों में रात्रि में लोग नृत्य-गीतादि के आयोजनों के साथ खुले आसमान के तले खीर बनाकर भगवान को समर्पित कर उसे प्रसाद की तरह मिल-बाँटकर खाते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस रात्रि आसमान से चन्द्रमा अपनी किरणों के साथ अमृत की वर्षा करता है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा तिथि में उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।
    पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन माता महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।

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