ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 28 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 28 दिसम्बर 2023

28 दिसम्बर 2028 दिन गुरुवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। आज सर्वार्थसिद्धियोग है रात्री 12:31 बजे तक। आज गुरु-पुष्य योग भी है। आज इन दोनों योगों के होने से सर्वार्थऽमृतसिद्धियोग का निर्माण हो रहा है। आज सभी सनातनी बंधुजन आज के इस दिव्य मुहूर्त का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए आप अपने जिस भी इष्ट देवता को मानते हों, उनका मूल मंत्र का जप ज्यादा से ज्यादा करें। दूसरा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु आज आँवले के जड़ में घी के दीपक में एक चुटकी हल्दी डालकर जला देवें। बिटिया की शादी में विलम्ब हो रहा हो तो नहीं होगा अर्थात शीघ्र ही विवाह का योग बन जाएगा।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – पौष मास शुक्ल पक्ष दिन गुरुवार प्रतिपदा तिथि – 06:46 ए एम तक उसके उपरांत द्वितीय तिथि
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है । द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 01:04 AM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु बृहस्पति होता है। तथा राशि स्वामी बुध हैं. नक्षत्र की देवी अदिति हैं।
🔕 योग – इन्द्र योग 02:23 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : कौलव – 06:46 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 07:19 पी एम तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:01 ए एम से 05:53 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:27 ए एम से 06:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:40 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:09 पी एम से 02:53 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:48 पी एम से 06:14 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:51 पी एम से 07:08 पी एम
💧 अमृत काल : 10:31 पी एम से 12:13 ए एम, दिसम्बर 29
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:44 ए एम, दिसम्बर 29
🪷 गुरु पुष्य योग : 01:05 ए एम, दिसम्बर 29 से 06:45 ए एम, दिसम्बर 29
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
💦 अमृत सिद्धि योग : 01:05 ए एम, दिसम्बर 29 से 06:45 ए एम, दिसम्बर 29
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में बेसन से बनी मिठाई चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/गुरुपुष्यमृत योग उ. रात्रि 01.03 से (दि. 29 दिसंबर 2023) सुबह 07.23 तक/ कांग्रेस स्थापना दिवस, राजगोपालाचार्य स्मृति दिवस, भारतीय राजनेता अरुण जेटली जन्म दिवस, भारतीय उद्योगपति रतन टाटा जन्मोत्सव, प्रसिद्ध उद्योगपति धीरूभाई अंबानी जन्म दिवस, केन्द्रीय आरक्षी पुलिस दिवस
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
दक्षिण दिशा में मुंह करके खाना खाना, आपको अकाल मृत्यु की ओर ले जाता है। दरअसल, माना जाता है कि ये दिशा मरे हुए लोगों की है और इस दिशा में ऐसी ही एनर्जी रहती है। जब आप इस दिशा में खाना खाते हैं तो ये नकारात्मक एनर्जी आपके खाने में मिल जाती है या फिर आपके खाने का एक भाग इन्हें भी जाने लगता है। फिर लगातार ये काम करना इनके साथ संपर्क बढ़ाता है और मृत्यु की दिशा एक्टिवेट हो जाती है और आप या आपका कोई खास अचानक से अकाल मृत्यु की ओर जाता है।
खाने की सही दिशा क्या है-खाने की सही दिशा है पूर्व। दरअसल, इस दिशा में खाना मानसिक तनाव को दूर करता है और आपके पाचन क्रिया को सही करता है। इसके अलावा इस दिशा में खाना खाने से आप हेल्दी रहते हैं। इतना ही नहीं इस दिशा में खाना खाने से आपके माता-पिता की भी सेहत अच्छी रहती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नाक की एलर्जी के लिए क्या करना बेहतर होगा?
आयुर्वेद का एक बहुत प्राचीन तेल था – व्याघ्री तेल, जिसे अब कम्पनियों ने बनाना बन्द कर दिया। क्योंकि लोग आयुर्वेद को भूलते जा रहे हैं इसलिए बहुत उत्पाद दिनोदिन बन्द हो रहे हैं।_
अगर यह तेल कहीं बाजार में मिल जाये, तो पूरा परिवार इसका इस्तेमाल अवश्य करें। यह फेफड़ों को शुद्ध कर सभी एलर्जी या संक्रमण को जड़ से मिटा देता है।
आप चाहें, तो निम्न फार्मूले के अनुसार घर पर भी बना सकते हैं। ये ओषधियाँ किसी पंसारी से खरीदें।
संक्रमण या एलर्जी होने का मूल कारण है-खून का खराब होना। दूषित रक्त अनेक रोगों का जन्मदाता है।
अधिकांश लोग एलर्जी का बाहरी इलाज करते हैं। इससे रक्त का शुद्धिकरण नहीं हो पाता।
आरोग्य संजीवनी 🫖
दबी हुई नस खोलने के घरेलू उपाय क्या हैं? चुने का करें स्तेमाल दबी हुई नस को खोलने के पान वाला ले इस चुने को पानी, लस्सी, दही, जूस इनमें से किसी के भी साथ ले सकते हैं। आपको एक दिन में एक चुटकी भर चुना ही लेना है। इस बात का ध्यान रखें की सुबह सुबह खाली पेट इस नुस्खे को आजमाएं जो आपकी दबी हुई नस को खोलने का काम करेगा।
नस दब जाने पर क्या करना चाहिए? शरीर की नस दबने से हो रहा है गंभीर दर्द? मिनटों में राहत देंगे ये 5 उपाय, अकड़न भी होगी खत्म।
आराम करें शरीर के कई हल्के दर्दों से राहत पाने के लिएं आपको परियाप्त आराम करना चाहिए।…
ठंडा और गरम का सेक करें..
स्पलिंट…
मालिश करना..
प्रोशर ठीक करें..
नस दबने से क्या हो सकता है?
जो कि नस के दबने और उसका दौरा रूकने की वजह से होती है और मरीज के पैर और तंग सुन्न भी रहने लगते हैं। और यह तकलीफ़ धीरे धीरे बढ़ाने लगती है। और मरीज का चलना फिरना और खड़े होना भी मुस्किल हो जाता है। इस नस के दबने का पता एमआरआई से लगता है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌷
*कौए को श्राद्ध का अन्न क्यों खिलाया जाता है?_
बात त्रेतायुग की है जब श्रीराम मंदाकिनी नदी के किनारे बैठकर सीता के बालों में पुष्प लगाकर उनका श्रृंगार कर रहे थे। इंद्र का पुत्र जयंत कौआ बन कर आया और उसने सीता के पैरों में चोंच मार दिया वह श्रीराम का बल देखना चाहता था।
सीता के पैरों से खून निकलता देख श्रीराम ने पास पड़ा एक तिनका उठाया और मंत्र फूंककर उसे ब्रह्मास्त्र बना दिया और उसे कौए के पीछे छोड़ दिया। ब्रह्मास्त्र कौए के पीछे पड़ा गया। जयंत भाग कर अपने पिता इंद्र के पास गया लेकिन इंद्र ब्रह्मास्त्र से पीछा नहीं छुड़ा सके।
श्रीराम से छल करने वाला मूर्ख जयंत भय और शोक से व्याकुल होकर सारे लोकों का चक्कर लगाता रहा। शिव और ब्रह्मा भी उसकी सहायता करने से मना कर देते हैं।
अंत में नारद को उसपर दया आ जाती है और वह बोले रामबाण से केवल श्रीराम ही बचा सकते हैं। जयंत श्रीराम के पास भयभीत होकर जाता है और उनके चरण पकड़कर क्षमा मांगता है।
यद्यपि उस कौए का वध करना उचित था लेकिन कृपालु श्रीराम ने उसकी एक आंख फोड़कर उसे जीवनदान दे दिया। इसके साथ कौए को आशीर्वाद मिला की श्राद्ध पक्ष में कौए को खिलाया गया भोजन पूर्वजों को संतुष्ट करेगा। तभी से श्राद्ध पक्ष में कौए को श्राद्ध का भोजन कराया जाता है।
( श्रीराम का दर्शन अमोघ होता है जो उनकी शरण स्वीकार कर लेता है और उनका दर्शन प्राप्त करता है उसे कुछ ना कुछ आशीर्वाद जरूर मिलता है)
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस द्वितीया तिथि में जन्मे जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई भी तभी करते हैं, जबकि उससे अपना भी कुछ लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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