मध्य प्रदेश

कांक्रीट के नीचे डाल रहे हैं मुरम, 20 की जगह 12 एमएम सरिए का कर रहे उपयोग

देवरी मढ़िया मुंआर मार्ग पर 1.32 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण
सिलवानी । तहसील के ग्राम देवरी मढ़िया से मुंआर गांव तक मार्ग पर लंबे समय से पुल टूटा पड़ा हुआ था, जिसका निर्माण शुरु हो गया है। पुल निर्माण शुरु होने के कारण आसपास के गांव के ग्रामीणों सहित इस मार्ग से आवागमन करने वालों को अब परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और अनहोनी की आशंका से भी मुक्ति मिलेगी, लेकिन इस पुल का निर्माण कर रही निर्माण एजेंसी निधर्धारित मापदंड को दरकिनार कर निर्माण कर रही हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो पुल का बैस बहुत कमजोर बनाया जा रहा है, क्रांक्रीट के नीचे मुरम डाली जा रही है। यहीं नहीं महज 12 एमएम का सरिया पुल निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। जबकि पुल में 20 एमएम का सरिया उपयोग किया जाना चाहिए। वही हमारे संवाददाता ने यहां इंजीनियरों को लेकर जाकर पुल निर्माण की बारीकियों को समझा तो दो महत्वपूर्ण कमियां निकलकर सामने आई हैं। एक तो बैस में निर्धारित मापदंड के अनुरुप क्रांकीट और सरिए का उपयोग नहीं हो रहा है। दूसरी जो बर्टीकल डिस्ट्रीब्यूशन डाली जा रही है, उसमें भी सरिए कम हो रहे हैं, ऐसे में पुल की गुणवत्ता को लेकर समझौता किया जा रहा है। जो बाद में परेशानियों का कारण बन सकता है। इसलिए इसमें अभी सुधार होना चाहिए नहीं तो ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
पुल की 40 मीटर का लंबाई और 7.50 मीटर है चौड़ाई
इस पुल की लंबाई 40 मीटर है तो वहीं चौड़ाई साढ़े सात मीटर है, इससे आवागमन सुलभ होगा। वहीं आवागमन में दिक्कतों का सामना नहीं कर पड़ेगा। पहले भी इ पुल बना था, इस पर लेकिन यह जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो गया था, वहीं कई जगहों पर रगड्डा हो गया था, इसके अलावा बारिश के दौरान पुल पर पानी आ जाता था, लेकिन अब पुल की ऊंचाई भी अधिक होने से बारिश में आवागमन सुलभ हो सकेगा और ग्रामीण आसानी से आवागमन कर सकेंगे।
20 हजार की आबादी होगी परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से 30 गांव की लगभग 20 हजार आबादी आवागमन करती है। इसलिए ग्रामीणों के लिए यह पुल बहुत मायने रखता है, लेकिन गुणवत्ताहीन कार्य से ग्रामीण परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अफसरों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ताकि गुणवत्तायुक्त पुल का निर्माण हो हो और लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके। अफसरों की अनदेखी के कारण ही ठेकेदार मनमर्जी से निर्माण कार्य कर रहा है। पुल निर्माण में लोहा तो इतना पतला डाला जा रहा है जो ज्यादा वजन के डंपर, ट्रक निकलने पर धराशाही हो सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इसमें तत्काल सुधार करवाया जाए।
इस संबंध में नितिन मांडरे, एसडीओ पीएम सड़क योजना का कहना है कि निर्धारित मापदण्ड के अनुरुप ही कार्य किया जा रहा है। गुणवत्ता से समझौते का सवाल ही पैदा नहीं होता है, क्योंकि हमारी कंसलटेंट टीम के इंजीनियर भी मौके पर रहते हैं और समय समय पर दिल्ली की टीम और वह स्वयं निरीक्षण कर रहे हैं। इसलिए ठेकेदार को जो मापदण्ड है उसी के अनुरुप ही काम करना पड़ेगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरत सकता है।

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