संस्कृति को सुरक्षित रखने में सरस्वती शिशु मंदिर की भूमिका अहमः पटेल

सिलवानी । सरस्वती शिशु मंदिर मात्र शिक्षण संस्थान ही नहीं है। वे देश की संस्कृति को सुरक्षित रखने व नन्हें मुन्ने बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में अहम भूमिका निभाने का कार्य कर रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में प्रत्येक देशवासी का कर्त्तव्य है कि वह अपने बच्चों को सरस्वती शिशु मंदिर में प्रवेश दिलाकर देश की संस्कृति में अपना योगदान दें।
उक्त उद्गार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने सियरमऊ के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित वार्षिक उत्सव समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विद्या भारती मध्य भारत के संगठन महामंत्री निखिलेश माहेश्वरी मौजूद रहे। विशेष अतिथि पूर्व न्यायाधीश तुलसीराम उईके और अध्यक्षता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा ने की। राज्यमंत्री ने कहा कि देश की मातृ भाषा हिंदी को बढ़ावा देने का कार्य भाजपा सरकार कर रही है। मेडिकल की पढ़ाई भी हिंदी में कराने का निर्णय लिया जा चुका है। सरस्वती शिशु मंदिर कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति, व्यक्तित्व व देश के प्रति समर्पित नागरिक का निर्माण करते हैं। शिक्षा तो बहुत विद्यालय दे रहे हैं। मुख्य वक्ता निखिलेश माहेश्वरी ने बताया कि 1952 में पहला सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर उत्तर प्रदेश में प्रारंभ हुआ। एक छोटा सा पौधा आज वटवृक्ष की तरह सम्पूर्ण भारत में अपनी शिक्षा रूपी छाया दे रहा है। इसके साथ अन्य वक्ताओं ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी सहित उनके अभिभावक उपस्थित रहे।



