पान की खेती शासन के सपोर्ट के बिना असफलता की ओर अग्रसर

इतिहास बनते पान बरेजे, चौरसिया परिवारो मे बेरोजगारो की संख्या बढी
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । भारतबर्ष और विदेशों मे लबो की शान बढाने वाला भारत का खासकर मध्य प्रदेश बुन्देलखण्ड का प्रसिध्द पान जिसके देश विदेशो मे निर्यात से विदेशी मुद्रा की बचत होती है ऐसे स्थापित पान व्यवसाय को शासन की सपोर्ट नही मिलने से इसकी खेती धीरे धीरे समाप्त होती जा रही है। बता दे की प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिह चौहान के व्दारा प्राय सभी जाति के लोगो की समय समय पर महा पंचायते बुलाकर उनकी समस्याये सुनी व उनका समाधान किया लेकिन प्रदेश की सीधी साधी सरल व कर्मठ चौरसिया समाज की महापंचायत बुलाने से वह किनारा करते रहे परिणाम स्वरुप महापंचायत के अभाव मे चौरसिया समाज आज हासिये पर है शासन कि उपेक्षा के चलते पान बरेजे की खेती से जुडे चौरसिया परिवारो को मजवूरन परम्परागत व पुरातन संसाधनो से ही पान बरेजा की खेती करना पड रही है। मेहनती खर्चीली तथा प्राकृतिक आपदाओ से सदा जूझने व नुकसान सहने वाली पान की खेती करना सहज नही है। यही कारण है की चौरसिया समाज की नई पीढी शासन की उपेक्षा के कारण पान की खेती से बिमुख होती जा रही है सोचनीय बिषय तो यह है की शासन न तो नौकरी ही दे रहा है और नही पान व्यवसाय को बढावा दे रहा है यही कारण है की इससे जुडे हजारो लाखो चौरसिया परिवारो के युवक बेरोजगार बैठे हुए है यदि इनको शासन की मदद नई तकनीक आर्थिक सहायता बरेजे निर्माण मे लगने वाली सामग्री बास, बल्ली, कुरैया, लकडी, बकोडा,पानी, उपजाऊ अनुकूल जमीन आदि की व्यवस्था शासन उपलब्ध कराता है तो पान के इस मिटते हुए धन्धे को सिर्फ बचाया ही नही जायेगा बल्कि यह धन्धा फिर से जीवित होकर उठ खडा होगा और इससे जुडे हजारो चौरसिया समाज के बेरोजगार युवको को नौकरी रोजगार के लिए भटकना नही पडेगा। मध्य प्रदेश के डबल इंजन सरकार के नये मुख्यमंत्री डा मोहन यादव जी चौरसिया महापंचायत का सम्मेलन शीघ्र बुलायेगे ऐसी अपेक्षा है।



