मध्य प्रदेश

हाजी रशीद साहब के इंतेकाल से गम की लहर

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । सैकड़ो सागिर्दों के सीने में शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षक जो हेड मास्टर के ओहदे से रिटायर होने के बाद हज जैसे मुकद्दस फरीजे को अदा कर हाजी बने 87 वर्षीय हाजी अब्दुल रशीद खां के बीमारी के चलते इंतेकाल हो जाने से शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जहां-जहां खबर फैली गम की लहर दौड़ गई। आपके द्वारा पढ़ाए गए सैकड़ो सागिर्द जानकारी लगते ही आपके निवास पर पहुंच गए और गम का इजहार किया।
आपका जनाजा मक्का मस्जिद बालाई टेकरी ले जाया गया जहां इशां की नमाज के बाद आपकी जनाजे की नमाज पढ़ी गई और टेकरी वाले कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया।
आपको बता दें कि शहर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में आपने शिक्षक के नाते अपनी सेवाएं दी। आपका मधुर व्यवहार और मेहनत के साथ बच्चों को तालीम देना अनुकरणीय था। आपके द्वारा पढ़ाए गए कई छात्र आज ऊंचे ओहदों पर हैं या राजनीति में जन प्रतिनिधि बनकर लोगों की सेवा कर रहे हैं। आप अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
आपके इंतेकाल पर समाजसेवी संस्था इस्लाहे मिल्लत कमेटी, मंसूरी समाज संगठन, मुस्लिम त्योहार कमेटी, अल खैर ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी, दारुल इकामा मदीनतुल उलूम पठान वाली मस्जिद, इंतेजामिया कमेटी मस्जिदे अक्सा, मक्का मस्जिद, इंतेजामिया कमेटी बालाई टेकरी, इंतेजामिया कमेटी मस्जिद नूर हिदायतपुर, हिलाली अखाड़ा, पेंशनर एसोसिएशन, विभिन्न शैक्षणिक संगठनो सहित राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने खिराजे अकीदत पेश की है।

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