कभी भी गिर सकता है 11 हजार की लाइन वाला बिजली का खंबा, हादसे को दे रहा दावत

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । ग्राम खंडेरा से डावर के लिए 11केबी लाइन गई है ग्राम खंडेरा से एक किलोमिटर दूर रोड़ किनारे पर कभी भी गिर सकता है 11 हजार की लाइन वाला बिजली का खंबा, हादसे को दे रहा दावत सांचेत और डावर गांव के आने जाने वाले रास्ते का खंबा, बड़ी दुर्घटना को दे रहा है दावत, न जाने कब बदलेगा बिजली का जर्जर खंबा रायसेन जिले के देवनगर थाना छेत्र के खंडेरा से एक किलोमिटर दूर सांचेत का रास्ता है, उस रास्ते से प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। वहीं रोड़ से सटे जर्जर खंभे पर टिका 11 हजार बोल्ड का तार बड़ी घटना का सबब बन सकता है। वैसे तो आये दिन विद्युत खंभों में फैल रहे करंट की चपेट में आकर पशु जान गवा रहे हैं।
यह जर्जर हो चुका खंबा ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली शहरों व गांवों में केवल राजस्व वसूली तक ही सीमित रह गयी है। अव्यवस्था के बारे में सब कुछ जानते हुए जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस रास्ते पर हमेशा लोगों का आवागमन होता है। फिर भी प्रशासन और बिजली विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है। उसी समय के लगे विद्युत तार और खंभे काफी जर्जर हो गए हैं और उसके रखरखाव तथा मरम्मत की ब्यवस्था कभी ठीक से नहीं कराई गई, जिससे जर्जर तार झुके खंभे आंधी तूफान में टूट कर गिर जाते हैं। फिर विभाग द्वारा किसी तरह जोड़तोड़ कर बिजली चालू कर दी जाती है और हमेशा फाल्ट और सप्लाई बन्द होने की मार जनता पर पड़ती और लोगो को उपकेंद्र का चक्कर लगाना पड़ता है।
पुराने तारों के भरोसे जरूरत के मुताबिक व्यवस्था में सुधार कर पाना सम्भव नहीं हो पा रहा है। कई पानी लगने से सड़ कर टूटने और गिरने के कगार पर हैं। ग्राम द्वार के राजेश बघेल, संतोष बघेल, सुनील बघेल ने बताया गांव में हमेशा टार टूटकर गिरता रहता और विद्युत फाल्ट होता है। जिससे बिजली अक्सर बाधित होती रहती है और उसका खमियाजा लोग भोगने को मजबूर हैं। लोगों ने प्रशासन और सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। जिससे जर्जर तार खंभे को बदलकर समस्या का समाधान किया जा सके।



