40 दिवसीय हज यात्रा करके वापिस आने पर शहर में दाखिल होने से पहले किया स्वागत

हाजियों से कराई गई दुआ
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । इस्लाम धर्म की पवित्र हज यात्रा पर शहर से करीब 13 लोग महिला पुरुष हज यात्रा पर गए थे। जायरीने तैबा हज के मुकद्दस सफर पर मक्का शरीफ मैं हज के अरकान अदा करके और मदीना मुनव्वर में आका के दर पर हाजिरी देकर जब वापस लौटे तो शहर के बाहर लोगों ने फूल मालाओं से स्वागत करते हुए खैर मकदम किया। हाजियों के माथे और उनके हाथों को चूमा गले मिलकर मुबारक बाद दी वहीं हाजियों ने सभी के लिए हज के सफर पर जाने और उनकी जाइज तमन्नाओं को पूरा करने का आशीर्वाद दिया।
एक दिन पहले जहां मास्टर मरहूम असगर खान के साहबजादे अरशद भाई कपड़े वाले हज का फरीजा अदा करके वापस लौटे वहीं इलाके में हाजी परिवार के नाम से मशहूर खानदान के खास सदस्य हाजी चांद मियां मंसूरी अपनी पत्नी के साथ, उनके चचेरे भाई नूर मो. मंसूरी और शरीफ भाई मंसूरी माला वाले सुबह करीब नो बजे वापस हुए तो शहर के बाहर चकला नाले के करीब हाजी मुश्ताक खान के मकान पर समाज के प्रमुख लोगों द्वारा फूल मालाओं से स्वागत किया। यहां पर आयोजित कार्यक्रम में हजरत मौलाना असालत खां नदवी ने हज के बारे में रोशनी डालते हुए बताया कि जब हाजी हज के सफर पर जाएं तो उन्हें अपनी दुआओं के साथ रवाना करें और कुछ दूर तक छोड़ने भी जाएं जब हाजी हज करके वापस आ जाएं तो शहर में दाखिल होने से पहले उनसे दुआ कराएं और उनका इस्तकबाल करें यही रिवायत में है जो हज़रात अपना कीमती वक्त निकाल कर यहां हाजियों के इस्तकबाल के लिए बैठे रहे, निस्बतें मुस्तफा की खातिर उन्होंने ये कुर्बानी दी है खुदा कुबूल फरमाए।
हज यात्रा करके लौटे हाजी हजरात ने शहर सहित भारत और पूरे विश्व में शांति और सलामती के साथ-साथ लोगों की जाइज तमन्नाओं को पूरा करने की दुआ कराई । हाजी साहब ने सभी के लिए हज पर जाने और बार-बार जाने की दुआ दी और सभी का शुक्रिया अदा किया। हाजी साहिबान उसके बाद अपने मोहल्ले की मस्जिद में पहुंचे वहां पर दुआ की और घर में दाखिल होने से पहले दुआ की हज के मुकद्दस फराइज को अदा करने के बाद वहां से लाए पवित्र जल आबे जमजम को लोगों के लिए पीने के लिए दिया लोगों ने अदब से खड़े होकर काबा शरीफ की तरह मुंह करके अपनी जायज दुआ की कुबूलियत का इरादा करते हुए पानी को पिया हाजियों ने वहां से लाए हुए तोहफे भी लोगों को पेश किए, रिश्तेदार और करीबी लोग भी हाजियों के लिए तोहफे लेकर आए।
हाजियों के स्वागत के मौके पर कई साहिबे निसाब लोगों ने आइंदा साल हज पर जाने का इरादा जाहिर किया तो हाजियों ने अमीन की सदा देते हुए उन्हें दुआएं दी।

