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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 21 जुलाई 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 21 जुलाई 2024
21 जुलाई 2024 दिन रविवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज गुरुपूर्णिमा का पावन त्यौहार है, जो सम्मानित संतजन एवं वेदिक ब्राह्मणों के सम्मान में मनाया जाता है। आज अपने गुरु एवं व्यास भगवान की पुजा का भी विधान है। आज स्नान-दानादि की पुण्यतम पूर्णिमा भी है। आज की पुर्णिमा को आषाढ़ी पुर्णिमा भी कहा जाता है। आज सायंकाल में सभी अन्न मिलाकर सबका अधिवासन और वायु परीक्षण का विधि भी किया जाता है। गौ पूजन एवं घर में गौ प्रवेश बाद में गाय की पुजा का भी विधान किया जाता है। आज आषाढ़ी योग भी है। आज बौद्ध धर्म चक्र परिवर्तन दिवस (सारनाथ एवं काशी) भी है। आज कर्णघंटा (काशी) कनखल या हरिद्वार का स्नान प्रशस्त बताया गया है। फूल बंगला महोत्सव जो वृन्दावन में मनाया जाता है, उसकी आज समाप्ति दिवस है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “गुरुपूर्णिमा के पावन त्यौहार” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 03:47 PM तक उपरांत प्रतिपदा
📝 तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्‍य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 12:14 AM तक उपरांत श्रवण
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।राशि स्वामी गुरु है तो नक्षत्र स्वामी सूर्य है।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 09:11 PM तक, उसके बाद प्रीति योग
प्रथम करण : बव – 03:46 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – 02:31 ए एम, जुलाई 22 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:16:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:40:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:14 ए एम से 04:55 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:35 ए एम से 05:37 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:18 पी एम से 08:20 पी एम
💧 अमृत काल : 06:15 पी एम से 07:45 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 22 से 12:48 ए एम, जुलाई 22
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:37 ए एम से 12:14 ए एम, जुलाई 22
🚓 यात्रा शकुन-ईलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-किसी पवित्र नदी में स्नान कर विष्णु मंदिर में स्वर्ण चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/स्नान-दान पूर्णिमा/ गुरु पूर्णिमा/ व्यास पूजा/ संन्यासी जनों का चतुर्मास आरंभ/ पूर्णिमा समाप्त दोपहर 03.47/ फूल बंगला महोत्सव समाप्ति दिवस, बौद्ध धर्म चक्र परिवर्तन दिवस, भगवान व्यास पूजा, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित स्मृति दिवस, 356 ई.पू. में सिकंदर जयन्ती, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी चेतन चौहान जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी जयरामदास दौलतराम जयन्ती, प्रसिद्ध संगीतकार सज्जाद हुसैन स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कुछ बनो दिवस, संगीतकार आनंद बख्शी जन्म दिवस, कानूनी शराब पीने की आयु दिवस, राष्ट्रीय आइसक्रीम दिवस, राष्ट्रीय जंक फूड दिवस, राष्ट्रीय लैमिंगटन दिवस, राष्ट्रीय किसी व्यक्ति बनने का दिवस
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🗽 Vastu tips 🗼
कांच के बोतल में रखें नमक अगर आप चाहते हैं कि आपके घर और जीवन में धन का प्रवाह बढे तो ऐसे में आपको घर के ईशान कोण में कांच के एक बोतल में नमक डालकर रख देना चाहिए. इससे आपके जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है.
नल से न टपकने दें पानी आपको इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि अगर आपके रसोईघर या फिर बाथरूम से पानी टपक रहा है तो उसे जल्द से जल्द ठीक करवा दें. इसे काफी अशुभ मना जाता है क्योंकि नल से पानी टपकने की वजह से आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहती है.
इन चीजों को घर पर न रखें वास्तु शास्त्र की अगर माने तो हमें अपने घर पर कभी भी बंद घड़ी या फिर टूटे हुए शीशे को नहीं रखना चाहिए। अगर आप इन चीजों को घर पर रखते हैं तो इससे नकारात्मकता फैलती है.
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां
लगातार 60 दिन तक शराब पीने से होते हैं ये नुकसान-
डेली मेल से बात करते हुए ड्रिंकवेयर के सीईओ करेन टायरेल(Karen Tyrrell, CEO of Drinkware) ने कहा, कुछ लोगों का मानना है कि शराब पीने से जल्‍दी नींद आती है, लेकिन यह आपके रैपिड आई मूवमेंट को बाधित करता है, जिससे अगले दिन आपको थकान महसूस होती है। भले ही आप कितनी ही देर तक क्‍यों न सोएं, रैपिड आई मूवमेंट आधी रात में जागने की वजह बन सकता है। लंबे समय तक शराब पीने से स्क‍िन संक्रमण और कैंसर के खतरे का खतरा बढ़ सकता है। यह इम्‍यून सिस्‍टम को कमजोर करता है। टायरेल ने कहा, यदि आपका वजन अधिक है और आप नियमित रूप से शराब पीते हैं,
तो आपको पता चलेगा कि शराब छोड़ने के बाद आपका वजन काफी कम हो जाता है। एक बीयर में लगभग 154 कैलोरी होती है, जबकि 5-औंस गिलास वाइन में लगभग 123 कैलोरी होती है। वोदका, टकीला, जिन और रम जैसी हार्ड शराब की मात्रा आम तौर पर प्रति औंस 100 कैलोरी से कम होती हैं। हाल के शोध से पता चला है कि किसी भी मात्रा में शराब के सेवन से पीने वालों में 60 से अधिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
पेठे का रस🔹
🔸सफेद पेठा (प्रचलित नाम – कुम्हड़ा, गुजराती – भूरूं कोहलु, मराठी – कोहळा, अंग्रेजी – Ash Gourd) आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत लाभदायी फल, सब्जी तथा अनेकों रोगों में उपयोगी औषधि भी है ।
🔸यह रस में शीतल, पित्त एवं वायु का शमन करनेवाला, शरीर पुष्टिकर, वजन बढ़ाने में सहायक एवं वीर्यवर्धक है ।
🔸यह अम्लपित्त (hyperacidity), शरीर की जलन, सिरदर्द, नकसीर (नाक से खून आना), टी.बी. के कारण कफ के साथ खून आना, खूनी बवासीर, मूत्र की रुकावट एवं जलन, नींद की कमी, प्यास की अधिकता, श्वेतप्रदर एवं अत्यधिक मासिक स्राव आदि पित्तजनित समस्याओं में अक्सीर औषधि है ।
🔸आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार यह कैल्शियम, आयरन, जिंक एवं मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है । इसमें निहित एंटी ऑक्सीडेंट मधुमेह (diabetes), उच्च रक्तचाप (High B.P.), कैंसर आदि रोगों से सुरक्षा करने में सहायक है ।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक समय की बात है. एक राजा घने जंगल में भटक गया. कई घंटों के बाद वह प्यास से व्याकुल होने लगा. तभी उसकी नजर एक वृक्ष पर पड़ी जहां एक डाली से टप-टप करती पानी की छोटी- छोटी बूंदें गिर रही थीं.
राजा ने पत्तों का दोना बनाकर पानी इकट्ठा किया, राजा जैसे ही पानी पीने लगा, एक तोता आया और झपट्टा मारकर दोने को गिरा दिया. राजा ने सोचा, पंछी को प्यास लगी होगी, इसलिए वह भी पानी पीना चाहता होगा लेकिन गलती से उसने झपट्टा मारकर पानी को गिरा दिया. यह सोचकर राजा फिर से खाली दोने को भरने लगा, काफी देर के बाद वह दोना फिर भर गया. राजा ने हर्षचित्त होकर जैसे ही दोने को उठाया तो तोते ने वापस उसे गिरा दिया. राजा को बहुत तेज गुस्सा आया और उसने चाबुक उठाकर तोते पर वार किया और उसके प्राण निकल गए। राजा ने सोचा,अब मैं शांति से पानी इकट्ठा कर अपनी प्यास बुझा पाऊंगा।यह सोचकर वह वापस पानी इकट्ठा होने वाली जगह पहुंचा तो उसके पांव के नीचे की जमीन खिसक गई. उस डाली पर एक जहरीला सांप सोया हुआ था और उस सांप के मुंह से लार टपक रही थी. राजा जिसको पानी समझ रहा था, वह सांप की जहरीली लार थी. राजा का मन ग्लानि से भर गया. उसने कहा, ‘काश ! मैंने संतों के बताए उत्तम क्षमा मार्ग को धारण कर क्रोध पर नियंत्रण किया होता तो मेरे हितैषी निर्दोष पक्षी की जान नहीं जाती।
जल्दबाजी और बिना सोचे-विचारे किया गया काम निकल गए. राजा ने सोचा, अब मैं हमेशा परेशानी और पश्चाताप का कारण बनता है.।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज दत्तात्रेय भगवान जी की जन्म जयन्ती है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।

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