आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 23 जुलाई 2024
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 10:23 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है । द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 08:18 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल हैं और देवता वसु हैं। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देव अष्ट वसवाल हैं और राशि स्वामी शनि हैं।
⚜️ योग – आयुष्मान योग 02:35 PM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : गर – 10:23 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 08:56 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:20:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:40:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:15 ए एम से 04:56 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:36 ए एम से 05:38 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:17 पी एम से 08:19 पी एम
💧 अमृत काल : 10:47 ए एम से 12:15 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 24 से 12:48 ए एम, जुलाई 24
🌸 द्विपुष्कर योग : 05:38 ए एम से 10:23 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-हनुमान मंदिर में लाल फल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : पंचक प्रारंभ 09. 20/भद्रा/फलद्वितीया/ लोकमान्य व स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक जयन्ती, पार्श्व गायक हिमेश रेशमिया जन्म दिवस, लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद जयन्ती, राष्ट्रीय प्रसारण दिवस, स्प्रिंकल डे, पीनट बटर, चॉकलेट डे, विश्व स्जोग्रेन दिवस, राष्ट्रीय वेनिला आइसक्रीम दिवस, राष्ट्रीय भव्य दादी दिवस
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु के अनुसार कभी भी मंदिर में लाल रंग का बल्ब नहीं लगाना चाहिए। इससे तनाव की स्थिति बन सकती है। इसलिए सफेद रंग का बल्ब लगाएं। इसके अलावा मंदिर में कभी भी पूर्वजों की फोटो न लगाए। वास्तु के अनुसार एक ही भगवान की कई सारी तस्वीरें भी मंदिर में नहीं रखनी चाहिए।
वास्तु के अनुसार पूजा में उपयोग होने वाले बर्तनों को हमेशा साफ रखें। इन्हें सभी बर्तनों से अलग रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार देवी-देवताओं की प्रतिमा रोजाना साफ करें, इससे सुख-समृद्धि बनी रहती है।
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तेल के कुल्ले करने के क्या फायदे हैं?
तेल से कुल्ला करने से हमें दांतो से संबंधित और अन्य कई बीमारियों में फायदा मिलता है। पहले जमाने में लोग रोजाना तेल के कुल्ले किया करते थे। परंतु आजकल इसका प्रचलन बहुत कम हो गया है। लेकिन पश्चिमी देशों में अभी भी लोग तेल के कुल्ले करते हैं।
इसके लिए कोई भी तेल जैसे कि बादाम का, तिल का ,नारियल का या फिर सरसों का तेल भी आप ले सकते हैं। एक चम्मच तेल लेकर मुंह में पांच 7 मिनट के लिए घुमाए।जब आप तेल को अपने मुंह में घुमाएंगे तो मुंह में सफेद -सफेद रंग का कुछ पदार्थ भर जाएगा।
इसे आपने अपने मुंह के अंदर नहीं लेकर जाना है। आप इस तेल को पांच 7 मिनट कुल्ला करने के बाद बाहर थूक दे। फिर उसके बाद गर्म पानी से कुल्ला कर ले। इस क्रिया को आपने खाली पेट करना है।
इससे आपके शरीर के अंदर जो भी जहरीले पदार्थ होंगे वे इस तेल के माध्यम से बाहर आ जाएंगे। एक-दो दिन आपको थोड़ा सा असाधारण भी लग सकता है। परंतु घबराने की कोई बात नहीं है।एक-दो दिन के बाद यह सामान्य हो जाता है और आपकी बीमारियां धीरे- धीरे ठीक होने लगती हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
पेठे का रस
🔸सफेद पेठा (प्रचलित नाम – कुम्हड़ा, गुजराती – भूरूं कोहलु, मराठी – कोहळा, अंग्रेजी – Ash Gourd) आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत लाभदायी फल, सब्जी तथा अनेकों रोगों में उपयोगी औषधि भी है ।
🔸यह रस में शीतल, पित्त एवं वायु का शमन करनेवाला, शरीर पुष्टिकर, वजन बढ़ाने में सहायक एवं वीर्यवर्धक है ।
🔸यह अम्लपित्त (hyperacidity), शरीर की जलन, सिरदर्द, नकसीर (नाक से खून आना), टी.बी. के कारण कफ के साथ खून आना, खूनी बवासीर, मूत्र की रुकावट एवं जलन, नींद की कमी, प्यास की अधिकता, श्वेतप्रदर एवं अत्यधिक मासिक स्राव आदि पित्तजनित समस्याओं में अक्सीर औषधि है ।
🔸आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार यह कैल्शियम, आयरन, जिंक एवं मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है । इसमें निहित एंटी ऑक्सीडेंट मधुमेह (diabetes), उच्च रक्तचाप (High B.P.), कैंसर आदि रोगों से सुरक्षा करने में सहायक है ।
📖 गुरु भक्ति योग 📖
शिव अघोरी शिव तंत्र के देवता हैं- इन्हें आदि अघोरी यानी संसार का पहला अघोरी भी कहा जाता हैं। पौराणिक मत हैं कि- अघोर वो हैं जिसकी बुद्धि और व्यवहार में कोई भेदभाव ना हो जिनकी बुद्धि में दूसरों के लिए भेदभाव होते हैं वो लोग घोर यानी भयंकर होते हैं शिव अघोरी हैं यानी ”सौम्य स्वभाव” के हैं सबके लिए एक समान हैं सारे देवताओं की पूजा में सामग्रियों का विशेष महत्व होता हैं अकेले शिव हैं जिनकी पूजा की सामग्रियों में सबसे कम सावधानियां हैं। उन्हें सिर्फ जल चढ़ाकर भी प्रसन्न किया जा सकता हैं। भांग धतूरा जैसी वो चीजें जो किसी भी पूजा में शामिल नहीं की जाती हैं वो शिव को चढ़ाकर मनाया जा सकता हैं ”शिव मन के देवता” हैं शिव पुराण कहता हैं- कि शिव आपके काम कम और मन के भाव ज्यादा देखते हैं अगर अच्छे मन से कुछ चढ़ाएंगे तो उन्हें वो सब स्वीकार हैं। अगर बिना शुद्ध भावों के छप्पन भोग भी लगाएंगे तो शिव को वो मंजूर नहीं हैं ”शिव सरल स्वभाव” को पसंद करते हैं
शिव चंद्रशेखर हमेशा अपने क्रोध पर नियंत्रण हो व्यवहार में शीतलता का संदेश देते हैं चंद्रशेखर या आशुतोष दोनों के अर्थ समान हैं जिसने अपने शिखर यानी माथे पर चंद्र को धारण किया हैं वो चंद्रशेखर हैं। शिव के इस नाम में उनका स्वभाव छिपा हैं चंद्रमा को सिर पर धारण करना यानी दिमाग को हमेशा ठंडा रखना चंद्रमा शीतलता का प्रतीक हैं सिर पर चंद्रमा का होना स्पष्ट करता हैं कि शिव के स्वभाव में शीतलता हैं बहुत कम प्रसंग मिलते हैं- जब शिव ने क्रोध किया हो बहुत से राक्षसों का संहार करते समय भी शिव ने कभी क्रोध नहीं किया- रामायण की कहानी हैं कि- रावण ने शिव को कैलाश से लंका ले जाना चाहा उसने सोचा कि मैं शिव को मनाकर ले जाऊंगा उसने कैलाश पर्वत को अपने हाथों से उठाने की कोशिश की जब शिव ने ये देखा कि रावण कैलाश सहित उठाकर लंका ले जाना चाहता हैं तो उन्होंने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबा दिया और रावण का हाथ वहीं दबा रह गया तब रावण को महसूस हुआ कि उसने शिव को क्रोधित कर दिया हैं। वास्तव में भगवान उस समय भी मुस्कुरा रहे थे रावण ने ”शिव तांडव स्तोत्र” की रचना कर शिव को सुनाई और शिव ने अपने पैर का अंगूठा हटाकर रावण को मुक्त कर दिया शिव कभी विचलित नहीं होते हमेशा स्थिर रहते हैं। यही कारण हैं कि उन्हें ”चंदशेखर” कहा जाता हैं।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।



