ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 05 अगस्त 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 05 अगस्त 2024
05 अगस्त 2024 दिन सोमवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि प्रतिपदा तिथि है। आज से गुजराती समाज का भी श्रावण मास आरम्भ होता है। आज उत्तर भारतीयों का तीसरा एवं गुजराती समाज का पहला श्रावण सोमवार का पावन व्रत है। श्रावण मास में साक खाना वर्जित बताया गया है यथा:- “श्रावणे वर्जयेच्छाकम्”। श्रावण मास में सम्पूर्ण मास भगवान शिव का मंदिर जाकर अथवा घर पर पार्थिव लिंग बनाकर ही सही नित्य गंगाजल से स्नान करवाना और विल्वपत्र से शिवार्चन करना चाहिये। इससे वर्षपर्यंत व्यक्ति परिवार सहित सकारात्मक ऊर्जा से लबालब भरा रहता है। उसके और उसके परिवार पर कोई भी मुसीबत नहीं आती। श्रावण सोमवार का व्रत करने से प्रदोष व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है। जिनके मन में अक्षय दाम्पत्य सुख की कामना हो उन्हें भगवन शिव के साथ ही भगवान विष्णु का का भी अभिषेक आज विधिपूर्वक करना चाहिए। आज जयद् योग भी है। आज पश्चिम दिशा में बुध देवता अस्त हो रहे हैं। आप सभी सनातनियों को “श्रावण सोमवार के तीसरे सोमवार व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 06:03 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 03:21 PM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध है।चंद्रमा अश्लेषा नक्षत्र का शासक ग्रह है। अहि या नागराज इस नक्षत्र के लिए हिंदू देवता है।
⚜️ योग – व्यातीपात योग 10:37 AM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : बव – 06:03 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – पूर्ण रात्रि तक
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:26:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:34:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:20 ए एम से 05:03 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:41 ए एम से 05:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:41 पी एम से 03:34 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:09 पी एम से 07:30 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:09 पी एम से 08:13 पी एम
💧 अमृत काल : 01:38 पी एम से 03:21 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 06 से 12:48 ए एम, अगस्त 06
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिव मंदिर में छैने से बनी मिठाई चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चन्द्र दर्शन/ शिवपूजन/ सावन माह तीसरा सोमवार व्रत, श्री राम मंदिर निर्माण उत्सव, महाराजा नंदकुमार शहीद दिवस, भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद जन्म दिवस, बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री काजोल जन्म दिवस, भारत के प्रसिद्ध राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी द्वारका प्रसाद मिश्रा जन्म दिवस, राष्ट्रीय अंडरवियर दिवस, स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई स्मृति दिवस, विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips_ 🏚️
जिन घरों में लड़ाई-झगड़े का महौल रहता है उन्हें शाम को शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। ध्यान रहे कि दीया कम से कम एक घंटे तक जलें। इससे नकारात्मकताएं दूर होंगी।
घर के पूर्व दिशा में एक मिट्टी के कलश में पानी भरकर रखने से गृह दोष खत्म होता है। जानकारों के अनुसार कलश का पानी हर सप्ताह बदलें।
घर में गणेश जी की पूजा करने एवं नवग्रह शांति पाइ करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है।
घर में वास्तु दोष को दूर करने के लिए पूजा स्थान पर चांदी का सांप रखें। इससे कालसर्प दोष से भी छुटकारा मिलता है।
जिनके यहां पैसा नहीं टिकता है उन्हें मां लक्ष्मी के चरणों में पांच पीली कौड़ियां रखनी चाहिए। आप चाहे तो घर के प्रवेश द्वार पर हल्दी से स्वास्तिक का निशान भी बना सकते हैं।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
क्या रोज दाढ़ी सेव करने से कोई समस्या हो सकती है ?

दुनिया अधिकांश लोग दाड़ी, साड़ी, काड़ी, नाड़ी, खाड़ी, दिहाड़ी, पहाड़ी, ताड़ी आदि के मामले में अत्याधिक भ्रमित हैं। इसलिए बहुत से लोग रोज दाढ़ी नहीं बनाते।
अनेक लोग जवानी में ही साड़ी से दूर रहकर काड़ी का उपयोग नहीं करते और वैवाहिक जीवन पेचीदा हो जाता है। जबकि खाड़ी के अरबी लोग काड़ी के सुख के लिए 60 की उम्र में भी निकाह करते हैं। इसलिए उनकी नाड़ी 80 के बाद भी त्रिदोष रहित रहती है।
साड़ी का सदुपयोग न करने वालों की 80 में गले से लस्सी (कफ-खांसी) निकलती रहती है।
ताड़ी पीने वालों का भी यही हाल है। कुछ पीने वाले रोज पीते हैं और स्वस्थ्य हैं। डरे हुए व्यक्ति इससे दूर रहते हैं। जेब में माल हो, तो आप रोज कमाल कर सकते हैं।
आपकी खाल में दम हो, तो रोज दाढ़ी बनाएं। काड़ी यानी लिंग में ताकत हो, तो रोज साड़ी उतारें। कोई रोक-टोक नहीं हैं।
पहाड़ी के ठंडे इलाके में रहने वाले और दिहाड़ी मजदूर रोज दाड़ी बनाकर, ताड़ी, साड़ी, काड़ी, ताड़ी का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए वे अगाड़ी-पिछाड़ी नहीं देखते।
मन में जितना भ्रम पालेंगे, जीवन का क्रम बदल जायेगा। और जीवन धर्मपथ भ्रष्ट हो सकता है। खूब गरमागरम खाकर देह को गर्म रखें।
श्रीमद्भागवत के मुताबिक कर्म एक मात्र मनुष्य का धर्म है। शर्म न करें। बाकी सब व्यर्थ। कहने वाले प्रेम को भी पाप कहते हैं।
🍂 आरोग्य संजीवनी ☘️
कफार्श : कफार्श बवासीर में मस्से काफी गहरे होते है। इन मस्सों में थोड़ी पीड़ा, चिकनाहट, गोलाई, कफयुक्त पीव तथा खुजली होती है। इस रोग के होने पर पतले पानी के समान दस्त होते हैं। इस रोग में त्वचा, नाखून तथा आंखें पीली पड़ जाती है।
वातजन्य बवसीर : वात्यजन अर्श (बवासीर) में गुदा में ठंड़े, चिपचिपे, मुर्झाये हुए, काले, लाल रंग के मस्से तथा कुछ कड़े और अलग प्रकार के मस्से निकल आते हैं। इसका इलाज न करने से गुल्म, प्लीहा आदि बीमारी हो जाती है।
संसगर्श : इस प्रकार के रोग परम्परागत होते हैं या किसी दूसरों के द्वारा हो जाते हैं। इसके कई प्रकार के लक्षण होते हैं।
पितार्श : पितार्श अर्श (बवासीर) रोग में मस्सों के मुंख नीले, पीले, काले तथा लाल रंग के होते हैं। इन मस्सों से कच्चे, सड़े अन्न की दुर्गन्ध आती रहती है और मस्से से पतला खून निकलता रहता है। इस प्रकार के मस्से गर्म होते हैं। पितार्श अर्श (बवासीर) में पतला, नीला, लाल रंग का दस्त (पैखाना) होता है।
सन्निपात : सन्निपात अर्श (बवासीर) इस प्रकार के बवासीर में वातार्श, पितार्श तथा कफार्श के मिले-जुले लक्षण पाये जाते हैं।
खूनी बवासीर : खूनी बवासीर में मस्से चिरमिठी या मूंग के आकार के होते हैं। मस्सों का रंग लाल होता है। गाढ़ा या कठोर मल होने के कारण मस्से छिल जाते हैं। इन मस्सों से अधिक दूषित खून निकलता है जिसके कारण पेट से निकलने वाली हवा रुक जाती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🎗️
कलावा किस हाथ में बांधना चाहिए?” कलावा किस हाथ में बांधे इस बारे में भी नियम है, जो कि पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग हैं. पुरुषों और कुंवारी कन्याओं को दाहिने हाथ में और विवाहित महिलाओं को हमेशा बाएं हाथ में कलावा बांधने चाहिए।
“कलावा कलाई पर कितनी बार लपेटनी चाहिए?” कलावा बंधवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपकी कलाई पर इसे तीन, पांच या सात बार लपेटा गया हो. कलावा बांधते समय कभी भी हाथ खाली नहीं होना चाहिए ऐसे में जिस हाथ में कलावा बांधा जा रहा है उसमें एक सिक्का रखें तथा उसके बाद दूसरे हाथ को सिर पर रखें। कलावा बांधने के बाद वह सिक्का कलावा बांधने वाले व्यक्ति, पंडित जी को दे दें।
“किस दिन खोलना चाहिए कलावा?” रक्षा सूत्र या कलावा किसी भी दिन या किसी भी समय नहीं खोलना चाहिए, क्योंकि इसे बांधने से जातक की रक्षा होती है। कलावा या रक्षा सूत्र खोलने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे सही माना जाता है। पुराना कलावा खोलने के बाद पूजा घर में बैठकर दूसरा कलावा बांध लेना शुभ होता है।
“पुराना कलावा कहाँ रखें?” पुराना कलावा खोलने के बाद उसे यहां-वहां कहीं भी नहीं फेंकना चाहिए, कलावा निकालकर या तो पीपल के पेड़ के नीचे रखें या फिर किसी बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए।
“कलावा और आयुर्वेद” स्वास्थ्य के दृष्टि से भी रक्षासूत्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इससे कई प्रकार के शारीरिक पीड़ाएं दूर रहती हैं. आयुर्वेद शास्त्र में बताया गया है कि शरीर के कई मुख्य नसें हमारी कलाई से होकर निकलती हैं, ऐसे में जब इस स्थान पर रक्षासूत्र बांधा जाता है, तब इसके दबाव से त्रिदोष अर्थात वात, पित्त और कफ से जुड़ी समस्या कई हद तक दूर रहती है. इसके साथ मधुमेह, हृदय रोग, रक्तचाप इत्यादि जैसी गंभीर बीमारियों पर भी बहुत हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है ।
“ज्योतिष दृष्टि से कैसे उपयोगी है रक्षासूत्र?”_
ज्योतिष शास्त्र में भी रक्षासूत्र के विषय में आचार्य श्री गोपी राम ने विस्तार से जानकारी दी गई है. बताया गया है कि कलाई पर लाल या केसरी रंग का रक्षासूत्र बांधने से कुंडली में मंगल का अशुभ प्रभाव कम होने लगता है और जातक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. कुछ ज्योतिष विद्वान काले रंग का धागा धारण करने की सलाह देते हैं. कुछ लोग इसे कलाई पर तो कुछ पैर में बांधते हैं. बता दें कि इसे शनि ग्रह का प्रतीक माना जाता है और इससे शनि ग्रह का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
“कलावा बांधने के फायदे तथा महत्व”
तीन धागों का यह सूत्र त्रिदेवों व त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है। इस रक्षा-सूत्र को संकल्पपूर्वक बांधने से व्यक्ति पर मारण, मोहन, विद्वेषण, उच्चाटन, भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता। यह मौली किसी देवी या देवता के नाम पर भी बांधी जाती है जिससे संकटों और विपत्तियों से व्यक्ति की रक्षा होती है। यह मंदिरों में संकल्प के लिए भी बांधी जाती है। मौली बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु की कृपा से रक्षा तथा शिव की कृपा से दुर्गुणों का नाश होता है। इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति एवं सरस्वती की कृपा से बुद्धि प्राप्त होती है। कलावा बांधने से उसके पवित्र और शक्तिशाली बंधन होने का अहसास होता रहता है और इससे मन में शांति तथा पवित्रता बनी रहती है। व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते तथा वह गलत रास्तों पर नहीं भटकता है। कई अवसरों पर इससे व्यक्ति पाप कार्य करने से बच जाता है। कमर पर बांधा गये रक्षा सूत्र के संबंध में विद्वान लोग कहते हैं कि इससे सूक्ष्म शरीर स्थिर रहता है तथा कोई दूसरी बुरी आत्मा आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती है। बच्चों को अक्सर कमर में मौली बांधी जाती है। यह काला धागा भी होता है। इससे पेट में किसी भी प्रकार के रोग नहीं होते!!
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●
⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।

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