धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 21 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 21 दिसम्बर 2024
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायणरंभ
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु प्रारंभ
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार पौष माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 12:21 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 06:14 AM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र के स्वामी :- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (धन व ऐश्वर्य के देवता) और स्वामी शुक्र देव जी है ।
⚜️ योग : प्रीति योग 06:22 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : वणिज – 12:21 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 01:22 ए एम, दिसम्बर 22 तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:20 ए एम से 06:15 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:48 ए एम से 07:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:40 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:03 पी एम से 02:44 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:26 पी एम से 05:54 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:29 पी एम से 06:51 पी एम
💧 अमृत काल : 11:11 पी एम से 12:57 ए एम, दिसम्बर 22
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:47 ए एम, दिसम्बर 22
🪷 त्रिपुष्कर योग : 06:14 ए एम, दिसम्बर 22 से 07:10 ए एम, दिसम्बर 22
❄️ रवि योग : 07:10 ए एम से 06:14 ए एम, दिसम्बर 22
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवि योग/ त्रिपुष्कर योग/ उत्तरायणरंभ/ सौर शिशिर ऋतु प्रारंभ/ महान् साहित्यकार, महावीर प्रसाद द्विवेदी पुण्य तिथि, क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित स्मृति दिवस, महानायक अमिताभ बच्चन की माँ तेजी बच्चन पुण्य तिथि, राजीव बजाज जन्म दिवस, भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक औतार सिंह पेंटल स्मृति दिवस, अभिनेता गोविंदा जन्म दिवस, बाल साहित्य दत्ता टोली जन्म दिवस, न्यायाधीश पी.एन. भगवती जन्म दिवस, क्रिकेट खिलाड़ी कृष्णमचारी श्रीकांत जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏜️ Vastu tips 🛕
दीपक जलाते समय उसमें डाल दें एक लौंग
ज्योतिष शास्त्र में पूजा के समय दीपक जलाने का बहुत महत्व है। अक्सर लोग शनिवार के दिन शनिदेव को खुश करने के लिए सरसों का दीपक जलाते हैं। लेकिन यदि आप उस दीपक में एक लौंग डाल देंगे तो आपकी किस्मत बदल सकती है। जी हां, आप अगर इस दीपक में एक लौंग डाल देंगे तो धन आपकी ओर आकर्षित होने लगेगा। इसके साथ ही व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। ऐसी मान्यता है कि अगर आप निरंतर ऐसा करते हैं तो आपको पैसों की कोई कमी नहीं होगी। वहीं शनिवार को शाम के समय सरसों के तेल में नियमित रूप से दीपक जलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हिंदू धर्म में दान का बहुत अधिक महत्व है। ऐसे में अगर आप नियमित रूप कुछ न कुछ दान करेंगे तो आपको काफी लाभ मिलेगा।
पक्षियों को दाना डालना भी काफी शुभ माना जाता है। अगर आप रोजाना पक्षियों को दाना डालेंगे तो आपको करियर के साथ साथ जीवन में भी तरक्की मिलेगी।
वास्तु के अनुसार, अगर आप रोटी बनाने से पहले तवे पर दूध की छींटे डाल दें और फिर रोटी बनाएं तो इससे घर धन-धान्य से भरा रहता है।
पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाना बेहद शुभ होता है। गर आप वास्तु की इन बातों को मानते हैं तो आपको जीवन में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
तेज बुखार के दौरान गुनगुना या गर्म पानी पीने से बचना चाहिए। दरअसल, हाई टेम्प्रेचर के कारण शरीर पहले से ही गर्म होता है और गुनगुना पानी इसे और ज्यादा गर्म कर सकते हैं। ऐसे में, ठंडा या सामान्य तापमान का पानी शरीर को कूल रखने में मदद करता है और पाचन के लिहाज से ज्यादा आरामदायक भी होता है।
एसिडिटी की प्रॉब्लम
एसिडिटी की परेशानी से जूझ रहे लोगों को गुनगुना पानी नहीं पीना चाहिए। इससे पेट में एसिड और बढ़ सकता है, जिससे जलन, खट्टी डकार और गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बता दें, एसिडिटी से राहत पाने के लिए सामान्य तापमान पर रखा पानी पीना ही बेहतर होता है।
*_पेट के अल्सर की समस्या
अक्सर यह धारणा होती है कि गुनगुना पानी पीने से पेट का अल्सर ठीक हो जाएगा, लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है। सच तो यह है कि अल्सर के घावों पर गर्म या गुनगुना पानी ज्यादा जलन और परेशानी पैदा करता है। इससे न सिर्फ दर्द बढ़ सकता है बल्कि अल्सर ठीक होने में ज्यादा समय भी लग सकता है।
📗 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
एकबार एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे, एक गरीब था तो दूसरा अमीर। दोनों पड़ोसी थे। गरीब ब्राह्मण की पत्नी, उसे रोज़ ताने देती, झगड़ती। एक बार पूर्णिमा के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र अपनी पत्नी के रोज-रोज झगड़ों से तंग आकर जंगल की ओर चल पड़ता है, ये सोच कर, कि जंगल में शेर या कोई मांसाहारी जीव उसे मार कर खा जायेगा, उस जीव का पेट भर जायेगा और मरने से वो रोज की झिक-झिक से मुक्त हो जायेगा।
जंगल में जाते ही उसे एक गुफ़ा नज़र आती है, वो गुफ़ा की तरफ़ जाता है। गुफ़ा में एक शेर सोया होता है और शेर की नींद में ख़लल न पड़े इसके लिये हंस का पहरा होता है। हंस ज़ब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है तो चिंता में पड़कर सोचता है, ये ब्राह्मण आयेगा, शेर जागेगा और इसे मार कर खा जायेगा। पूर्णिमा के दिन मुझे पाप लगेगा, इसे बचायें कैसे?
उसे एक उपाय सुझता है और वो शेर के भाग्य की तारीफ़ करते हुए कहता है। ओ जंगल के राजा… उठो, जागो..आज आपके भाग खुले हैं, पूर्णिमा के दिन खुद विप्रदेव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हे दक्षिणा देकर रवाना करें। आपका मोक्ष हो जायेगा। ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में शायद ही कभी आये, आपको पशु योनी से छुटकारा मिल जायेगा। शेर दहाड़ कर उठता है, हंस की बात उसे सही लगती है, और पहले से शिकार किये हुए मनुष्यों के गहने थे वे सब के सब उस ब्राह्मण के पैरों में रख कर, शीश नवाता है, जीभ से उनके पैर चाटता है।
हंस ब्राह्मण को इशारा करता है विप्रदेव ये सब गहने उठाओ और जितना जल्द हो सके वापस अपने घर जाओ ये सिंह है, कब मन बदल जाय, ब्राह्मण बात समझता है घर लौट जाता है।
उसके पडोसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब सब पता चलता है तो वो भी अपने पति को जबरदस्ती अगली पूर्णिमा को जंगल में उसी शेर की गुफा कि ओर भेजती है। अब शेर का पहेरादार बदल जाता है। नया पहरेदार होता है “कौवा” जैसे कौवे की प्रवृति होती है वो सोचता है, बढीया है, ब्राह्मण आया.. शेर को जगाऊं… शेर की नींद में ख़लल पड़ेगा और गुस्साएगा, ब्राह्मण को मारेगा, तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा पेट भर जायेगा। ये सोच वो कौवा.. कांव.. कांव…चिल्लाता है।
शेर गुस्सा हो जाता है। दूसरे ब्राह्मण पर उसकी नज़र पड़ती है, उसे हंस की बात याद आ जाती है, वो समझ जाता है, कौवा क्यों कांव-कांव कर रहा है। वो अपने, पूर्व में हंस के कहने पर किये गये धर्म को खत्म नहीं करना चाहता। पर फिर भी शेर तो शेर होता है जंगल का राजा हैं।
वो दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है..
“हंस उड़ सरोवर गये और अब काग भये प्रधान।
थे तो विप्रा थांरे घरे जाओ, मैं किनाइनी जिजमान ।।
अर्थात हंस जो अच्छी सोच वाले अच्छी मनोवृत्ति वाले थे उड़ के सरोवर यानि तालाब को चले गये है और अब कौवा प्रधान पहरेदार है जो मुझे, तुम्हें मारने के लिये उकसा रहा है। मेरी बुद्धि घूमें उससे पहले ही, हे ब्राह्मण, यहां से चले जाओ।
शेर किसी का जजमान नहीं हुआ है, वो तो हंस था जिसने मुझ शेर से भी पुण्य करवा दिया। दूसरा ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और डर के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है।कहने का मतलब है दोस्तों, ये कहानी आज के परिपेक्ष्य में भी सटीक बैठती है, हंस और कौवा कोई और नहीं, हमारे ही चरित्र है…
कोई किसी का दु:ख देख दु:खी होता है और उसका भला सोचता है,वो हंस है। और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है, किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता, वो कौवा है। जो आपस में मिलजुल, भाईचारे से रहना चाहते हैं, वे हंस प्रवृत्ति के हैं। जो झगड़े कर एक दूजे को मारने लूटने की प्रवृत्ति रखते हैं वे कौवे की प्रवृति के है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है। परन्तु ऐसे जातक छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।

●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●21 मेंटेनर

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