धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 28 जनवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 28 जनवरी 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार माघ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 07:36 PM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 08:58 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है तो राशि स्वामी शुक्र।और जल के देवता वरूण देव हैं।
⚜️ योग – वज्र योग 11:51 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : विष्टि – 08:09 ए एम तक शकुनि – 07:35 पी एम तक
द्वितीय करण : चतुष्पाद – 06:54 ए एम, जनवरी 29 तक नाग
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:36:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:24:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:18 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:52 ए एम से 07:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:56 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:22 पी एम से 03:05 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:55 पी एम से 06:21 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:57 पी एम से 07:17 पी एम
💧 अमृत काल : 02:06 ए एम, जनवरी 29 से 03:40 ए एम, जनवरी 29
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, जनवरी 29 से 01:00 ए एम, जनवरी 29
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी पवित्र नदी में तिल का उबटन लगाकर स्नान करने के उपरान्त तिल व कम्बल दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : शबै मिराज/ अमावस्या प्रारम्भ 07.60/ स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय जयन्ती, भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज जन्म दिवस, पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर जन्म दिवस, भारतीय सेना के प्रथम कमांडर-इन-चीफ के. एम. करिअप्सुमन कल्याणपुर पा जन्म दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार ओ. पी. नैय्यर स्मृति दिवस, भारतीय पुरातत्त्वविद हंसमुख धीरजलाल सांकलिया स्मृति दिवस, डेटा संरक्षण दिवस, सूचना गोपनीयता दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🌷 Vastu tips 🌹
ताजे फूलों का गुलदस्ता ताजे फूल वातावरण में शुद्धता भरते हैं और आपकी रचनात्मकता को भी बढ़ाते हैं। अगर संभव हो तो आप अपने काम करने की टेबल पर ताजे फूल भी रख सकते हैं।
कछुआ धातु का कछुआ ऑफिस की टेबल पर रखने से जीवन में समृद्धि आती है और आपके कार्यों को सराहा जाता है। कछुआ आपको हमेशा ऑफिस टेबल में उत्तर दिशा में रखना चाहिए।
पिरामिड वास्तु में पिरामिड को एनर्जी का स्रोत माना जाता है। काम करने की टेबल पर इसे रखने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और नकारात्मकता दूर होती है। कारोबारियों को दफ्तर में पिरामिड रखने से मनचाही सफलता मिलती है, और नौकरी पेशा लोग उन्नति की ओर बढ़ते हैं।
कलमदान काम करने की टेबल पर उत्तर-पूर्व दिशा में कलमदान रखना बेहद शुभ माना जाता है। इसमें अच्छी क्वालिटी के पेन रखें और एक लाल रंग का पेन भी इसमें अवश्य रखें। कलमदान रखने से आपकी योजनाएं सफल होती हैं और कार्यक्षेत्र में आपके कार्यों को सराहा जाता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कभी भी उस इंसान के पीछे ना भागो, मतलब ये है की जो इंसान आपसे बात तक करना पसंद नही करता, क्योंकि ऐसा करने के बाद भी अगर आप उसके पीछे घूमोगे तो आपकी इज्जत कम होना तय है । कामुक कहानियां, पॉर्न फिल्में, की लत आपके दिमाग को पूरी तरह कंट्रोल कर लेती है पूरी तरह वाश कर देती है, इसलिए इन चीज़ों जितनी दूरी बनाए रखेंगे उतना अच्छा रहेगा।
इस स्क्रीनशॉट के जमाने मे अपनी निजी बाते किसी के साथ इंटरनेट पे शेयर ना करे।
किसी इंसान को आपसे प्यार करने के लिए मजबूर ना करे, क्योकि ऐसे रिश्ते ज्यादा दिन नही टिकते ।
गलत लोगो के साथ रिश्ते बनाने से लाख बेहतर है कि आप अकेले रह ले, यह आपके लिए सही रहेगा।
सबसे बड़ी बात कि इस मतलबी दुनिया मे किसी से ज्यादा उम्मीद ना करे।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍓
सूजन में कमी: अरंडी के तेल में सूजन कम करने की क्षमता होती है। जब इसे प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है, तो यह सूजन को कम करता है और आराम प्रदान करता है।
दर्द से राहत: अरंडी का तेल एक प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है। इसके उपयोग से दर्द में भी राहत मिलती है, क्योंकि यह मांसपेशियों की ऐंठन को कम करता है और रक्त संचार को बेहतर करता है।
आंतरिक उपचार: अरंडी का तेल आंतरिक पाइल्स के उपचार में भी मदद करता है। यह आंतों की सफाई में सहायक होता है और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है, जो बावसीर के मुख्य कारणों में से एक है।
कोमलता और नमी: अरंडी का तेल त्वचा को कोमल और नम बनाए रखता है, जिससे जलन और खुजली कम होती है। इसका नियमित उपयोग पाइल्स के बाहरी हिस्से को ठीक कर सकता है।
रक्त संचार में सुधार: अरंडी के तेल में पाए जाने वाले तत्व रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं, जिससे पाइल्स के इलाज में मदद मिलती है और घाव जल्दी ठीक होते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 📖
क्यूँ कोई भी मनुष्य जब मुसीबत में पड़ता है तो वह भगवान के पास भागा-भागा आता है और उन्हें अपनी परेशानियाँ बताता और उनसे कुछ न कुछ माँगने लगता है,?
अंतत: उन्होंने इस समस्या के निराकरण के लिए देवताओं की एक बैठक बुलाई और बोले- देवताओं,मैं मनुष्य की रचना करके कष्ट में पड़ गया हूँ।कोई न कोई मनुष्य हर समय शिकायत ही करता रहता हैं,जबकी मै उन्हे उसके कर्मानुसार सब कुछ दे रहा हूं। फिर भी थोड़े से कष्ट मे ही मेरे पास आ जाता हैं। जिससे न तो मैं कहीं शांति पूर्वक रह सकता हूं, न ही तपस्या कर सकता हूं। आप लोग मुझे कृपया ऐसा स्थान बताएं, जहाँ मनुष्य नाम का प्राणी कदापि न पहुंच सके। प्रभु के विचारों का आदर करते हुए देवताओं ने अपने- अपने विचार प्रकट किए। गणेश जी बोले- आप हिमालय पर्वत की चोटी पर चले जाएँ। भगवान ने कहा- यह स्थान तो मनुष्य की पहुंच में हैं। उसे वहां पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा। इंद्रदेव ने सलाह दी- कि वह किसी महासागर में चले जाएँ। वरुण देव बोले- आप अंतरिक्ष में चले जाइए।भगवान ने कहा- एक दिन मनुष्य वहाँ भी अवश्य पहुंच जाएगा। भगवान निराश होने लगे थे। वह मन ही मन सोचने लगे- “क्या मेरे लिए कोई भी ऐसा गुप्त स्थान नहीं हैं, जहाँ मैं शांतिपूर्वक रह सकूं”।
अंत में सूर्य देव बोले- प्रभु! आप ऐसा करें कि मनुष्य के हृदय में बैठ जाएँ! मनुष्य अनेक स्थान पर आपको ढूंढने में सदा उलझा रहेगा, पर वह यहाँ आपको कदापि न तलाश करेगा।ईश्वर को सूर्य देव की बात पसंद आ गई। उन्होंने ऐसा ही किया और वह मनुष्य के हृदय में जाकर बैठ गए। तभी से मनुष्य अपना दुख व्यक्त करने के लिए ईश्वर को मन्दिर, ऊपर, नीचे, आकाश, पाताल में ढूँढ रहा है पर वह मिल नहीं रहें हैं।परंतु मनुष्य कभी भी अपने भीतर- “हृदय रूपी मन्दिर” में बैठे हुए ईश्वर को नहीं देख पाता। जैसे कबीरदासजी ने अपने इस दोहे के माध्यम से यहाँ मन की शुद्धता और ईश्वर की महत्ता की महत्त्व का बहुत ही सुन्दर व्याख्या किया है।
“कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूँढे बन माहि।
ऐसे घट-घट राम हैं दुनिया देखे नाहिं”।।
कबीर दास जी कहते है कि जैसे कस्तूरी हिरण की नाभि में सुगंधित होता है, लेकिन अनजान हिरण उसके सुगन्ध को पूरे जगत में ढूँढता फिरता है। कस्तूरी का पहचान नहीं होता। ठीक इसी तरह ईश्वर भी हर मनुष्य के ह्रदय में निवास करते है क्योंकि संसार के कण कण में ईश्वर विद्यमान है और मनुष्य उसके अंतंर्मुख ईश्वर को देवालयों, मस्जिदों और तीर्थस्थानों में ढूँढता फिरता है। कबीर जी कहते है कि अगर ईश्वर को ढूँढ़ना है तो अपने मन में ढूँढो,।।
मङ्गल कामनाओं के साथ सदासुमङ्गल,
ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय,
शुभमस्तु,,🙏
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।

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