धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 10 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 10 मार्च 2025
10 मार्च 2025 दिन सोमवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है।आज की एकादशी को रंगभरी एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है।आज भगवान श्रीकाशीविश्वनाथ के श्रृंगार का दिन भी है । आप सभी सनातनियों को “रंगभरी एकादशी व्रत की” बहुत – बहुत हार्दिक शुभकामनाएं एवं अनंत – अनंत बधाइयां।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 07:44 AM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 12:51 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति हैं. पुष्य नक्षत्र के स्वामी ग्रह शनि हैं।
⚜️ योग – शोभन योग 01:56 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : विष्टि – 07:44 ए एम तक
द्वितीय करण – बव – 07:55 पी एम तक बालव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:09:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:51:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:59 ए एम से 05:48 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:23 ए एम से 06:36 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:08 पी एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:17 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:24 पी एम से 06:49 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:26 पी एम से 07:39 पी एम
💧 अमृत काल : 06:12 पी एम से 07:52 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, मार्च 11 से 12:55 ए एम, मार्च 11
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:36 ए एम से 12:51 ए एम, मार्च 11
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-पीपल के पेड़ में दूध डालें।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ भगवान श्रीकाशीविश्वनाथ के श्रृंगार दिवस/ (रंगभरी एकादशी व्रत सभी के लिए सर्व स्मार्त)/ CISF स्थापना दिवस, राष्ट्रीय सेंडिंग दिवस, राष्ट्रीय स्कर्ट दिवस, राष्ट्रीय महिला एवं बालिका एचआईवी, एड्स जागरूकता दिवस, साल्वेशन आर्मी दिवसकांग्रेसी नेता माधवराव सिंधिया जन्म दिवस, समाज सुधारक लल्लन प्रसाद व्यास जन्म दिवस, किसान स्कूल की संस्थापक सावित्रीबाई फुले पुण्य तिथि, भूतपूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह पुण्य तिथि, महिला न्यायाधीशों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, भूजल सप्ताह (5 से 11 मार्च) ✍🏼 तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।। 🛟 *_Vastu tips* 🗽
बेल का पेड़ हिंदू धर्म में आध्यात्मिक महत्व रखता है, यह विशेषकर भगवान शिव से जुड़ा हुआ होताहै।बेल पत्रभगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं, क्योंकि इन्हें शिव जी का प्रिय पौधा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर बेल के पत्ते चढ़ाए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। बेल के पत्तों का भगवान शिव से गहरा संबंध है, और इन्हें शिव की आराधना में आवश्यक माना जाता है।
यह भी कहा जाता है कि बेल के पत्तों के माध्यम से भगवान शिव की कृपा दृष्टि प्राप्त होती है। जब शिवलिंग पर यह पत्ते चढ़ाए जाते हैं, तो पूजा की संपूर्णता और सफलता मानी जाती है। बेल के पत्तों का प्रतीकात्मक महत्व भी है, जो भगवान शिव की अनुकम्पा और आशीर्वाद का प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से, बेल के पेड़ को पवित्र और प्रभावशाली माना जाता है और इस पेड़ की पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। इसलिए, बेल के पेड़ को शिव जी के साथ जुड़ी हुई विशेष पूजा और आस्था का हिस्सा माना जाता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद
मुलेठी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा की चमक बढ़ाने, झाइयों को कम करने और मुंहासों से बचाव करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, यह बालों की ग्रोथ को भी बढ़ावा देती है और रूसी जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है।
👉 उपयोग: मुलेठी पाउडर को गुलाब जल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता है।
🔹 #त्वचाकीदेखभाल #खूबसूरतबाल
#प्राकृतिकसौंदर्य
🍶 आरोग्य संजीवनी
🍯
नींद लाने में मददगार : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बड़ी संख्या में लोग नींद न आने की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। सुबह से शाम तक आॅफिस, कॉलेजों आदि में थककर चूर होने के बाद नींद न आने से परेशान हो रहे लोग लहसुन का उपयोग कर सकते हैं। बताया जाता है कि यदि सोने से पहले तकिए के नीचे लहसुन को रखकर सोया जाए या लहसुन की एक कली का सेवन किया जाए तो इससे अच्छी नींद आती है।
अंत: शक्ति को बढ़ाने में सहायक : अगर आप सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की दो कलियां शहद में मिलाकर खाते हैं तो यह आपके अंत: शक्ति को बढ़ा देता है चाहे आप स्त्री हो या पुरुष यह दोनों के लिए समान रूप से कार्य करता है। यदि किसी लड़की को पीरियड्स की कोई भी परेशानी है तो वह भी सप्ताह में दो बार लहसुन की दो-तीन कलियां शहद के साथ खा सकती हैं।
🌷 गुरु भक्ति योग 🕯️
इस कलयुग के समय में अगर किसी व्यक्ति से बोला जाए कि भगवान शिव की पूजा किया कर तो वह साफ़ बोलता है कि यार कुछ मिलना तो है नहीं, इसलिए हम बिना पूजा किये हुए ही सही हैं।
वो इंसान ये नहीं जानता कि वो किसकी पूजा से आलस कर रहा है। अगर महादेव की कृपा हो जाए तो रंक अगले ही पल राजा बन जाएगा। भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पास कई तरह की शक्तियां आ जाती हैं किन्तु उन शक्तियों को बहुत ही कम लोग महसूस कर पाते हैं। तो आइये आज हम आपको बताते हैं कि भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पास कौन-सी शक्तियां आ जाती हैं-
भगवान शिव की पूजा

व्यक्ति का मृत्यु डर खत्म हो जाता है हर इंसान अपनी मृत्यु से डरता है। जीवन के अंतिम समय से हर कोई डरता है। आप खुद एक बार को सोचिये कि आपको भी एक दिन मरना है और यही सोचते ही आप डरने लगेंगे। लेकिन जो शिव का भक्त होता है उसको कभी भी मृत्यु का डर नहीं लगता है। यह खास शक्ति आज के समय में कुछ ही लोगों के पास होती है।
सफलता कदम चूमने लगती है ऐसा व्यक्ति जो शिव का परम भक्त होता है उसके पास ऐसी शक्ति होती है कि वह किसी भी हालात में सफलता को प्राप्त कर सकता है। यदि शिव भक्त के सामने पहाड़ भी होगा तो वह चुटकियों में उसको भी पार कर सकता है।
नहीं होती है मोह माया इंसान की जब इच्छायें खत्म होने लगती हैं तो वह वाकई एक खुशहाल इंसान बनने लगता है। शिव के भक्त ही यही सबसे बड़ी ताकत बनने लगती है कि वह हमेशा खुश रहने लगता है। दुनिया में एक तरफ जहाँ सब दुखी हैं वहीं दूसरी तरफ शिव के भक्त हमेशा खुश रहते हैं।
इन्सान को पहचाने की शक्ति शिव के भक्त के पास सबसे बड़ी शक्ति यही आ जाती है कि वह सामने वाले इंसान को अच्छी तरह से पहचानने लगता है। कौन व्यक्ति किस तरह के भाव मन में रखता है यह शिव का भक्त तुरंत जानने लगता है. ऐसा जब होता है तो फिर कभी शिव का भक्त बेवकूफ नहीं बन पाता है। इसके लिए आपको ऊं महारुद्राय,त्रियंकम्बकेश्वराय नम: का जाप करना होगा।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।

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