आत्म पुरोहित श्रीदत्त महाराज (कोनी धाम) के सान्निध्य में गौसेवा, आत्मनिर्भर गौशालाओं और पंचगव्य उद्योगों पर विमर्श
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले सहित मध्य प्रदेश के पवित्र धाम कोनी में स्थित आत्म पुरोहित श्रीदत्त महाराज की गौशाला में सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह यात्रा केवल एक गौशाला दर्शन नहीं थी, बल्कि गौसेवा, आत्मनिर्भरता और पंचगव्य आधारित उद्योगों के माध्यम से सतत विकास पर गहन मंथन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। पाटन विधायक अजय बिश्नोई ने की गौ माता की पूजन अर्चना।
कोशिश यात्रा के दौरान आत्म पुरोहित श्रीदत्त महाराज के सान्निध्य में गौसेवा,आत्मनिर्भर गौशालाओं और पंचगव्य उद्योगों पर विमर्श किया गया। साथ ही यह यात्रा केवल एक गौशाला दर्शन नहीं थी, बल्कि गौसेवा, आत्मनिर्भरता और पंचगव्य आधारित उद्योगों के माध्यम से सतत विकास पर गहन मंथन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
श्रीदत्त महाराज की गौशाला में लगभग 300 से अधिक निराश्रित गौवंश का संरक्षण किया जा रहा है। जिनमें से अधिकांश बीमार, त्यक्त, या दुर्घटनाग्रस्त में पीड़ित होकर पुलिस एवं समाजसेवकों द्वारा रेस्क्यू किए गए नंदी महाराज हैं। यह गौशाला सुंदर पहाड़ियों के मध्य स्थित एक दिव्य स्थल है । जहां गौवंश की देखभाल गौशाला सेवकों द्वारा आध्यात्मिक और पारंपरिक तरीकों से की जाती है।
देखा जाएं तो गौशाला और आत्मनिर्भरता की दिशा में विचार-विमर्श के दौरान यह तथ्य सामने आया कि देशभर में 70% गौशालाएं आर्थिक संकट से जूझ रही हैं वहीं कई के पास स्थायी चारा व्यवस्था भी नहीं है। इस संदर्भ में गौ आधारित उद्योगों—जैसे जैविक खाद, गौमूत्र अर्क, पंचगव्य चिकित्सा, प्राकृतिक सौंदर्य उत्पाद और हर्बल खाद्य सामग्री—पर महाराज के मार्गदर्शन में गहन विमर्श हुआ।
इस यात्रा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि गौशालाओं को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक और व्यवस्थागत समर्थन की आवश्यकता है। आत्मपुरोहित श्रीदत्त महाराज की दूरदृष्टि और उनके द्वारा संचालित गौशाला के अनुभव से यह प्रेरणा मिली कि यदि हम संगठित होकर कार्य करें, तो गौशालाओं को आत्मनिर्भर भी बनाना असंभव नहीं।



