Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 11 अप्रैल 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 03:21 AM तक उपरांत पूर्णिमा
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 03:10 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। और इस नक्षत्र के देवता आर्यमान हैं।
⚜️ योग – ध्रुव योग 07:45 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण : गर – 02:09 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 03:21 ए एम, अप्रैल 12 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:45:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:30 ए एम से 05:15 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:52 ए एम से 06:00 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:48 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:43 पी एम से 07:06 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:45 पी एम से 07:52 पी एम
💧 अमृत काल : 07:08 ए एम से 08:55 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अप्रैल 12
❄️ रवि योग : 06:00 ए एम से 03:10 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में खस का इत्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ भद्रा/शिवदमनक चतुर्दशी/ राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस, महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी जयन्ती, भारतीय अभिनेता एवं गायक कुन्दन लाल सहगल जन्म दिवस, अभिनेत्री रोहिणी हटंगडी जन्म दिवस, राष्ट्रीय पालतू दिवस, महात्मा ज्योतिबा फुले जयन्ती, विश्व पार्किंसंस दिवस, तेजेंद्रप्रसाद पांडे, जगद्गुरु भारती तीर्थ महास्वामी, रवींद्र कौशिक, रोहिणी हट्टंगडी और चरणजीत कुमार की जयंती, भारतीय रेल सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🗼 Vastu tips_ 🗽
गर्मियों के लिए सबसे अच्छा पौधा आप इसे बालकनी में आसानी से लगा सकते हैं। मंडेविला को बालकनी में किसी रेलिंग पर फैला सकते हैं। आप चाहें तो इसे हैंगिग पॉट्स में भी लगाया जा सकता है। बेल वाला मंडेविला पौधा बारहमासी पौधा कहलाता है। यानि ये कभी सूखता नहीं है। लेकिन इसकी अच्छी ग्रोथ गर्मियों से बारिश तक ही होती है।
मंडेविला प्लांट की किस्म और देखभाल मंडेविला की कई किस्म आपको मार्केट में मिल जाएंगी। आप इसमें पीले रंग के फूलों वाला पौधा, सफेल फूल वाला पौधा या गुलाबी रंग को फूलों वाला पौधा ले सकते हैं। अगर बालकनी को प्लांट्स से खूबसूरत लुक देना चाहते हैं तो मंडेविला प्लांट को बालकनी में जरूर लगाएं। ये पौधा दिखने में काफी सुंदर और आकर्षक लगता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
छोटे बच्चों की परवरिश पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। पैरेंट्स की छोटी सी लापरवाही भी बच्चों के फ्यूचर पर भारी पड़ सकती है। कुछ बच्चे अपने पैरेंट्स से झूठ बोलने लग जाते हैं और पैरेंट्स उनकी इस आदत को सुधारने के लिए उन्हें डांटते हैं। लेकिन बच्चों को डांटने से या फिर उन्हें मारने से उनके मन में बगावत पैदा हो सकती है। आइए बच्चों की झूठ बोलने की आदत को सुधारने के कुछ तरीकों के बारे में जानते हैं।
प्यार से समझाएं अगर आपका बच्चा आपसे झूठ बोलने लगा है, तो जरूरी नहीं है कि उसने कोई गलती ही की हो। कभी-कभी पैरेंट्स घर में ऐसा माहौल बना देते हैं कि बच्चे को अपनी किसी भी बात को शेयर करने से डर लगने लगता है। अगर आप अपने बच्चे को प्यार से सच बोलने के महत्व और झूठ बोलने के नुकसान के बारे में बताएंगे तो आपका बच्चा आपसे झूठ नहीं बोलेगा। आप अपने बच्चे को समझाने के लिए कहानियों की मदद भी ले सकते हैं।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🥑
किशमिश के पानी के स्वास्थ्य लाभ
कब्ज से राहत किशमिश का पानी मल को मुलायम बनाने में मदद करता है, जिससे मल त्याग आसान हो जाता है। यह पाचन तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में भी सहायक है।
पाचन तंत्र को सुधारना
यह पानी न केवल कब्ज को दूर करता है, बल्कि पूरे पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। इसका नियमित सेवन पेट में गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को भी दूर करता है।
शरीर की सूजन को कम करना किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
आयरन की कमी को दूर करना
किशमिश आयरन का एक बेहतरीन स्रोत है। इसका पानी पीने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है और एनीमिया जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
बनगिरी में ही एक पेड पर एक चिडिया व चिडे का छोटा-सा सुखी संसार था। चिडिया अंडो पर बैठी नन्हें-नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती। एक दिन क्रूर हाथी गरजता, चिंघाडता पेडों को तोडता-मरोडता उसी ओर आया। देखते ही देखते उसने चिडिया के घोंसले वाला पेड भी तोड डाला। घोंसला नीचे आ गिरा। अंडे टूट गए और ऊपर से हाथी का पैर उस पर पडा।
चिडिया और चिडा चीखने चिल्लाने के सिवा और कुछ न कर सके। हाथी के जाने के बाद चिडिया छाती पीट-पीटकर रोने लगी।
तभी वहां कठफोठवी आई। वह चिडिया की अच्छी मित्र थी। कठफोडवी ने उनके रोने का कारण पूछा तो चिडिया ने अपनी सारी कहानी कह डाली। कठफोडवी बोली “इस प्रकार गम में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा। उस हाथी को सबक सिखाने के लिए हमे कुछ करना होगा।”चिडिया ने निराशा दिखाई “हमें छोटे-मोटे जीव उस बलशाली हाथी से कैसे टक्कर ले सकते हैं?”
कठफोडवी ने समझाया “एक और एक मिलकर ग्यारह बनते हैं। हम अपनी शक्तियां जोडेंगे।”“कैसे?” चिडिया ने पूछा।
“मेरा एक मित्र वींआख नामक भंवरा हैं। हमें उससे सलाह लेना चाहिए।” चिडिया और कठफोडवी भंवरे से मिली। भंवरा गुनगुनाया “यह तो बहुत बुरा हुआ। मेरा एक मेंढक मित्र हैं आओ, उससे सहायता मांगे।”
अब तीनों उस सरोवर के किनारे पहुंचे, जहां वह मेढक रहता था। भंवरे ने सारी समस्या बताई। मेंढक भर्राये स्वर में बोला “आप लोग धैर्य से जरा यहीं मेरी प्रतीक्षा करें। मैं गहरे पाने में बैठकर सोचता हूं।”ऐसा कहकर मेंढक जल में कूद गया। आधे घंटे बाद वह पानी से बाहर आया तो उसकी आंखे चमक रही थी। वह बोला “दोस्तो! उस हत्यारे हाथी को नष्ट करने की मेरे दिमाग में एक बडी अच्छी योजना आई हैं। उसमें सभी का योगदान होगा।”
मेंढक ने जैसे ही अपनी योजना बताई,सब खुशी से उछल पडे। योजना सचमुच ही अदभुत थी। मेंढक ने दोबारा बारी-बारी सबको अपना-अपना रोल समझाया।
कुछ ही दूर वह उन्मत्त हाथी तोडफोड मचाकर व पेट भरकर कोंपलों वाली शाखाएं खाकर मस्ती में खडा झूम रहा था।
पहला काम भंवरे का था। वह हाथी के कानों के पास जाकर मधुर राग गुंजाने लगा। राग सुनकर हाथी मस्त होकर आंखें बंद करके झूमने लगा।
तभी कठफोडवी ने अपना काम कर दिखाया। वह् आई और अपनी सुई जैसी नुकीली चोंच से उसने तेजी से हाथी की दोनों आंखें बींध डाली। हाथी की आंखे फूट गईं। वह तडपता हुआ अंधा होकर इधर-उधर भागने लगा।
जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था, हाथी का क्रोध बढता जा रहा था। आंखों से नजर न आने के कारण ठोकरों और टक्करों से शरीर जख्मी होता जा रहा था। जख्म उसे और चिल्लाने पर मजबूर कर रहे थे।
चिडिया कॄतज्ञ स्वर में मेढक से बोली “बहिया, मैं आजीवन तुम्हारी आभारी रहूंगी। तुमने मेरी इतनी सहायता कर दी।”मेढक ने कहा “आभार मानने की जरुरत नहीं। मित्र ही मित्रों के काम आते हैं।”
एक तो आंखों में जलन और ऊपर से चिल्लाते-चिंघाडते हाथी का गला सूख गया। उसे तेज प्यास लगने लगी। अब उसे एक ही चीज की तलाश थी, पानी।
मेढक ने अपने बहुत से बंधु-बांधवों को इकट्ठा किया और उन्हें ले जाकर दूर बहुत बडे गड्ढे के किनारे बैठकर टर्राने के लिए कहा। सारे मेढक टर्राने लगे।
मेढक की टर्राहट सुनकर हाथी के कान खडे हो गए। वह यह जानता ता कि मेढक जल स्त्रोत के निकट ही वास करते हैं। वह उसी दिशा में चल पडा।
टर्राहट और तेज होती जा रही थी। प्यासा हाथी और तेज भागने लगा।जैसे ही हाथी गड्ढे के निकट पहुंचा, मेढकों ने पूरा जोर लगाकर टर्राना शुरु किया। हाथी आगे बढा और विशाल पत्थर की तरह गड्ढे में गिर पडा, जहां उसके प्राण पखेरु उडते देर न लगे इस प्रकार उस अहंकार में डूबे हाथी का अंत हुआ।
ॐ❀ೋ═══ ═══ೋ❀ॐ
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।



