03 मई 2025 को गंगा सप्तमी, नोट कर लें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
श्री हरि नारायण
🔮 03 मई 2025 को गंगा सप्तमी, नोट कर लें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त
🔘 HIGHLIGHTS
गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
▫️ गंगा सप्तमी पर मां गंगा की पूजा होती है।
▫️ गंगा सप्तमी का पर्व 3 मई को मनाया जाएगा।
🌊 हिन्दू धर्म में गंगा जल का काफी महत्व है और इसका प्रयोग जन्म से लेकर मत्यु तक सभी अनुष्ठानों में किया जाता है। गंगा में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलने के साथ ही सभी परेशानियों का समाधान मिलता है और मां गंगा को मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थीं, इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष सप्तमी तिथि 03 मई 2025, शनिवार को है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में…
⚛️ गंगा सप्तमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
➡️ पंचांग के अनुसार, गंगा सप्तमी 3 मई को मनाई जाएगी। इस दिन वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 5 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन, 4 मई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, गंगा सप्तमी का पर्व 3 मई को ही मनाया जाएगा।
➡️ गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त : सुबह 10:58 से दोपहर 1:58 तक
➡️ गंगा सप्तमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त : सुबह 11:52 से दोपहर 12:45 तक
➡️ गंगा सप्तमी पर दानपुण्य का शुभ मुहूर्त : सुबह ब्रह्म मुहूर्त 4:13 से 4:56 तक
💮 गंगा सप्तमी शुभ योग
3 मई शनिवार को गंगा सप्तमी के दिन त्रिपुष्कर योग सुबह 7:51 से लेकर दोपहर 12:34 तक रहने वाला है। रवि योग का प्रभाव भोर के समय 5:39 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक देखा जा सकेगा। इस दौरान सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होंगे, इस समय में कोई भी नया काम आरंभ किया जा सकता है। नौकरी अथवा व्यवसाय से संबंधित किए गए कार्यों में मनचाही सक्सैस तो मिलेगी। जो रुके हुए काम भी हैं, वे भी फिर से आरंभ किए जा सकते हैं और उनके पूरा होने में किसी भी तरह की कोई बाधा-मुश्किल नहीं आएगी। अतीत में किए गए प्रयास सफल होंगे। पुराने निवेश धन वृद्धि में सहायक होंगे। उम्मीद से अधिक लाभ प्राप्त होंगे।
💁🏻 गंगा सप्तमी पर अवश्य किये जाने वाले अनुष्ठान
▪️ गंगा जल से स्नान करें।
▪️ देवी गंगा और भगवान शिव की पूजा करें।
▪️ आरती करें और भोग लगाएं।
▪️ जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े या पैसे दान करें।
▪️ अपने घर को गंगा जल छिड़क कर शुद्ध करें।
▪️ भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
💁🏻♀️ गंगा सप्तमी के उपाय
👉🏼 गंगा जल को तांबे के पात्र में रखें और उसमें केसर तथा थोड़ा सा गुड़ डालें। इसे घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखकर “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। इस उपाय को करने से धन समृद्धि में वृद्धि होती है।
👉🏼 गंगा जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें। इस उपाय को करने से आपको कर्ज से मुक्ति मिलती है।
👉🏼 गंगा जल में कपूर मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करें। मुख्य द्वार पर गंगाजल से सात बार घड़ी की उल्टी दिशा में घूमें। इस उपाय को करने से घर से नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं और बुरी नजर से रक्षा होती है।
👉🏼 गंगा तट पर पितरों के नाम से तर्पण करें और सादा अन्न, तिल और वस्त्र किसी ब्राह्मण को दान करें। इस उपाय को करने से घर में सुख शांति बढ़ती है और परिवार में कलह समाप्त होती है।
💦 अर्ध्य देते समय इस मंत्र का करें जाप
“ॐ नमः शिवाय गंगायै नमः। ॐ भागीरथी च विद्महे विष्णुपत्न्यै धीमहि। तन्नो जाह्नवी प्रचोदयात्॥”
🫵🏼 गंगा सप्तमी क्या है?
गंगा सप्तमी का पर्व हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, जिसे गंगा जयंती भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने गंगा के वेग को नियंत्रित करने के लिए उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया था। इस दिन भक्तगण गंगा नदी में स्नान करते हैं, पूजा करते हैं और दान करते हैं। गंगा सप्तमी पर मां गंगा के 108 नामों का जाप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। यह दिन श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। गंगा सप्तमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व गंगा नदी के अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है, जो कि पवित्रता और मोक्ष का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन भक्तगण गंगा में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🙇🏻♀️ गंगा सप्तमी का महत्त्व क्या है?
🪶 गंगा की उत्पत्ति: गंगा सप्तमी का पर्व मां गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरण की याद में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन मां गंगा शिव की जटाओं से प्रवाहित होकर धरती पर आईं, जिससे यह दिन विशेष महत्व रखता है।
🪶 पापों का नाश: इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। मान्यता है कि गंगा जल में स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का संचार होता है।
🪶 दान-पुण्य का महत्व: गंगा सप्तमी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन गंगाजल में दूध अर्पित करना और दान करना शुभ माना जाता है। यह न केवल आत्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मकता फैलाता है।


