Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 08 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 08 जून 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 07:18 AM तक उपरांत त्रयोदशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 12:42 PM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है। स्वाति नक्षत्र के देवता वायु हैं।
⚜️ योग – परिघ योग 12:17 PM तक, उसके बाद शिव योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 07:17 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 08:28 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:48 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:39 पी एम से 03:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:37 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:18 पी एम से 08:18 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 ए एम, जून 09 से 12:40 ए एम, जून 09
🚕 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिव मंदिर में प्रदोषकाल में सवाकिलो आम चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/ वटसावित्री व्रतारंभ/ सूर्य का मृगशिर्ष प्रवेश वाहन – सियार/ विश्व ट्यूमर दिवस, विश्व महासागर दिवस, नेशनल बेस्ट फ्रेंड्स डे,राष्ट्रीय अप्सी डेज़ी दिवस, राष्ट्रीय अप्सी डेज़ी दिवस, राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ मित्र दिवस, अभीनेत्री डिंपल कपाड़िया जन्म दिवस, विश्व रेड क्रॉस दिवस, भारतीय फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी किसान कय्यर किन्हाना राय जयन्ती
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🛕
शिवलिंग की पूजा हम प्रतिदिन करते है ,पर क्या आप जानते है कभी शिवलिंग ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। कई लोग मंदिर साफ़ करते समय कई बार शिवलिंग ज़मीन पर रखते है। ऐसा कभी न करे। शालिग्राम की पूजा तो सभी करते है। पर ज्योतिष एक बात हमेशा ध्यान में रखे कि कभी भी शालिग्राम को ज़मीन पर न रखे। इससे आप के घर कि आर्थिक स्थिति ख़राब हो सकती है।जनेऊ को बहुत पवित्र माना गया है। इसलिए इसे कभी ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। न ही फेकना चाहिए। अगर आप का जनेऊ ख़राब है तो उसे पेड़ की टहनी से बाँध दे या पेड़ की जड़ में डाल दे। शंख का प्रयोग हर रोज पूजा पाठ में किया जाता है। इसलिए कभी भी शंख को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। शंख बजाने के बाद हमेशा उसे धोकर रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भोजन की थाली को भी कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए ऐसा करना भी दुर्भाग्य की वजह बन जाता है।
🎗️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आंखों की सफाई का विशेष ध्यान रखें: आंखों को साफ और सूखा रखना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है। गंदे हाथों से आंखों को छूने से बचें। दिन में कम से कम दो बार गुनगुने पानी से आंखें धोएं। इससे धूल और गंदगी हटती है और आंखों की सतह साफ रहती है।
ठंडी पट्टी लगाएं: आंखों पर ठंडी पट्टी या साफ कपड़े की पट्टी लगाने से खुजली में तुरंत राहत मिलती है। ठंडक से सूजन कम होती है और आंखों की जलन भी कम होती है।
आंखों को अक्सर मत रगड़ें: खुजली होने पर आंखें रगड़ना सबसे गलत आदत है, क्योंकि इससे आंखों में संक्रमण फैल सकता है या खरोंच लग सकती है। कोशिश करें कि खुजली महसूस होने पर भी आंखों को छूने या रगड़ने से बचें।
आंखों की सूखापन दूर करें: लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखें सूखी हो जाती हैं, जिससे खुजली होती है। इस स्थिति में आंखों की सूखापन दूर करने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स (आई ड्रॉप्स) का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए नजर को स्क्रीन से हटाकर दूर किसी वस्तु को देखें (20-20-20 नियम)।
🥂 आरोग्य संजीवनी 🍻
गर्मी में सत्तू के शीतल गुण: भुने हुए चने या जौ से बना सत्तू शीतवीर्य होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर में ठंडक पहुँचाता है। चरक संहिता के अनुसार, गर्मियों में पित्त दोष की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे अम्लता, जलन, घबराहट, पसीना, और थकावट जैसी स्थितियाँ होती हैं। सत्तू का शरबत इस पित्त वृद्धि को शांत करता है। इसमें मृदु लघुता (हल्कापन) होने के कारण यह पचने में आसान होता है और दीपन (भूख बढ़ाने वाला) व पाचन गुण भी रखता है।
जलतृषा और लवण संतुलन: गर्मियों में अत्यधिक पसीना शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स (लवण) की कमी कर देता है। सत्तू में यदि थोड़ा सेंधा नमक, भुना जीरा और नींबू मिलाया जाए, तो यह एक आदर्श ओरल रिहाइड्रेशन (जल पुनर्संयोजन) पेय बन जाता है। यह तृष्णा (प्यास) को शांत करता है — जैसा कि चरक ने कहा है:
“शीतं लघु स्निग्धं तृष्णाशमनं…”
अर्थात ठंडे और लघु पेयों का सेवन तृष्णा को शांत करता है और शरीर में क्लेश (दाह-ज्वर) को मिटाता है।
बलवर्धन और भूख का नियंत्रण: सत्तू में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और रेशे (फाइबर) संतुलित मात्रा में होते हैं। यह बल्य (शक्ति देने वाला) होता है और दिनभर की थकान में ऊर्जा प्रदान करता है, साथ ही पाचन को बिना भारी किए हुए पेट भरने का अनुभव कराता है। इससे बार-बार भूख लगने की प्रवृत्ति पर भी नियंत्रण रहता है।
अतः – चरक और परंपरा दोनों यह दर्शाते हैं कि सत्तू का शरबत गर्मियों में केवल एक पेय नहीं, बल्कि एक औषध तुल्य पोषण स्रोत है। यह शरीर के त्रिदोषों विशेषतः पित्त दोष को संतुलित करता है, ऊर्जा प्रदान करता है, जल संतुलन बनाए रखता है, और आंतरिक शीतलता प्रदान करता है — इसीलिए यह ग्रामीण भारत की “ग्रीष्म आयुर्वेदिक अमृत” माना जा सकता है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा महल में झाड़ू लगा रही थी तो द्रौपदी उसके समीप गई उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली,
“पुत्री भविष्य में कभी तुम पर घोर से घोर विपत्ति भी आए तो कभी अपने किसी नाते-रिश्तेदार की शरण में मत जाना। सीधे भगवान की शरण में जाना।”
उत्तरा हैरान होते हुए माता द्रौपदी को निहारते हुए बोली, “आप ऐसा क्यों कह रही हैं माता ?”
द्रौपदी बोली, “क्योंकि यह बात मेरे ऊपर भी बीत चुकी है। जब मेरे पांचों पति कौरवों के साथ जुआ खेल रहे थे, तो अपना सर्वस्व हारने के बाद मुझे भी दांव पर लगाकर हार गए। फिर कौरव पुत्रों ने भरी सभा में मेरा बहुत अपमान किया। मैंने सहायता के लिए अपने पतियों को पुकारा मगर वो सभी अपना सिर नीचे झुकाए बैठे थे। पितामह भीष्म, द्रोण धृतराष्ट्र सभी को मदद के लिए पुकारती रही मगर किसी ने भी मेरी तरफ नहीं देखा, वह सभी आँखें झुकाए आँसू बहाते रहे। सबसे निराशा होकर मैंने श्रीकृष्ण को पुकारा, “आपके सिवाय मेरा और कोई भी नहीं है, तब श्रीकृष्ण तुरंत आए और मेरी रक्षा की।”
जब द्रौपदी पर ऐसी विपत्ति आ रही थी तो द्वारिका में श्री कृष्ण बहुत विचलित होते हैं। क्योंकि उनकी सबसे प्रिय भक्त पर संकट आन पड़ा था।
रूकमणि उनसे दुखी होने का कारण पूछती हैं तो वह बताते हैं मेरी सबसे बड़ी भक्त को भरी सभा में नग्न किया जा रहा है।
रूकमणि बोलती हैं, “आप जाएँ और उसकी मदद करें।”
श्री कृष्ण बोले, “जब तक द्रोपदी मुझे पुकारेगी नहीं मैं कैसे जा सकता हूँ। एक बार वो मुझे पुकार लें तो मैं तुरंत उसके पास जाकर उसकी रक्षा करूँगा।
तुम्हें याद होगा जब पाण्डवों ने राजसूर्य यज्ञ करवाया तो शिशुपाल का वध करने के लिए मैंने अपनी उंगली पर चक्र धारण किया तो उससे मेरी उंगली कट गई थी। उस समय “मेरी सभी पत्नियाँ वहीं थी। कोई वैद्य को बुलाने भागी तो कोई औषधि लेने चली गई। मगर उस समय मेरी इस भक्त ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और उसे मेरी उंगली पर बाँध दिया। आज उसी का ऋण मुझे चुकाना है, लेकिन जब तक वो मुझे पुकारेगी नहीं मैं जा नहीं सकता।”
अत: द्रौपदी ने जैसे ही भगवान कृष्ण को पुकारा प्रभु तुरंत ही दौड़े गए।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।


