Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 22 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 22 जून 2025
22 जून 2025 दिन रविवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। तो जैसा कि आप जानते हैं कि तारीख 21 जून 2025 दिन रविवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ पंचांग के अनुसार प्रातः 04.43 बAM जे हुआ था। और एकादशी तिथि 21 जून को अर्द्धरात्रि के उपरान्त अर्थीत 22 जून को 01.14 AM बजे तक थी। तो आज 22 जून को ही सूर्य उदय के उपरांत योगिनी एकादशी का पारण किया जाएगा। आज 22 जून 2025 को पारण का समय सुबह 6:00 AM बजे से 8:40 AM बजे तक है। इस समय के भीतर ही सभी योगिनी एकादशी व्रतियो को एकादशी का पारण कर लेना चाहिए।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव कोय एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : रविवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 01:22 AM तक उपरांत त्रयोदशी।
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र भरणी 05:38 PM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी : भरणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस नक्षत्र के देवता यम और लिंग स्री है।
⚜️ योग : सुकर्मा योग 04:57 PM तक, उसके बाद धृति योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 02:56 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 01:21 ए एम, जून 23 तक गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:04 ए एम से 04:44 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:24 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 01:16 पी एम से 02:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, जून 23 से 12:43 ए एम, जून 23
🌸 त्रिपुष्कर योग : 05:38 पी एम से 01:21 ए एम, जून 23
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को लाल वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – योगिनी एकादशी व्रत-(वैष्णव/निम्बार्क)/ त्रिपुष्कर योग/ संत कबीर प्राकट्योत्सव/ जगन्नाथदास रत्नाकर स्मृति दिवस, भदंत आनंद कौसल्यायन पुण्य तिथि, केदारनाथ अग्रवाल पुण्य तिथि, विश्व वर्षावन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय आप दिवस, गणेश घोष जन्म दिवस, अभिनेता अमरीश पुरी जन्म दिवस, नितिन रतिलाल पटेल जन्म दिवस, विजय चन्द्रशेखर जयंती, राष्ट्रीय एचवीएसी तकनीक दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।
🎋 Vastu Tips_ ☘️
अशोक का वृक्ष अगर इस वृक्ष को घर की उत्तर दिशा में लगाया जाए तो बेहद शुभ फल प्राप्त होते हैं. यह वृक्ष नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है और घर में शांति और सुख लेकर आता है.
श्वेतार्क का पौधा यह पौधा वास्तु शास्त्र के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों की सीमा पर लगाया जाना चाहिए. लेकिन अगर यह पौधा अपने आप घर की सीमा में उग आए, तो इसे हटाना नहीं चाहिए. इसकी हल्दी, अक्षत और जल से पूजा करनी चाहिए. इससे घर में बरकत बनी रहती है और सुख-शांति प्राप्त होती है.
नारियल का पेड़ अगर यह पेड़ घर की सीमा में लगा हो तो यह शुभ फल देता है. इससे घर में रहने वालों को मान-सम्मान और उन्नति प्राप्त होती है.
बरगद का वृक्ष घर की पूर्व दिशा में यह वृक्ष हो तो यह सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है. लेकिन ध्यान रहे कि इसकी छाया भवन पर न पड़े. पश्चिम दिशा में यह पेड़ अशुभ माना गया है.
आंवले का वृक्ष वास्तु शास्त्र के अनुसार यह पेड़ घर की सीमा में शुभ माना गया है लेकिन इसे दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में नहीं लगाना चाहिए.
नीम का वृक्ष वास्तु के अनुसार, उत्तर-पश्चिम दिशा में नीम का पेड़ लगाना बेहद शुभ होता है. यह रोगों को दूर करता है. वातावरण को शुद्ध करता है और जीवन में सुख-शांति लाता है.
✒️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
छींकते समय आँखें बंद होना एक अनिवार्य प्रतिवर्त क्रिया है।
इसके कुछ मुख्य कारण हैं:
सुरक्षात्मक तंत्र: छींकते समय मुंह और नाक से तेज हवा के साथ बैक्टीरिया और बाहरी कण निकलते हैं। आँखों को इनसे बचाने के लिए पलकें अपने आप बंद हो जाती हैं।
तंत्रिका तंत्र का जुड़ाव: हमारा तंत्रिका तंत्र आँख, नाक और चेहरे की मांसपेशियों को जोड़ता है। जब छींक आती है, तो मस्तिष्क पलकों को बंद करने का संकेत देता है।
मांसपेशियों का खिंचाव: छींक के दौरान चेहरे की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे आँखें भी बंद हो जाती हैं।
यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
जामुन खाने के बाद नहीं करना चाहिए इन चीजों का सेवन
जामुन और दूध: कुछ लोग जामुन को दूध में मिलाकर शेक के रूप में पीते हैं। लेकिन यह कॉम्बिनेशन सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। जामुन के साथ या खाने के बाद दूध पीने से बचना चाहिए। क्योंकि यह कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र पर दबाव डालता है और पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसके कारण आपको गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
जामुन और अचार: जामुन के साथ किसी भी तरह का अचार नहीं खाना चाहिए। लेकिन जामुन के साथ अचार खाना काफी नुकसानदायक हो सकता है। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे पेट में एसिड बढ़ सकता है और आपको उल्टी, चक्कर आना और पेट की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अगर आप जामुन खा रहे हैं तो इसे खाने के एक घंटे बाद तक अचार न खाएं।
जामुन और हल्दी: जामुन खाने के बाद हल्दी वाली हर चीज से दूर रहें। ऐसी कोई भी चीज न खाएं जिसमें कम से कम एक घंटे तक हल्दी का इस्तेमाल किया गया हो। ये दोनों शरीर के लिए खराब कॉम्बिनेशन हैं। इन्हें एक साथ खाने से पेट में दर्द और जलन हो सकती है। इससे कब्ज और एसिडिटी भी हो सकती है।
जामुन और पानी: कुछ लोग जामुन खाने के बाद पानी पीते हैं। लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। इससे डायरिया या अपच जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए जामुन खाने के करीब 30 से 40 मिनट तक पानी नहीं पीना चाहिए।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
सनातन धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान या उनसे भी बढ़कर माना गया है। इसके पीछे गहरा अर्थ छिपा है:
गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु और गुरु महेश क्यों कहा गया?
यह श्लोक गुरु के महत्व को दर्शाता है और उन्हें त्रिदेवों के समान मानता है, क्योंकि गुरु शिष्य के जीवन में तीनों देवताओं की भूमिका निभाते हैं:
गुरुर्ब्रह्मा: गुरु ब्रह्मा के समान होते हैं क्योंकि वे शिष्य को नया जन्म देते हैं। वे अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं, जैसे ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं। वे शिष्य के अंदर सद्गुणों और विचारों का निर्माण करते हैं, जिससे वह एक नए, बेहतर व्यक्ति के रूप में विकसित होता है।
गुरुर्विष्णु: गुरु विष्णु के समान होते हैं क्योंकि वे शिष्य का पालन-पोषण करते हैं और उसकी रक्षा करते हैं। वे शिष्य को सही मार्ग पर चलने में मदद करते हैं, उसकी कठिनाइयों को दूर करते हैं और उसे जीवन में स्थिरता प्रदान करते हैं, जैसे विष्णु सृष्टि का पालन करते हैं।
गुरुर्देवो महेश्वरः: गुरु महेश्वर (शिव) के समान होते हैं क्योंकि वे शिष्य के अंदर के दोषों, कुसंस्कारों और अज्ञान का संहार करते हैं। वे शिष्य के अहंकार को नष्ट करते हैं और उसे शुद्धता की ओर ले जाते हैं, जैसे शिव संहारक हैं और बुराइयों का नाश करते हैं।
इस प्रकार, गुरु एक ही व्यक्ति में इन तीनों शक्तियों का संगम होते हैं, जो शिष्य के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं।
👉🏼 यह 3 क्यों है?
“3” अंक यहाँ त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की संख्या को दर्शाता है, जो सृष्टि के तीन प्रमुख कार्यों – उत्पत्ति (ब्रह्मा), पालन (विष्णु), और संहार (महेश) – का प्रतिनिधित्व करते हैं। गुरु भी शिष्य के जीवन में इन तीनों कार्यों को संपन्न करते हैं। यह त्रिमूर्ति एक ही परम सत्ता के विभिन्न रूप हैं, और गुरु को भी उसी परम सत्ता का प्रतीक माना गया है।
गुरु 3 अंक का स्वामी क्यों है?
अंक ज्योतिष में, अंक 3 को देवगुरु बृहस्पति का अंक माना जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि, धर्म, विस्तार, सौभाग्य और शिक्षा का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु का संबंध इन्हीं गुणों से है:
ज्ञान और बुद्धि: गुरु ज्ञान और बुद्धि के दाता होते हैं। वे शिष्य को सही और गलत का भेद समझाते हैं, उसे ज्ञान अर्जित करने में मदद करते हैं और उसकी बुद्धि का विकास करते हैं। ये सभी बृहस्पति के गुणों से संबंधित हैं।
धर्म और नैतिकता: गुरु शिष्य को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, उसे नैतिक मूल्यों का ज्ञान कराते हैं और उसे जीवन के सही उद्देश्य की ओर ले जाते हैं। बृहस्पति भी धार्मिकता और नैतिकता के प्रतीक हैं।
शुभता और विस्तार: गुरु की कृपा से शिष्य के जीवन में शुभता आती है और उसका विस्तार होता है। वे उसे सफलता और समृद्धि की ओर ले जाते हैं, जो बृहस्पति के सकारात्मक प्रभावों में से एक है।
इसलिए, अंक 3 का स्वामी बृहस्पति होने के कारण, गुरु को भी इस अंक से जोड़ा जाता है, जो उनके ज्ञान, धर्मपरायणता और शुभता के गुणों को दर्शाता है
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।

