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Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 04 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 04 अगस्त 2025
04 अगस्त 2025 दिन सोमवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि दशमी तिथि है। आज श्रावण सोमवार का पावन व्रत भी है। आज का सोमवार का पावन व्रत करने से प्रदोष व्रत के समान फल की प्राप्ति होती है। आज प्रदोषकाल में झूलन यात्रा आरंभ होती है। आज रवियोग एवं स्वार्थसिद्धि योग भी है। ये बहुत ही शुभ संकेत है। आज यदि भगवान शिव मंदिर में जाकर किसी विशिष्ट कामना की पूर्ति होगी। अथवा आज आंवला, बिल्ववृक्ष एवं पीपल के वृक्ष के मूल में शुद्ध देसी गाय के घी का दीपक जलाएं तो भी कामना पूर्ति अवश्य होती है। आज सभी सनातनियों को “झूलन यात्रा एवं श्रावण सोमवार के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 11:42 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 09:12 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र हैं। यह नक्षत्र वृश्चिक राशि में आता है।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 07:04 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : गर – 11:41 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 12:31 ए एम, अगस्त 05 तक विष्टि
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:25:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:35:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:20 ए एम से 05:02 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:41 ए एम से 05:44 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:41 पी एम से 03:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:10 पी एम से 07:31 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:10 पी एम से 08:13 पी एम
💧 अमृत काल : 01:47 ए एम, अगस्त 05 से 03:32 ए एम, अगस्त 05
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 05 से 12:48 ए एम, अगस्त 05
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:44 ए एम से 09:12 ए एम
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शुकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ सौं सौमाय नमः।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय – गणेश मंदिर में सफेद तिल के मोदक अर्पित करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल अर्पित करें।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ शिव पूजन/ झूलन यात्रा/ कडूमेंट दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट चिप कुकी दिवस, सामाजिक कार्यकर्ता फिरोजशाह मेरवानजी मेहता जन्म दिवस, पार्श्वगायक किशोर कुमार जन्म दिवस, प्रतिष्ठित शासक राणा उदय सिंह जयन्ती, राष्ट्रीय श्वेत वाइन दिवस, एकल कामकाजी महिला दिवस, अंतर्राष्ट्रीय उल्लू जागरूकता दिवस, अमेरिकी तटरक्षक दिवस, साहित्यकार इन्दु प्रकाश पाण्डेय जन्म दिवस, स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी यशवंत सिंह परमार जयन्ती,सहायता कुत्ता दिवस, विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗽 Vastu tips 🗼
घर के ईशान कोण को रखें साफ
ईशान कोण घर की उत्तर-पूर्व के बीच की दिशा को कहा जाता है। आप आसानी से कंपास की सहायता से इस दिशा का पता लगा सकते हैं। यह दिशा देवी-देवताओं की मानी जाती है। इसलिए ईशान कोण से जुड़ी सावधानियां आपको बरतनी चाहिए। इस दिशा में कभी भी टॉयलेट, जूते-चप्पल रखने की जगह, कूड़ेदान रखने की जगह नहीं बनानी चाहिए। इस दिशा को आप जितना साफ सुथरा रखेंगे उतना ही आपके लिए अच्छा रहेगा। इस दिशा में आप घर का मंदिर बना सकते हैं। वहीं जो लोग ईशान कोण को साफ-सुथरा नहीं रखते वहां गंदगी फैलाते हैं, उनके घर में लड़ाई झगड़े हो सकते हैं। साथ ही घर के लोगों के बीच भी मनमुटाव रहता है। इसलिए घर के ईशान कोण का पता कर इस जगह को साफ सुधरा रखें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कपूर दो तरह के होते हैं- प्राकृतिक व कृत्रिम. प्राकृतिक कपूर (भीमसेनी कपूर) को पेड़ से निकाला जाता है, जिसे हम खा भी सकते हैं. जबकि केमिकल्स से बना हुआ कृत्रिम कपूर हीलिंग प्रॉपर्टीज़ से भरपूर होता है और इसी काम में लाया जाता है. कपूर ख़ुशबूदार व ज्वलनशील है, इसलिए पूजा-हवन के दौरान वातावरण की शुद्धता के लिए इसका उपयोग करते हैं. इसके कई चिकित्सीय लाभ भी हैं, इसी कारण आयुर्वेदिक उपचारों में भी इसका इस्तेमाल होता है.
पेटदर्द या गैस व जलन होने पर कपूर, अजवायन व पुदीने को शर्बत में मिलाकर पीने से आराम मिलता है.
दांत में हुए गड्ढे यानी कैविटी में कपूर रखने से दांत का दर्द कम हो जाता है.
दिल की कमज़ोरी की वजह से घबराहट होने पर थोड़ा-सा कपूर खाएं, इससे नाड़ी की गति बढ़ जाती है और घबराहट मिट जाती है.
हैजा होने पर कपूर का अर्क लेने से लाभ होता है.
बिच्छू काटने पर कपूर को सिरके में पीसकर दंश पर लगाने से बिच्छू का विष उतर जाता है.
बाल टूट व गिर रहे हों या फिर बालों में रूसी हो, तो नारियल के तेल में कपूर का तेल मिलाकर लगाने से लाभ होता है.
नकसीर फूटने या नाक से ख़ून निकलने पर गुलाबजल में कपूर पीसकर नाक में टपकाने से नाक से ख़ून गिरना बंद हो जाता है.
10 ग्राम कपूर, 10 ग्राम स़फेद कत्था, 5 ग्राम मटिया सिंदूर- तीनों को एक साथ मिलाकर 100 ग्राम घी के साथ कांसे की थाली में हाथ की हथेली से ख़ूब मलकर ठंडे पानी से धोकर रख लें. इसे घाव, गर्मी के छाले, खुजली और सड़े हुए घाव पर लगाने से शीघ्र लाभ होता है.
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
🍁 सूखी खांसी के घरेलू उपचार:
🔸आज कल लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी कई समस्‍याओं का सामना करनां पड़ रहा है जिसमें से सूखी खांसी एक आम बीमारी बनती हुई नज़र आ रही है। आयुर्वेद चिकित्‍सा में आपको हर बीमारी का इलाज मिलेगा, जिसमें से सूखी खांसी का भी उपचार इसमें दिया हुआ है। अगर आपको भी कई दिनों से सूखी खांसी आ रही है तो, उसे नज़र अंदाज ना करें।
सूखी खांसी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे वाइरल इंफेक्‍शन, सर्दी, फ्लू, धूम्रपान या अन्‍य रोग जैसे, अस्‍थमा, टीबी या फेफड़ों का कैंसर आदि। सूखी खांसी के लिये आप चाहें तो कुछ घरेलू उपचार अपनां सकते हैं। यह किफायती भी हैं और इनका कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं होता। आइये जानते हैं इनके बारे में..
🔹1. एक चम्‍मच शहद शुद्ध शहद में ऐसे एंजाइम होते हैं जो कफ से राहत दिलाते हैं। सूखी खांसी को दूर करने के लिये आपको दिन में 1 चम्‍मच शहद 3 बार लेनां होगा। गरम पानी से गरारा करनां जब आप नमक मिले पानी से गरारा करते हैं तो गले का दर्द और खांसी तुरंत ही गायब हो जाती है। 1 गिलास गरम पानी में 1 चम्‍मच नमक मिला कर सुबह शाम गरारा करनें से आराम मिलता है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
आखिर क्यों आना पड़ा देवों के देव महादेव को माँ काली के पैरों के नीचे?
यह एक बहुत ही प्रसिद्ध पौराणिक कथा है जो शिव और शक्ति के अटूट संबंध को दर्शाती है। इसके पीछे मुख्य रूप से दक्ष यज्ञ का विध्वंस और देवी सती का पुनर्जन्म की घटना है।
संक्षेप में कहानी इस प्रकार है:
दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया क्योंकि वे उन्हें अपना दामाद नहीं मानते थे। देवी सती (जो शिव की पत्नी थीं और दक्ष की पुत्री थीं) बिना बुलाए भी अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गईं। वहां दक्ष ने शिव का घोर अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर सती ने उसी यज्ञ कुंड में कूदकर अपनी आहुति दे दी।
सती की मृत्यु का समाचार पाकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने अपने गणों के साथ दक्ष यज्ञ को तहस-नहस कर दिया। इसके बाद, वे सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर रखकर तांडव करने लगे। शिव का यह रौद्र रूप देखकर तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और प्रलय की स्थिति आ गई।
देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे शिव के क्रोध को शांत करें। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जहां-जहां सती के शरीर के अंग गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
हालांकि, शिव का क्रोध अभी भी शांत नहीं हुआ था। वे सती के वियोग में और भी विकराल रूप धारण कर चुके थे। इसी स्थिति में, देवी सती ने ही महाकाली का रूप धारण किया। काली अत्यंत भयंकर और शक्तिशाली देवी हैं, जो नकारात्मकता और अधर्म का नाश करती हैं।
महाकाली ने शिव के क्रोध को शांत करने के लिए उनके मार्ग में लेट गईं। जब शिव तांडव करते हुए आगे बढ़े, तो उनका पैर माँ काली के शरीर पर पड़ गया। जैसे ही शिव को यह आभास हुआ कि उनका पैर अपनी ही शक्ति (पत्नी) पर पड़ा है, उनका क्रोध तुरंत शांत हो गया। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और वे शांत होकर वहीं रुक गए।
इस कथा का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है:
शक्ति की सर्वोच्चता: यह दर्शाता है कि आदि शक्ति (देवी) ही शिव को भी शांत कर सकती हैं। शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं।
अहंकार का नाश: यह प्रतीकात्मक रूप से यह भी दिखाता है कि अहंकार और क्रोध को शांत करने के लिए कभी-कभी स्वयं को झुकाना पड़ता है
संतुलन और सहयोग: शिव और काली का यह रूप ब्रह्मांड में संतुलन और पुरुष (शिव) तथा प्रकृति (काली) के सहयोग को दर्शाता है।
इसलिए, देवों के देव महादेव को माँ काली के पैरों के नीचे आना पड़ा ताकि उनका क्रोध शांत हो सके और सृष्टि का विनाश रुक सके। यह घटना शिव और शक्ति के एक-दूसरे के पूरक होने और देवी की सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

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