प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज या सुल्तानी अस्पताल की लापरवाही के कारण जच्चा और बच्चा की मौत
रिपोर्टर : मुकेश साहू
दीवानगंज। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज हमेशा चर्चा में बना रहता है यहां पर कभी रात के समय नर्स समय पर नहीं पहुंचती है तो कभी डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते हैं। जिससे मरीज परेशान होते रहते हैं।
ऐसा ही मामला शुक्रवार को देखने में आया जहां बालमपुर निवासी दिनेश अहिरवार अपनी पत्नी निशा अहिरवार उम्र 30 वर्ष को बुधवार को प्रसव पीड़ा होने पर दीवानगंज अस्पताल में भर्ती किया गया था। बुधवार रात करीब 9 बजे महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया था लेकिन कम महीने की होने के कारण अस्पताल से जच्चा और बच्चा को एंबुलेंस से सुल्तानिया अस्पताल भोपाल भेज दिया गया। लेकिन अस्पताल द्वारा बच्चा को भर्ती करने का पर्चा तो बना दिया लेकिन महिला को भर्ती करने का पर्चा नहीं बनाया। जिस कारण सुल्तानिया अस्पताल में महिला को भर्ती नहीं किया गया जबकि बच्चा को भर्ती कर लिया गया। देर रात सुल्तानीय अस्पताल में बच्ची की मौत हो गई वही 48 घंटे बाद महिला की भी घर पर हो गई मौत,
निशा के पति दिनेश कुमार अहिरवार ने बताया कि डिलीवरी दीवानगंज अस्पताल में नॉर्मल हुई थी लेकिन बच्चा कम महीने होने के कारण एंबुलेंस से जच्चा और बच्चा दोनों को सुल्तानिया अस्पताल भेज दिया था मेरे पास जो पर्चे थे मैंने सुल्तानिया अस्पताल में दिए थे जिसमें बच्चा को भर्ती करने का पर्चा था लेकिन पत्नी को भर्ती करने का पर्चा नहीं था जिस कारण अस्पताल में मेरी पत्नी को भर्ती नहीं किया गया। में 3 घंटे तक अस्पताल के दरवाजे पर पत्नी को लेकर बैठ रहा और कई बार कहा की पत्नी को भर्ती कर लो लेकिन अस्पताल वालों ने मेरी एक न सुनी और कहा कि तुम्हारी पत्नी के नॉर्मल डिलीवरी हुई है इसको घर ले जाओ इसके पास भर्ती करने का पर्चा नहीं है। इसलिए इसको हम भर्ती नहीं कर सकते।
मैंने तुरंत 181 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की मेरी शिकायत नोट भी कर ली गई मेरा शिकायत नंबर 33990655 है।
इसके बाद भी 4 घंटे तक मेरी पत्नी को भर्ती नहीं किया गया। मैंने कई बार एंबुलेंस वालों से कहा कि मेरी पत्नी को घर तक छोड़ दो, मगर किसी ने भी मुझे घर तक नहीं छोड़ा , सुबह 5 बजे 1100 रुपए का ऑटो कर में अपनी पत्नी को घर ले आया। मैंने सोचा की पत्नी को स्नान कराकर दूसरे दिन दीवानगंज अस्पताल में भर्ती कर दूंगा। लेकिन उसकी दूसरे दिन मेरी पत्नी निशा की मौत हो गई। निशा की यह दूसरी डिलीवरी थी इससे पहले वाला लड़के की उम्र 4 वर्ष है।
मेडिकल ऑफिसर पलक पटेरिया को जब कॉल कर बात करने की कोशिश की गई तो कॉल रिसीव नहीं हुआ।
आरोप लगाया है कि यह सारी लापरवाही दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है जब उन्होंने दूसरे अस्पताल में मुझे भेजा था तो जच्चा और बच्चा दोनों को भर्ती करने का पर्चा बनाना चाहिए था मगर ऐसा नहीं किया गया। अगर मेरी पत्नी भर्ती हो जाती तो उसकी आज मौत नहीं होती। आज मेरे 4 साल के बच्चे के ऊपर से मां का साया उठ गया।
इस संबंध में रवि राठौर सीबीएमओ सांची का कहना हैं कि मेरे संज्ञान में आपके द्वारा जच्चा बच्चा की मौत होने की जानकारी आई है। स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज में डॉक्टर अब 24 घंटे डॉक्टर उपलब्ध है। इसके बाद अगर जच्चा बच्चा को रेफर करने में कोई चूक हुई है तो वह जांच का विषय है। इससे पहले भी मेरे संज्ञान में इस प्रकार की लापरवाही आई थी उस पर मैंने घटनास्थल पर पहुंचकर संबंधित से सवाल जवाब पूछ कर कार्रवाई की थी।नॉर्मल डिलीवरी के पश्चात भी 48 घंटे से 72 घंटे तक जच्चा बच्चा को अस्पताल में रखने का प्रावधान है।



