चुनावी वायदों को किसानों गरीबों ने समझा हकीकत, अब वसूली के लिए बैंक ने दिलवाए नोटिस

तहसील में बैंक के कर्जदार किसानों मजदूरों का हंगामा
सभी ने लगाए आरोप सरकार के लोन माफ करने की घोषणा झूठीं
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । करीब सात सो लोग जिसमें किसान और मजदूर भी शामिल हैं। चुनाव के समय किए गए घोषणाओं के झांसे में आ गए और बैंक से कर्ज लेने के बाद उन्होंने किश्तें जमा नहीं कि अब सेंट्रल बैंक ने तहसीलदार के माध्यम से ऐसे सभी बकायादारों को नोटिस जारी कर 25 अगस्त को बकाया राशि जमा करने का आदेश दिया तो तहसील में हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई।
आपको बता दें कि सेंट्रल बैक ऑफ इंडिया शाखा बेगमगंज द्वारा कई साल पहले किसानों मजदूरों छोटा-मोटा व्यापार करने वालों को शासन की विभिन्न अनुदान योजनाओं के तहत बिना गारंटी के जो ऋण दिया गया था। उसमें बैंक एवं संबंधितों का पूर्व में समझौता योजना के तहत समझौता हो गया था, की सरकार ने ऋण माफ कर दिया है अब किश्तें जमा नहीं करना, लेकिन एकाएक बैंक प्रबंधन ने तहसीलदार के माध्यम से 700 किसानों व मजदूरों को वसूली नोटिस देकर सभी बकायादारों की 25 अगस्त की पेशी रख दी। तो तहसील में आज सोमवार को प्रायः सभी संबंधितों की भीड़ लग गई। तहसील कार्यालय से लेकर पूरा परिसर भर गया ।
किसानों ने आरोप लगाया है कि चुनाव के समय उन्हें ऋण माफ करने की जानकारी उचित माध्यम से दी गई थी। जिसके कारण उन्होंने बैंक की किश्तें नहीं भरी लेकिन अब एकाएक उन्हें वसूली नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है। जब ऋण माफ कर दिया गया था तो वसूली नोटिस क्यों।
वही बैंक प्रबंधन की ओर से फील्ड ऑफिसर घनश्याम उपाध्याय कहना है कि किसी तरह का ऋण माफ नहीं किया गया शासन की योजना के तहत ही कलेक्टर के निर्देश पर वसूली कैंप समझौता योजना के तहत लगाकर समझौते किए जा रहे हैं।



