हाथी पर सवार महालक्ष्मी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की

सिलवानी। पति, संतान और परिवार की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना के साथ रविवार को सिलवानी की सुहागन महिलाओं ने श्रद्धा भाव से महालक्ष्मी व्रत रखा। इस अवसर पर महिलाओं ने परंपरागत रूप से मिट्टी के हाथी पर सवार महालक्ष्मी की पूजा की और गजलक्ष्मी स्वरूप की विधिवत आराधना की।
पंडित भूपेंद्र शास्त्री के अनुसार, इस व्रत को गजलक्ष्मी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। महिलाओं ने सुबह गडुए से 16 बार पानी डालकर स्नान कर व्रत धारण किया और पूरे दिन उपवास रखा। शाम को 16 प्रकार के पकवान बनाकर, 16 दीप जलाकर महालक्ष्मी जी की पूजा की गई।
पूजन से पहले महालक्ष्मी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराकर, उन्हें पीला वस्त्र पहनाया गया। पूजा के बाद उसी वस्त्र से चीर निकालकर महिलाएं अपने साड़ी के पल्लू में बांधती हैं, जिससे परिवार में सुख-शांति और धन-वैभव बना रहे।
पूजा, कथा और हवन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर उपवास खोला गया। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से न केवल पारिवारिक जीवन में समृद्धि आती है, बल्कि नौकरी और व्यापार में भी तरक्की मिलती है।
ग्रामीण क्षेत्र में विशेष रूप से इस व्रत को लेकर गहरी आस्था देखी गई, जहां महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सजी-धजी नजर आईं और पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना में शामिल हुईं।



