धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 18 अक्टूबर 2025
*
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 12:19 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 03:41 PM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। तथा नक्षत्र के देवता ‘भग’ हैं,जो वैदिक सौर देवताओं में से एक हैं और समृद्धि और सौभाग्य से जुड़े हैं।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 01:47 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : तैतिल – 12:18 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 01:02 ए एम, अक्टूबर 19 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:10 :00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:48:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:33 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:08 ए एम से 06:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:46 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:48 पी एम से 06:14 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:48 पी एम से 07:04 पी एम
💧 अमृत काल : 08:50 ए एम से 10:33 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 19
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻‍♀️ *आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं। 🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – धनतेरस/ धनत्रयोदशी/ गुरु द्वादशी/ शनि प्रदोष/ भगवान धन्वंतरि जयन्ती/ यमदीपदान/ सतनामी स्वाभिमान दिवस, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी जन्म दिवस, भारत के प्रमुख क्रांतिकारी रामकृष्ण खत्री स्मृति दिवस, गुलामी विरोधी दिवस, राष्ट्रीय कद्दू चीज़केक दिवस, क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार जयन्ती, व्यवसायी दीपक पारेख जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता ओम पुरी जन्म दिवस, अलास्का दिवस, विश्व रजोनिवृत्ति दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट कपकेक दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मरम्मत दिवस, राष्ट्रीय एक्सास्केल दिवस
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏝️ Vastu tips 🏚️
दक्षिण में किचन होना शुभ या अशुभ? अगर आपका किचन दक्षिण दिशा में है तो यह आपके लिए अशुभ है, ऐसे में वास्तु शास्त्र के मुताबिक, कुछ उपाय करने से आपके घर का माहौल सही हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा में किचन का होना अशुभ माना जा सकता है क्योंकि दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा गया है, जो मृत्यु और निगेटिव एनर्जी से जुड़ी है। साथ ही किचन में आग और पानी का तत्व होता है, जिस कारण दक्षिण दिशा में होने से घर में निगेटिव एनर्जी को बढ़ा देता है।
किचने के लिए सही दिशा कौन-सी? आमतौर पर, वास्तु शास्त्र में किचन के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा को सही माना जाता है, क्योंकि यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी है और भोजन पकाने के लिए एकदम सही मानी गई है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
थकान मिटाने हेतु
ध्यान-भजन करने बैठे और थकान लगे तो क्या करे ? पलथी मार के बैठो और शरीर को चक्की कि नाई गोल घुमाओ | अनाज पीसने कि हाथ्वाली चक्की घूमती है न गोल, ऐसे थोड़ी देर घुमाओ, फिर उसकी विपरीत दिशा में भी घुमाओ |
*फिर अपने-आप घूमेगा थोड़ी देर |इससे थकान मिटेगी, ताजगी आयेगी | 💉 *आरोग्य संजीवनी* 🩸 च्यूइंग गम चबाएँ जी हां, सुनने में अजीब लगता है लेकिन यह सच है। शुगर-फ्री च्यूइंग गम चबाने से मुँह में सलाइवा बनता है जो पेट के एसिड को न्यूट्रलाइज करता है। इससे सीने की जलन, एसिडिटी और हार्टबर्न जैसी समस्याओं में तुरंत आराम मिलता है।
🍽️ थोड़ा कम खाना खाएँ इसका मतलब भूखा रहना नहीं है।
*भोजन हमेशा पेट की क्षमता के तीन हिस्सों में खाएँ *_1/3 ठोस भोजन*
1/3 तरल
*1/3 खाली जगह (गैस के लिए) *इससे खाना सही ढंग से हजम होता है और भारीपन या ब्लोटिंग नहीं होती।
💧 पर्याप्त पानी पिएँ पानी आपके पाचन तंत्र की सबसे बड़ी दवा है।* रोज़ाना 8–10 गिलास पानी जरूर पिएँ।
लेकिन ध्यान रखें —
❌ खाने के तुरंत बाद पानी न पिएँ, बल्कि आधा घंटे बाद पिएँ।
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*_खाने के तुरंत बाद पानी पीने से “जठराग्नि” कमजोर पड़ जाती है।
🧘‍♀️ रोज़ एक्सरसाइज़ करें शारीरिक गतिविधि आपके पाचन को तेज़ और संतुलित बनाती है। रोज़ाना 30–45 मिनट वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज़ करें।
खाने के बाद थोड़ी धीमी गति से टहलना सबसे अच्छा उपाय है।
🥛 प्रोबायोटिक फूड्स खाएँ प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया जो पेट में रहते हैं और डाइजेशन को सुधारते हैं। आप इन्हें दही, छाछ, पनीर या एप्पल साइडर विनेगर से पा सकते हैं। ये आपके गट हेल्थ और इम्युनिटी दोनों को मजबूत करते हैं।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
नन्दी ने भगवान शंकर से कहा — महादेव! आप मेरा अत्यन्त अद्भुत वचन सुनिये। मरे हुए लोगों का फिर भी जी उठना कल्पना से परे तथा असहनीय है। संग्राम में प्रथम स्थान में जिन दैत्यों को बल पूर्वक मारा था, उन्हें भार्गव ने संजीवनी विद्याद्वारा पुनः जीवित कर दिया। अतः हे महादेव! हे ईश! उन सभी ने युद्धमें जो उत्कृष्ट कार्य किया था, वह शुक्र की विद्या के बल से महत्त्वहीन हो गया है —सब पर पानी फिर गया है ॥
कुल को आनन्द देने वाले नन्दी के इस प्रकार कहने पर महादेव ने स्नेह पूर्वक स्वार्थ सिद्ध करने वाला उत्तम वचन कहा—
गणपते ! तुम जाओ और शुक्र को मेरे समीप लिवा लाओ। (फिर तो) मैं उन्हें पाकर योग क्रिया से संयमित कर दूँगा। रुद्र के ऐसा कहने पर गणपति नन्दी शुक्राचार्य को पकड़ने की कामना से दैत्यों की सेना में गये। हयक्न्धर नाम के बलवान् श्रेष्ठ असुरने उन्हें सेना में आते हुए देखा और जिस प्रकार साधारण पशु (दुस्साहससे) वन में सिंह का मार्ग रोक दे, उसी प्रकार उनके मार्ग को उसने रोका। नन्दी ने समीप जाकर शतपर्व (वज्र)— से उसे मारा और वह अचेत होकर गिर पड़ा। उसके बाद नन्दी तुरंत वहाँ से चल दिये ॥
उसके बाद कुज्जम्भ, जम्भ, वल, वृण और अयं:शिरा नामक पाँच श्रेष्ठ दानव नन्दो की ओर दौड़े। इसी प्रकार युद्ध में भाँति-भाँति के अस्त्र-शस्त्रों को धारण करनेवाले मय एवं हाद आदि दानवश्रेष्ठों ने भी नन्दी का पीछा किया। फिर पितामह देवों ने महाबली दानवों के द्वारा कूटे जा रहे गणाधिपको देखा। भगवान् ब्रह्मा से उन्हने देखकर इन्द्र आदि देवतओं से कहा—आपलोग इस उत्तम (उपयुक्त) अवसर पर शम्भू की सहायता करें ॥
पितामह के कहे हुए वचन को सुनकर इन्द्र आदि देवता आकाश मार्ग से जल्दी ही शिव की सेना में आ गये। समुद्र में जाती हुई नदियों के महावेग के सदृश प्रमथों की सेना में (आकाशसे) आते हुए देवताओं का वेग सुशोभित हुआ। उसके बाद प्रमथों और असुरों — दोनों पक्षों की सेनाओं में भीषण ‘हलहला’ शब्द उत्पन्न हुआ। उसी समय अवसर पाकर तीव्र गति वाले नन्दी, जिस प्रकार सिंह क्षुद्र मृग को दबोच लेता है, उसी प्रकार भार्गव को लेकर रथ से भाग चले। गणनायक उन्हें लेकर सभी रक्षा करने वालों को मारते हुए शंकर के पास पहुँच गये। शुक्राचार्य को उन्होंने उनके निकट निवेदित कर दिया। समर्थ शंकर ने लाये गये उन शुक्र को अपने मुख में फेंका और अक्षुण्ण शरीर वाले भार्गव को अपने उदर में (ज्यौका-त्यौं) रख लिया। शम्भूसे ग्रस्त होकर उनके उदर में स्थित हुए वे मुनिश्रेष्ठ शुक्र प्रेम पूर्वक उन भगवान स्तुति करने लगे इस प्रकार कविवर (शुक्राचार्य): के भक्तिपूर्वक स्तुति करने पर भगवान शंकर ने कहा—मैं तुम से प्रसन्न हूँ। तुम वर माँगो मैं तुम्हें वर दूँगा।
उन्होंने कहा—हे देववर! इस समय मुझे यही वर दीजिये कि मैं पुनः आपके उदर से बाहर निकलूँ। उसके बाद शंकर ने नेत्रों को बन्द कर कहा—
हे द्विजेंद्र! अब तुम बाहर निकल जाओ! (परंतु) शंकर के इस प्रकार कहने पर भी वे भार्गवश्रेष्ठ शुक्राचार्य उनके उदर में विचरण करने लगे (भगवान् शंकरके उदर में) विचरण करते हुए शुक्राचार्य ने शंकर के ही उदर में चराचर प्राणियों से व्याप्त सारा जगत्, समुद्र एवं पातालों को देखा। आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, विश्वे देवों, गणों, यक्षों, किम्पुरुषों, गन्धर्वों, अप्सराओं, मुनियों, मनुष्यों, साध्यों, पशुओं, कीटों, पिपीलिकाओं, वृक्षों, गुल्मों, पर्वतों, लताओं, फलों, मूलों, औषधियों, स्थल पर रहनेवालों, जल में रहनेवालों, अनिमिषों, निमिषों, चतुष्पद, द्विपदों, स्थावरों, जङ्गों, अव्यक्तों, व्यक्तों, सगुणों एवं निर्गुणोंको देखते हुए कुतूहलवश (उसी उदरमें ही) भार्गव चारों ओर घूमने लगे। भृगुवंशी शुक्राचार्य वहाँ इस प्रकार रहते हुए एक दिव्य वर्ष बीत गया। परंतु ब्रह्मन! शुक्र को अन्त नहीं मिला और वे थक गये। स्वयं को थका हुआ देखकर और बाहर निकलने का मार्ग न पाकर आत्मा को वश में करने वाले वे भक्ति से नम्र होकर महादेव की शरण में आ गये ॥
जिस किसी भी मनुष्य को लगता है कि भगवान ऊपर से देख रहे है ऐसा नहीं हम सब भगवान के अंदर ही है उन्हीं में मरते है उन्हीं में पैदा होते है उन्हीं में सब समाप्त हो जाते है ।आपके पाप पुण्य सब उन्हीं के अंदर करते हो और जिसे लगता है सब छुपा लेंगे ईश्वर सब जानते है और ये सब उन्हीं की माया है । ।।जय श्री कृष्णा।।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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