Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 23 अक्टूबर 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
*गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए। *गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
*गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । *इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु प्रारंभ
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 10:47 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 04:51 AM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से इन्द्राग्नि कहा जाता है। इंद्रदेव देवताओं के राजा हैं
⚜️ योग – आयुष्मान योग 04:59 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 09:30 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 10:46 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:22:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:43:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:45 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:11 ए एम से 06:27 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:58 पी एम से 02:43 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:43 पी एम से 06:09 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:43 पी एम से 07:00 पी एम
💧 अमृत काल : 06:57 पी एम से 08:45 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 24
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 04:51 ए एम, अक्टूबर 24 से 06:28 ए एम, अक्टूबर 24
❄️ रवि योग : 04:51 ए एम, अक्टूबर 24 से 06:28 ए एम, अक्टूबर 24
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ भाई दूज/ यमद्वितीया/ चन्द्र दर्शन/ सौर हेमंत ऋतु प्रारंभ/ राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व भारत के उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जन्म दिवस, राष्ट्रीय हॉरर फिल्म दिवस, प्रसिद्ध हास्य अभिनेता देवेन वर्मा जन्म दिवस, वीरांगना व स्वतंत्रता सेनानी झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई जयन्ती, श्रमिक नेता खंडू भाई देसाई जन्म दिवस, (परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक) सूबेदार जोगिन्दर सिंह स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस, मोल दिवस (Mole Day)
✍🏼 *तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की बालकनी को स्टोर बनाना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। बालकनी घर में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और अगर आप इसे स्टोर की तरह इस्तेमाल करते हैं तो दिक्कतों का सामना आपको जीवन में करना पड़ सकता है। इसकी वजह से नकारात्मक ऊर्जा आपके घर की ओर आकर्षित होती है और घर के हर सदस्य पर इसका बुरा असर देखने को मिलता है। इसकी वजह से घर के लोगों की सेहत और मानसिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
*खासकर अगर घर की बालकनी उत्तर दिशा, पूर्व दिशा या फिर उत्तर-पूर्व यानि ईशान कोण में है तो बालकनी को स्टोर बानने से आपके घर की बरकत रुक सकती है। इन दिशाओं को भारी सामान रखने के लिए सही नहीं माना जाता है। *घर की बालकनी को स्टोर बनाने पर घर के लोगों का आत्मविश्वास डगमगाता रहता है, असुरक्षा की भावना उनके मन में घर कर जाती है। इसलिए गलती से भी कभी घर की बालकनी को स्टोर बनाने की गलती आपको नहीं करनी चाहिए।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🚻 रात में पेशाब के लिए उठना — ये सावधानी ज़रूर बरतें!
*रात में नींद से उठते ही अचानक खड़े हो जाना — यह सबसे बड़ी गलती है। *नींद के दौरान मस्तिष्क की ओर जाने वाला रक्तप्रवाह धीमा हो जाता है।
*अचानक उठने से कुछ क्षण के लिए दिमाग को रक्त की आपूर्ति रुक जाती है —और इससे ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट अटैक तक आ सकता है। 🧠💔 🩸 क्या करना चाहिए: पेशाब की इच्छा महसूस होते ही पहले धीरे-धीरे बैठें। *अपने हाथों से हाथ और पैरों को हल्के से रगड़ें — इससे रक्तप्रवाह बढ़ता है।
*दोनों कानों के पीछे ऊपर-नीचे हल्के से मसाज करें — इससे मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह संतुलित होता है। *फिर धीरे-धीरे उठें और जाएं।
👉 *यह साधारण सी सावधानी ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम लगभग शून्य कर देती है। ❤️ *अंत में — आपकी ज़िंदगी आपके हाथ में है इंसान गलती करता है क्योंकि उसे उसके परिणाम का अंदाज़ा नहीं होता।
👉🏼 *यह जानकारी भले ही छोटी लगे, लेकिन यह जीवनरक्षक साबित हो सकती है। *इसलिए कृपया इसे अपने परिवार के हर सदस्य तक पहुँचाएँ —ताकि सभी लोग सुरक्षित और जागरूक रहें।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
हड़जोड़ खाने का तरीका हड़जोड़ खाने का तरीका निम्नलिखित होता है क्योंकि हड़जोड़ को एक औषधि के रूप में कई सारी बीमारियों के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसलिए हड़जोड़ खाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। हड़जोड़ को कौन-कौन सी बीमारी में किस तरह उपयोग में लाया जाता है विस्तार से बता रहे हैं।
*हड्डियों को जोड़ने के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका हड्डियों को जोड़ने के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका निम्नलिखित है क्योंकि हड़जोड़ हड्डियों को जोड़ने में बहुत लाभकारी होता है। हड्डियों को जोड़ने के लिए 10 से 15 मिली हड़जोड़ रस को घी में मिलाकर पीने से तथा इसमें अलसी का तेल मिलाकर टूटे हुए जगहों पर बांधने से हड्डियां जुड़ती हैं। तथा 2 से 5 ग्राम हड़जोड़ के चूर्ण को दूध के साथ पीलाने से भी हड्डियां जुड़ती हैं। *मोच का दर्द के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका मोच का दर्द दूर करने के लिए हड़जोड़ का घरेलु उपाय बहुत ही फायदेमंद होता है। मोच का दर्द के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका निम्नलिखित है इसके लिए हड़जोड़ के रस में तिल का तेल मिलाकर पका लें फिर उसे छानकर मोच वाली जगह पर लगाने से काफी आराम मिलता है।
*रीढ़ की हड्डी के दर्द से राहत पाने के लिए हड़जोड़ *रीढ़ की हड्डी के दर्द से राहत पाने के लिए हड़जोड़ के पत्तों को गर्म करके सिकाई करने से रीढ़ की हड्डियों में हो रहे दर्द से काफी राहत मिलती है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
नीले आकाश से ज्योति फूट पड़ी और चारों तरफ प्रकाश ही प्रकाश फैल गया। उसी प्रकाश में वामाचरण को माँ तारा के दर्शन हुए, कमर में बाघ की खाल पहने हुए!
*नील वर्णी, मंद मंद मुसकाती माँ तारा, वामाखेपा के सामने खड़ी थी… वामाखेपा उस भव्य और सुंदर देवी को देखकर खुशी से भर गए। माता ने उसके सर पर हाथ फेरा और वामाखेपा वही समाधिस्थ हो गए।
*3 दिन और 3 रात उसी समाधि की अवस्था में वे श्मशान में रहे। 3 दिन के बाद उन्हें होश आया और होश आते ही वह मां मां चिल्लाते हुए इधर उधर दौडने लगे। अब गांव वालों को पूरा यकीन हो गया कि बामा पूरा पागल हो गया है। बामा की यह स्थिति महीने भर रही *कुछ दिन बाद वहां की रानी जी को सपने में भगवती तारा ने दर्शन दिए और निर्देश दिया कि मसान के पास मेरे लिए मंदिर का निर्माण करो और बामा को पुजारी बनाओ। अगले दिन से मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया। कुछ ही दिनों में मंदिर बनकर तैयार हो गया और बामा को मंदिर का पुजारी बना दिया गया। बामा बेहद खुश हो गए क्योंकि उनकी बड़ी मां अब उनके साथ थी..
*रानी के द्वारा बनाया मंदिर अर्थात मोटे चढ़ावे की संभावना। अब ऐसे मंदिर में एक आधे पागल को पुजारी बनाना बहुत से पण्डों को रास नहीं आया। वे बामाखेपा को निपटाने का मार्ग खोजते रहते थे। बामाखेपा की हरकतें अजीब अजीब हुआ करती थी। कई बार वह दिन भर पूजा करता। कई बार दो तीन दिन तक पूजा ही नहीं करता। कभी देवी को माला पहनाता कभी खुद पहन लेता। इनमें से कोई भी क्रम पंडों के हिसाब से शास्त्रीय पूजन विधि से मैच नहीं खाता था। यह बात उनको खटक रही थी। *फिर एक दिन ऐसा हुआ कि प्रसाद बना और प्रसाद बनने के बाद जब मंदिर में पहुंचा तो देवी को भोग लगाने से पहले वामा चरण के मन में विचार आया, कि इसे चख कर देख लो कि यह माता के खाने के लायक है या नहीं। बस फिर क्या था। उन्होंने प्रसाद की थाली में हाथ डाला और चखने के लिए अपने मुंह में डाल लिया। चखने के बाद जब सही लगा तो बाकी प्रसाद उन्होंने माई को अर्पित कर दिया।
*इतना बड़ा अवसर पंडित कहाँ छोड़ते। उन्होंने बवाल मचा दिया कि, देवी के प्रसाद को बामा ने खा लिया है। उसे जूठा कर दिया है। जूठा प्रसाद देवी को चढ़ा दिया है। अब देवी रुष्ट हो जाएगी, उसका प्रकोप सारे गांव को झेलना पड़ेगा। उसके बाद भीड़तंत्र का बोलबाला हुआ और गांव वालों ने मिलकर पंडों के साथ बामाचरण की कस कर पिटाई कर दी। उसे श्मशान में ले जाकर फेंक दिया। *मंदिर पर पण्डों का कब्जा हो गया। उन्होंने शुद्धिकरण और तमाम प्रक्रियाएं की। उस दिन पूजन पण्डों के अनुसार संपन्न हुआ। उधर बामाखेपा को होश आया तो वह माई पर गुस्सा हो गया, मैंने गलत क्या किया जो तूने मुझे पिटवा दिया। तुझे देने से पहले खाना स्वादिष्ट है या नहीं देख रहा था। इसमें मेरी गलती क्या थी? मैं तो तुम्हें स्वादिष्ट भोग लगाने का प्रयास कर रहा था और चाहता था कि तुझे अच्छे स्वाद का प्रसाद ही मिले। अगर स्वाद गड़बड़ होता तो उसे फेककर दूसरा बनवाता। लेकिन तूने बेवजह मुझे पिटवाया जा मैं अब तेरे पास नही आऊंगा।
*मसान घाट पर बैठकर बामाचरण ने मां को सारी बातें सुना दी और वहां से उठकर चला गया जंगल की ओर। जंगल में जाकर एक गुफा में बैठ गया। यह स्थिति बिलकुल वैसे ही थी जैसे अपनी मां से रूठ कर बच्चे किसी कोने में जाकर छुप जाते हैं। बामाचरण और तारा माई के बीच में मां और बेटे जैसा रिश्ता था। यह रिश्ता बिल्कुल वैसा ही था जैसे एक अबोध शिशु और उसकी मां की बीच में होता है। *अपने शिशु की व्यथा तारा माई को सहन नहीं हुई। उसी रात रानी के स्वप्न में माई प्रकट हुई।
*क्रोधित माई ने रानी को फटकार लगाई, तेरे पण्डों ने मेरे पुत्र को बुरी तरह से मारा है। मैं तेरा मंदिर छोड़ कर जा रही हूं। अब तुझे और तेरे राज्य को मेरा प्रकोप सहना पड़ेगा, अगर उससे बचना चाहती है तो कल के कल मेरे पुत्र को वापस लाकर मंदिर में पूजा का भार सौंप, वरना प्रतिफल भुगतने के लिए तैयार रह। *एक तो तारा माई का रूप ऐसे ही भयानक है। क्रोधित अवस्था में तो सीधी सरल माता भी काली से कम नहीं दिखाई देती। क्रोधित माई का स्वरूप व्याख्या से परे था।
*रानी हड़बड़ा कर पलंग पर उठ बैठी। रानी के लिए रात बिताना भी मुश्किल हो गया। उसने सारी रात जागकर बिताई। *अगले दिन अपने सेवकों को दौड़ाया और मामले का पता लगाने के लिए कहा। जैसे ही पूरी जानकारी प्राप्त हुई रानी अपने लाव लश्कर के साथ मंदिर पहुंच गई। सारे पण्डों को कसकर फटकार लगाई और मंदिर में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया। अपने सेवकों को आदेश दिया कि जैसे भी हो बामाखेपा को ढूंढ कर लाओ।
*अब सारे सेवक चारों तरफ बामाखेपा की खोज में लग गए। एक सेवक को गुफा में बैठा हुआ बामाखेपा मिल गया। बड़ी मनोव्वल के बाद भी वह नहीं माना तो सेवक ने जाकर रानी को बात बताई। अंततः रानी खुद गुफा तक पहुंची। *बामा ने उनपर भी अपना गुस्सा उतारा, आप के कहने पर मैं पूजा कर रहा था और मुझे देखो इन लोगों ने कितना मारा!
*उनकी बाल सुलभ सहजता को देखकर रानी का नारी हृदय भी ममत्व से भर गया। उनकी समझ में आ गया कि तारा माई का मातृत्व इस बामाखेपा के प्रति क्यों है। *उन्होंने फरमान जारी कर दिया, इस मंदिर का पुजारी बामाखेपा है। उसकी जैसी मर्जी हो जैसी विधि वह करना चाहे उस प्रकार से पूजा करने के लिए वह स्वतंत्र है। कोई भी उसके मार्ग में आएगा तो दंड का भागी होगा। यह मंदिर बामाखेपा का है और तारा माई भी बामाखेपा की है। वह जिस विधान को सही समझे, उस विधान से पूजा करेगा और वही विधान यहां पर सही माना जाएगा।
*बामाखेपा को तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई। मां और बेटे का मिलन हो चुका था। मंदिर व्यवस्था फिर से बामाखेपा के हिसाब से चलने लगी। *ऐसा माना जाता है कि तारा माई खुद बामाखेपा के हाथ से प्रसाद ग्रहण करती थी। ऐसे अद्भुत ढंग से बामाखेपा तारा माई के पूजन करते जिसका कोई नियम नहीं था। कभी सुबह 4 बजे पूजा चल रही है तो कभी दोपहर 12 बजे तक पूजा प्रारंभ नहीं होती। कभी रात भर पूजा चल रही है तो कभी पूरे दिन भर मंदिर की ओर बामाखेपा के दर्शन ही नहीं होते थे। उनकी पूजन विधि लोगों को पसंद नहीं थी, लेकिन उनके पास कोई उपाय नहीं था, क्योंकि रानी का फरमान था। बामाखेपा अपनी मस्ती में जीते थे और लोग उन्हें नीचा दिखाने का रास्ता खोजते।
*एक दिन बामाखेपा की मां का निधन हो गया। नदी में बाढ़ थी। नदी के उस पार गांव था। बामा जिद पर अड़ गए छोटी मां का दाह संस्कार बड़ी मां के पास वाले श्मशान में किया जाएगा। गांव वाले बाढ़ वाली नदी को पार करने में जान का खतरा है यह जानते थे, लेकिन बामा को समझाना किसी के बस की बात नहीं। *नाव वाले से बाबा ने देह को नदी के पार पहुंचाने की बात की। नाव वाले ने साफ इंकार कर दिया। बाबा ने नाव देने के लिए कहा। नाव वाला हाथ जोड़कर बोला, “बाबा यही मेरे जीवन का सहारा है अगर बाढ़ में यह बह गया तो मैं घर कैसे चलाउँगा?”
*बामा के चेहरे में रहस्यमई मुस्कान बिखर गई। जैसे उन्होंने कोई निर्णय ले लिया हो। उन्होंने अपनी माता के शव को उठाया और खुद नदी पर चलते हुए इस पार पहुंच गए। गांव वाले आंखें फाड़े उस दृश्य को देखते रह गए। बामा की इच्छा के अनुसार ही उन्होंने माई के मंदिर के पास वाले श्मशान में अपनी मां का दाह संस्कार संपन्न किया। *मृत्यु भोज के लिए आसपास के सारे गांव में जितने लोग हैं, सभी को निमंत्रित करने के लिए बामाखेपा ने अपने घर के लोगों और आसपास के लोगों को कहा। सब इसे बामाखेपा का पागलपन समझकर शांत रहें। जिसके पास दो वक्त की रोटी का पता नहीं वह आसपास के 20 गांव को खाना कैसे खिलाएंगा यह उनके लिए कल्पना से भी परे की बात थी।
*जब कोई भी निमंत्रण देने जाने को तैयार नहीं हुआ तो बामाखेपा अकेले निकल पड़े। उन्होंने आसपास के 20 गांवों में हर किसी को मृत्यु भोज के लिए आमंत्रित कर लिया। सारे गांव वाले यह देखने के लिए तारापीठ पहुंचने लगे कि देखा जाए यह पगला किस प्रकार से इतने सारे लोगों को मृत्यु भोज कराता है। *गांव वालों की आंखें उस समय फटी की फटी रह गई जब सुबह से बैल गाड़ियों में भर भर कर अनाज सब्जी आदि तारापीठ की तरफ आने लगी। बैल गाड़ियों का पूरा एक काफिला मंदिर के पास पहुंच गया। अनाज और सब्जियों का ढेर लग गया। जो लोग आए थे उन्होंने खाना बनाना भी प्रारंभ कर दिया। दोपहर होते होते सुस्वादु भोजन की गंध से पूरा इलाका महक रहा था।
*प्रकृति भी अपना परीक्षण कब छोड़ती है, आसमान में बादल छाने लगे। प्रकृति ने भी उग्र रूप धारण कर लिया। बिजली कड़कने लगी। हवाएं चलने लगी और जोरदार बारिश के आसार नजर आने लगे। बामाखेपा अपनी जगह से उठे और जिस जगह पर श्राद्ध भोज होना था, उस पूरे जगह को बांस के डंडे से एक घेरा बनाकर घेर दिया। घनघोर बारिश चालू हो गई लेकिन घेरे के अंदर एक बूंद पानी भी नहीं गिरी। गांव वाले देख सकते थे कि वे जहां बैठकर भोजन कर रहे हैं वह पूरा हिस्सा सूखा हुआ है, और उस घेरे के बाहर पानी की मोटी मोटी बूंदें बरस रही है। जमीन से जल धाराएं बह रही हैं। वह पूरा इलाका जिसमें भोज का आयोजन था, पूरी तरह से सूखा हुआ था। 20 गांव से आए हुए सभी लोगों ने छक कर भोजन किया। हर कोई तृप्त हो गया। *अब बारी थी वापस अपने अपने गांव जाने की। घनघोर बारिश को देखते हुए वापस जाने के लिए दिक्कत आएगी यह सोचकर सभी चिंतित थे।
*बामाखेपा ने माई के सामने अपना अनुरोध पेश किया और कुछ ही क्षणों में आसमान पूरी तरह से साफ हो गया और धूप खिल गई। सारे लोग बड़ी सहजता से अपने अपने गांव तक पहुंच गए। *इस घटना के बाद बामाखेपा की अलौकिकता के बारे में लोगों को पता लगा। धीरे धीरे लोगों की भीड़ बामाखेपा की तारा पीठ में बढ़ने लगी। कोई बीमार आता तो बामाखेपा उस पर हाथ फेर देते तो वह स्वस्थ हो जाता था। निसंतानों को संतान की प्राप्ति हो जाती और सभी आगंतुकों की इच्छा और मनोकामना तारापीठ में पूरी होने लगी।
*_बामाखेपा कभी भी बिना चखे माई को भोजन नहीं कराते थे। माई स्वयं अपने हाथ से उनको भोजन खिलाती थी और उनके हाथों से भोजन ग्रहण करती थी। ऐसे अद्भुत महामानव बामाखेपा अपने अंत समय में माई की प्रतिमा में लीन हो गए!
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।



