वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित

सिलवानी । वंदे मातरम्” राष्ट्र की आत्मा का गान है, जो राष्ट्रीय चेतना का सशक्त आधार है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सिलवानी में “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर भैया-बहनों के लिए प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि शासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापक लक्ष्मीकांत नेमा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “वंदे मातरम्” गीत भारत की संस्कृति, त्याग और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस गीत की रचना 1875-76 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों को अदम्य उत्साह और ऊर्जा प्रदान की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रगीत के रचयिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह गीत आज भी समाज को एकता, समर्पण और राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत करने की क्षमता रखता है। उन्होंने आवाहन किया कि प्रत्येक नागरिक “वंदे मातरम्” की भावना से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए।
विद्यालय के प्राचार्य मयंक लाहोरी, आचार्यगण तथा छात्र-छात्राएँ कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत रहा।



