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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 28 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 28 दिसम्बर 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण प्रारम्भ
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु प्रारम्भ
⛈️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार पौष माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 11:59 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 08:43 AM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है, और इसके देवता अहिर्बुध्न्य जो (समुद्र से जुड़ा एक जीव) हैं,
⚜️ योग – वरीयान योग 10:13 AM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : बव – 11:59 ए एम तक
द्वितीय करण : बालव – 11:10 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:50:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:18 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:43 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:06 पी एम से 02:47 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:30 पी एम से 05:58 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:33 पी एम से 06:55 पी एम
💧 अमृत काल : 05:23 ए एम, दिसम्बर 29 से 06:55 ए एम, दिसम्बर 29
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:50 ए एम, दिसम्बर 29
☀️सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:13 ए एम से 08:43 ए एम
❄️ रवि योग : 08:43 ए एम से 06:37 ए एम, दिसम्बर 29
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ शाकम्भरी उत्सवारम्भ/ मासिक दुर्गाष्टमी/ शाकंभरी देवी नवरात्रोत्सवारंभ/ जोर मेला (पंजाब) समाप्ति्/ पंचक जारी/ पवित्र निर्दोष दिवस, प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति और परोपकारी रतन टाटा जन्म दिवस, गजानन त्र्यंबक मडखोलकर जन्म दिवस, धीरजलाल हीराचंद अंबानी जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ अरुण जेटली जयन्ती, उद्योगपति धीरूभाई अंबानी जन्म दिवस, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी स्थापना दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट दिवस, राष्ट्रीय डाउनलोड दिवस, राष्ट्रीय लघु फिल्म दिवस, निष्ठा शपथ दिवस, पहली बोलती फिल्म प्रदर्शित दिवस, वैज्ञानिक आर्थर एडिंगटन जन्म दिवस, राजस्थान के मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री स्मृति दिवस, केन्द्रीय आरक्षी पुलिस दिवस, भारतीय विदेश मंत्री ए.के. एंथोनी जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु संबंधी समस्या है तो उसे दूर करने को लिए आज ही 50 ग्राम फिटकरी का टुकड़ा लेकर उसे घर या ऑफिस के हर कमरे या कोने में रख दें। इससे विभिन्न वास्तु संबंधी समस्याओं से होने वाली परेशानियों में कमी आएगी। साथ ही सुख-शांति के साथ धन-संपदा में भी वृद्धि होगी।
*बुरे सपने दूर करने के लिए अगर आपको बुरे सपने आते हैं तो इससे छुटकारा पाने के लिए फिटकरी का ये उपाय करें। सोने से पहले काले कपड़े में फिटकरी बांधकर सिरहाने पर तकिये के नीचे रखें तो बुरे सपने नहीं आते हैं। अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है । इस उपाय को करने से आसपास फैली सभी नकरात्मक ऊर्जा से भी छुटकारा मिलता है। *व्यापार में मुनाफा के लिए अपने व्यापार को बुरी नजर से बचाने और मुनाफा के लिए फिटकरी को काले में बांधकर घर या दुकान के मुख्य द्वार पर लटका दें। इस उपाय को करने से व्यापार में दिन दुगुनी रात चौगनी वृद्धि होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जिनको शराब की लत गयी हो और शराब नहीं छूटती हो वे अपनी जेब में 3 – 4 बार धोयी हुई थोड़ी किशमिश रखा करें | शराब पीने की इच्छा हो तब 10-12 ग्राम किशमिश के दाने लें और एक-एक दाना मूँह में डालकर चबाते हुए उसका रस चूसते जायें | यदि आप घर में हों तो किशमिश का शरबत बना के भी पी सकते हैं | इससे दिमाग को ताकत मिलेगी और धीरे-धीरे शराब छोड़ने की क्षमता आ जायेगी | शराब पीने से जो ज्ञानतंतु कमजोर हो गये हैं, नसें कमजोर हो गयी हैं वे किशमिश के सेवन से बलवान हो जायेंगी और आप उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करेंगे | इस प्रयोग के साथ इस मंत्र का जप करना भी लाभदायक है, जो शराब से विरक्ति दिलाता है : ॐ ह्रीं यं यश्वरायै नम: |
(इसके साथ आश्रम से प्रकाशित ‘नशे से सावधान’ सत्साहित्य का पठन करना विशेष लाभदायी है )
दूसरे किसीको लत लगी हो तो ….जब शराबी निद्रा में हो तब उसके कुटुम्बी उपरोक्त मंत्र को मन में जपें और उसके श्वासोच्छवास के आगे खड़े होकर भावना करें : ‘आप शराब छोड़ दो, आप शराब छोड़ दो….’ इससे भी शराबी की शराब छूटेगी |
🧇 आरोग्य संजीवनी 🌮
क्या करें
भोजन पचने में हलका व कम मात्रा में लें | जौ की रोटी या दलिया, ज्वार, कुलथी, सहजन, मेथी, करेला, पुनर्नवा, परवल, बथुआ, सोआ, कोमल बैंगन, लहसुन, अदरक, सोंठ, हींग, अजवायन, अरंडी का तेल आदि का सेवन हितकर है | गोमूत्र अथवा पानी मिलाकर गोमूत्र अर्क लेना लाभदायी है | पीने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करें |
*_100 मि.ली, पानी में 2 ग्राम सोंठ मिलाकर उसे इतना उबालें कि पानी केवल आधा शेष रहे | फिर इसे छानकर 15 से 30 मि.ली. अरंडी का तेल मिला के सूर्योदय के बाद पियें | यह प्रयोग हफ्ते में 2-3 बार करें |
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गठिया में उपवास अत्यंत हितकर है | सप्ताह में अथवा 15 दिन में एक दिन उपवास रखें | उस दिन केवल गुनगुना पानी पियें |
प्रतिदिन प्राणायाम करें |
स्पेशल मालिश तेल को गुनगुना करके उससे प्रभावित अंगों की मालिश करें | उसके बाद उन्हें 15-20 मिनट धूप से सेंक लें | फिर कम्बल से ढककर 15-20 मिनट धूप से सेंकें |
📗 गुरु भक्ति योग
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महान आत्माएँ धरती पर आना चाहती हैं लेकिन उसके लिए संयमी पति-पत्नी की आवश्यकता होती है | अत: उत्तम संतान की इच्छावाले दम्पति गर्भाधान से पहले अधिक-से-अधिक ब्रह्मचर्य का पालन करें व गुरुमंत्र का जप करें | अनुष्ठान करके उत्तम संतान हेतु सद्गुरु या इष्टदेव से प्रार्थना करें, फिर गर्भाधान करें |
*वर्तमान समय में 27 दिसम्बर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक का समय तो गर्भाधान के लिए अतिशय उत्तम है | *गर्भाधान के लिए अनुचित काल पूर्णिमा, अमावस्या, प्रतिपदा, अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण, पर्व या त्यौहार की रात्रि ( जन्माष्टमी, श्रीराम नवमी, होली, दिवाली, शिवरात्रि, नवरात्रि आदि ), श्राद्ध के दिन, प्रदोषकाल ( सूर्यास्त का समय, सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे बाद तक का समय ), क्षयतिथि, एवं मासिक धर्म के प्रथम 5 दिन, माता-पिता की मृत्युतिथि, स्वयं की जन्मतिथि, संध्या के समय एवं दिन में समागम या गर्भाधान करना भयंकर हानिकारक है | दिन के गर्भाधान से उत्पन्न संतान दुराचारी और अधम होती है |
*शास्त्रवर्णित मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, नहीं तो आसुरी, कुसंस्कारी या विकलांग संतान पैदा होती है | संतान नहीं भी हुई तो भी दम्पति को कोई खतरनाक बिमारी हो जाती है | *गर्भाधान के पूर्व विशेष सावधानी अपने शरीर व घर में धनात्मक ऊर्जा आये इसका तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए | महिलाओं को मासिक धर्म में भोजन नहीं बनाना चाहिए तथा अपने हाथ का भोजन परिवारवालों को देकर उनका ओज, बल और बुद्धि क्षीण करने की गलती कदापि नही करनी चाहिए |
*गर्भाधान घर के शयनकक्ष में ही हो, होटलों आदि ऐसी-वैसी जगहों पर न हो | ध्यान दें : उत्तम समय के अलावा के समय में भी यदि गर्भाधान हो गया हो तो गर्भपात न करायें बल्कि गर्भस्थ शिशु में आदरपूर्वक उत्तम संस्कारों का सिंचन करें | गर्भपात महापाप है | ═══════◄••❀••►════════ ⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।। *मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

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