ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 17 मई 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 17 मई 2026_
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *
रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_

🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 09:41 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र कृत्तिका 02:32 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य है। कृतिका नक्षत्र के मुख्य अधिष्ठाता देवता अग्नि (अग्निदेव) हैं, जिसके कारण इसके राशि के स्वामी मंगल और शुक्र बनते हैं, लेकिन मूल नक्षत्र स्वामी सूर्य ही है।
⚜️ योग – शोभन योग 06:15 AM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग 01:59 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
प्रथम करण : किस्तुघन 11:36 AM तक
द्वितीय करण : बव 09:41 PM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:28:34
🌅 सूर्यास्तः – सायं 19:06:05
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः काल 04:06 ए एम से 04:48 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या – प्रातः काल 04:27 ए एम से 05:29 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – सुबह 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त – दोपहर 02:34 पी एम से 03:28 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – सायं काल 07:05 पी एम से 07:26 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या – सायं काल 07:06 पी एम से 08:08 पी एम
💧 अमृत काल – दोपहर 12:26 पी एम से 01:50 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – रात्रि काल 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 18
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम/ मल/ ज्येष्ठ अधिक मास प्रारम्भ/ इष्टि/ अधिक चन्द्र दर्शन/ आडल योग/ गंगा दशहरा प्रारम्भ/ करिदिवस/ श्रीकृष्ण भक्त सूरदास जयन्ती, राष्ट्रीय संविधान दिवस, नॉर्वे का राष्ट्रीय दिवस, विश्व उच्च रक्तचाप दिवस, भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर जन्म दिवस, विश्व दूरसंचार दिवस, सौतेली माँ दिवस, आपातकालीन चिकित्सा सेवा दिवस, प्रसिद्ध भारतीय पार्श्वगायक पंकज उधास जन्म दिवस, अभिनेत्री प्रीति गांगुली जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर भागवत चंद्रशेखर जन्म दिवस, राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
मुख्य द्वार पर ‘स्वास्तिक’ और ‘ॐ’: घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर से स्वास्तिक या ॐ का चिन्ह बनाएं। यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है और शुभता लाता है।
*ईशान कोण को रखें खाली: घर के उत्तर-पूर्वी कोने को देवताओं का स्थान माना जाता है। यहां कभी भी भारी सामान या कबाड़ न रखें। इस जगह को हमेशा साफ-सुथरा और खुला रखें। *नमक के पानी का पोंछा: हफ्ते में कम से कम दो बार पानी में थोड़ा समुद्री नमक (Sea Salt) मिलाकर पोंछा लगाएं। यह घर की नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है और सकारात्मकता बढ़ाता है।
*शाम को जलाएं कपूर:रोजाना शाम के समय घर में कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर के सूक्ष्म वास्तु दोष दूर होते हैं और वातावरण शुद्ध होता है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ नीम की पत्तियाँ आपके स्वास्थ्य के लिए कई तरह के फायदे प्रदान कर सकती हैं। *इनमें विषाक्तिकर गुण होते हैं जो स्किन स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, रक्तशुद्धि करते हैं, और आंतरिक संतुलन को सुधार सकते हैं। नीम की पत्तियों को कच्चे रूप में या नीम के तेल के रूप में सेवन किया जा सकता है। हालांकि, इससे पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना सुरक्षित हो सकता है।
*नीम की पत्तियों का सेवन आमतौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग होता है। इसमें विभिन्न गुण हो सकते हैं जो आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे कि शारीरिक संरचना को साफ रखना और कई सारे और विषैले तत्वों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना। हालांकि, इसका सेवन किसी भी रोग की उपचार या बीमारी से बचाव के रूप में नहीं होना चाहिए, 🥂 आरोग्य संजीवनी 🍻
मोतियाबिंद में पलाश का उपयोग पलाश के फूलों का उपयोग मोतियाबिंद के इलाज के लिए भी किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में वैद्य इसका इस्तेमाल मोतियाबिंद के इलाज में करते हैं। पलाश के फूलों का रस और बीज के पेस्ट को मिलाकर आंखों में काजल की तरह से लगाने से मोतियाबिंद की समस्या में फायदा मिलता है।
*
पेट के कीड़ों के लिए पलाश का उपयोग पलाश के फूलो का उपयोग पेट के कीड़ों को दूर करने के लिए किया जाता है। पलाश के फूलों में कीटाणुरोधी गुण होते हैं जो पेट के कीड़ों को दूर करने में फायदेमंद होते हैं। इनका आयुर्वेदिक तरीके से सेवन पेट की अन्य समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद में पलाश के फूलों का प्रयोग कर पेट की तमाम बीमारियों के लिए औषधि तैयार की जाती है।
*डायबिटीज में पलाश के फूलों का उपयोग डॉयबिटीज़ जैसी समस्या में भी पलाश के फूल बेहद लाभकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद में डायबिटीज के लिए पलाश के फूलों के सेवन के कई तरीके बताये गए हैं। पलाश के फूलों में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता होती है जो डायबिटीज के रोगियों को इस बीमारी से लड़ने में मदद करता है। डायबिटीज के रोगियों के लिए पलाश के फूलों का रस बेहद फायदेमंद होता है। पलाश के साफ फूल को एक कप पानी में पूरी रात भिगाकर रखें उसके बाद फूल का पानी कप में निचोड़कर पीने से फायदा होता है। आयुर्वेद में 45 दिन तक इसका सेवन किया जाता है। मूत्र रोग में पलाश के फूलों का उपयोग पलाश के फूलों का उपयोग मूत्र संबंधी रोगों में भी किया जाता है। आयुर्वेद में इसे मूत्रवर्धक माना जाता है, पलाश के फूलों का रस पेशाब की वृद्धि, मूत्राशय की सूजन और अन्य मूत्र रोगों में फायदेमंद होता है। इसके फूलों का रस निकालकर उसे छान लें, अब इसके आधा कप रस का नियमित सेवन मूत्र से जुड़ी समस्याओं के लिए कर सकते हैं। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती आकाश मार्ग से विहार कर रहे थे। उन्होंने देखा कि एक नवजात शिशु (राक्षस सुकेश) लावारिस पड़ा रो रहा है। माता पार्वती के ममतामयी स्वभाव के कारण उन्होंने शिव जी से उस बालक की रक्षा का आग्रह किया।
*
भगवान शिव ने उस बालक को ‘अमरत्व’ जैसा बल दिया और माता पार्वती ने उसे यह वरदान दिया कि राक्षस कुल का जो भी बालक जन्म लेगा, वह तुरंत अपनी माता की आयु के बराबर बड़ा और शक्तिशाली हो जाएगा। इस वरदान के कारण राक्षसों की संख्या और शक्ति बहुत तेजी से बढ़ने लगी थी।
*जब हनुमान जी ने लंका में सीता माता का पता लगा लिया और लंका दहन कर दिया, तब उन्हें माता पार्वती के उस प्राचीन वरदान का स्मरण हुआ। उन्होंने सोचा: यदि रावण की सेना के योद्धा मारे भी गए, तो राक्षस स्त्रियाँ तुरंत नए शक्तिशाली योद्धाओं को जन्म दे देंगी। वरदान के प्रभाव से वे बच्चे तुरंत युद्ध के योग्य बड़े हो जाएंगे। इससे प्रभु श्री राम को एक अंतहीन युद्ध लड़ना पड़ेगा।
इस भविष्य के संकट को रोकने के लिए हनुमान जी ने लंका से लौटते समय समुद्र के ऊपर से गुजरते हुए अपनी पूरी शक्ति से भयंकर गर्जना की।
रामचरितमानस के सुंदरकांड में तुलसीदास जी लिखते हैं:
*
“चलत महाधुनि गर्जेसि भारी। गर्भ स्रवहिं सुनि निसिचर नारी॥”* *इसका अर्थ है: हनुमान जी की वह गर्जना इतनी तीव्र और भयावह थी कि उसकी कंपन और भय से लंका की समस्त गर्भवती राक्षसियों के गर्भ गिर गए। इस प्रकार हनुमान जी ने युद्ध शुरू होने से पहले ही राक्षसों की आने वाली अगली पीढ़ी को समाप्त कर दिया, ताकि प्रभु श्री राम को विजय प्राप्त करने में कोई अतिरिक्त बाधा न आए।
*_यह प्रसंग सिखाता है कि एक सच्चा भक्त वही है जो न केवल वर्तमान की बाधाओं को दूर करे, बल्कि अपने स्वामी के आने वाले संकटों को भी अपनी बुद्धि से पहले ही समाप्त कर दे। हनुमान जी की इसी कुशलता के कारण उन्हें ‘बुद्धिमतां वरिष्ठम्’ (बुद्धिमानों में श्रेष्ठ) कहा जाता है।
─━━━━━━━⊱✿⊰━━━━━━━─
⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।

Related Articles

Back to top button