
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• *जय श्री हरि* •••✦
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*रविवार 24 मई 2026*
*_भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।_*
🌠 *_रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*_इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
*_रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*_रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन – उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – अधिमास ज्यैष्ठ मास_*
🌓 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष_*
📆 *_तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 04:31 AM तक उपरांत दशमी_*
✏️ *_तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 02:50 AM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र हैं। तथा जिसके राशि स्वामी सूर्य हैं, आराध्य देवता: इसके देवता भग हैं, जो भाग्य और ऐश्वर्य के देवता माने जाते हैं।_*
⚜️ *_योग – हर्षण योग 03:44 AM तक, उसके बाद वज्र योग_*
⚡ *_प्रथम करण : बालव 04:24 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : कौलव 04:31 AM तक, बाद तैतिल_*
🔥 *_गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम_*
🤖 *_राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।_*
⚜️ *_दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:25:16_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:10:15_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:04 ए एम से 04:45 ए एम_*
🌇 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:24 ए एम से 05:26 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:51 ए एम से 12:46 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:35 पी एम से 03:30 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:09 पी एम से 07:29 पी एम_*
🌃 *_सायाह्न सन्ध्या : संध्या काल 07:10 पी एम से 08:12 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : रात्रि काल 08:16 पी एम से 09:54 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 25_*
⭐ *_सर्वार्थ सिद्धि योग : रात्रि काल 02:51 ए एम, मई 25 से 05:26 ए एम, मई 25_*
❄️ *_रवि योग : पूरे दिन_*
🚓 *_यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।_*
💁🏻♀️ *_आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।_*
🌳 *_वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 9वाँ दिन/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया जन्म दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार राजेश रोशन जन्म दिवस, विश्व मारख़ोर दिवस, ब्रदर्स डे, भ्राता दिवस, भारतीय विदेश सचिव’ रंजन मथाई जन्म दिवस, प्रसिद्ध क्रान्तिकारी करतार सिंह सराभा जयन्ती, विश्व तपेदिक दिवस, अंतरराष्ट्रीय ख्याति के जादूगर रघुवीर भोपाल जन्म दिवस, राष्ट्रमंडल दिवस (Commonwealth Day)
✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
✈️ *_Vastu tips_* 🗽
घर में आती है नकारात्मकता बाथरूम ऐसी जगह होती है जहां नकारात्मक ऊर्जा जल्दी बनती है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार खाली बाल्टी इस नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। इसका असर से लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव और छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ सकते हैं।
*_ग्रहों के संतुलन पर असर वहीं, ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो इसमें पानी का संबंध चंद्रमा से और सफाई का संबंध शनि देव से माना गया है। अगर बाथरूम गंदा हो या बाल्टी खाली रखी जाए, तो इससे इन दोनों ग्रहों का संतुलन बिगड़ सकता है। मान्यता है कि इसकी वजह से बनते काम रुकने लगते हैं और व्यक्ति को भाग्य का साथ कम मिलने लगता है।
*_साफ-सुथरा बाथरूम मनोविज्ञान के अनुसार साफ और व्यवस्थित जगह मन को सुकून देती है। भरी हुई बाल्टी इस बात का संकेत मानी जाती है कि व्यक्ति अपने संसाधनों को सही तरीके से संभाल रहा है। वहीं, बिखरा हुआ बाथरूम और खाली बाल्टी लापरवाही और अव्यवस्था को दर्शाते हैं।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*पारंपरिक औषधीय उपयोग_*
अतिसार (दस्त) और पेचिश छाल (bark) का काढ़ा दस्त और पेचिश में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। इसके कसैले गुण आंतों को संकुचित करने में सहायक माने जाते हैं।_*
रक्तस्राव संबंधी समस्याएं आयुर्वेद में नाक से खून आना, मसूड़ों से रक्तस्राव तथा कुछ अन्य रक्तस्रावी स्थितियों में इसका उपयोग वर्णित है।_*
घाव भरने में छाल या लेटेक्स (दूध) का बाहरी उपयोग कुछ पारंपरिक उपचारों में घाव और त्वचा की चोटों पर किया जाता है।_*
मधुमेह (डायबिटीज) लोक चिकित्सा में इसकी छाल और फल का उपयोग रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए किया जाता रहा है। हालांकि इसे मधुमेह की दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।_*
मूत्र संबंधी समस्याएं कुछ पारंपरिक प्रणालियों में मूत्र की जलन और अन्य मूत्र विकारों में उपयोग बताया गया है।_*
महिलाओं के स्वास्थ्य में श्वेत प्रदर (leucorrhoea) और कुछ स्त्री रोग संबंधी स्थितियों में पारंपरिक रूप से इसका प्रयोग मिलता है।_*
त्वचा रोग फोड़े-फुंसियों और कुछ त्वचा समस्याओं में बाहरी प्रयोग का उल्लेख मिलता है।
🍶 *आरोग्य संजीवनी* 🍯
गुडूची- गुडूची को गिलोय के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में गिलोय को अमृता भी कहा गया है। गिलोय के बारे में कहा जाता है कि इसकी बेल जिस पेड़ पर चढ़ती है उसके गुण भी अपने अन्दर समाहित कर लेती है। आयुर्वेद में नीम के पेड़ पर चढी हुए गिलोय को सर्वोत्तम बताया गया है।
*_लहसुन- आयुर्वेद में लहसुन को अमृत तुल्य बताया गया है। लहसुन की भूरी भूरी प्रशंसा की गयी है। लशति खण्डयति रोगान अर्थात लहसुन अनेक रोगों का नाश करता है।
*_जायफल- इसके लिए कहा जाता है कि यह वेदनाहर है। जब तेल में इसे पकाते हैं और उस तेल से मालिश की जाये तो यह दर्द हर लेती है।
*_तो इतने गुणकारी चीजों के साथ बनाया गया यह तेल भी बहुत कारगर होता है।
*_सरसों के तेल में सूखी गुडूची /गिलोय की लकड़ी डालें और लहसुन और जायफल को कूट कर तेल में डालें। तेल को मध्यम धीमी आँच पर अच्छे से पकाना है। जब तेल पकता है तो इससे तेज महक उठती है जो अप्रिय लग सकती है। तेल को काफी पकाया जाया है जिससे सभी सामग्री का सत तेल में आ जाये।
*_तेल के पक जाने पर इसे ठंडा करके छान लें और बोतल में भरकर रख लें।
*_यह तेल दर्द निवारक होता है। मम्मी इस तेल की बहुत तारीफ करती हैं। मम्मी के कहने पर कुछ और लोगों ने और मेरी सासू माँ ने भी इसे बनाया और मम्मी जी और पापा जी को भी इससे आराम मिला है।
👉🏼 *_आप चाहें तो इस विधि को आजमा सकते हैं।
📚 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
शनि महादशा 19 वर्ष की सबसे लंबी दशा है, इन वर्षों में कर्म और धैर्य की किस प्रकार परीक्षा होती है?
19 वर्षों का कर्म परीक्षण है-शनि महादशाअहंकार का क्षय और एकांत का रहस्य जवान और ख़ूबसूरती के अहंकार में तनी तनी घूम रही जनी यानी महिलाओं को शनि भरी कष्ट देते हैं धानी पुरुष पहले से ही शनि से भयभीत रहते हैं। बच्चों का शनि कभी अनिष्ट नहीं करता। ख़ास और दुर्लभ बात यह है कि जिनके माता पिता जीवित हैं शनि उन्हें कभी हानि पहुँचाते ।
सबसे फ़नी बात ये है कि शनि की जिससे बनी वह घनी आबादी छोड़कर एकान्त में रहना पसंद करता है।_*
स्कंध पुराण अनुसार शनि की शांति और दिव्य कृपा पाने के लिए Honey यानि शहद राहुकाल में शिवलिंग पर अर्पित करने से अनिष्ट नहीं होता।_*
*_ज्योतिष में शनि महादशा को जीवन का सबसे कठोर लेकिन सबसे न्यायप्रिय काल माना गया है। यह अवधि मनुष्य को भीतर से बदल देती है।
*_शनि धीरे चलते हैं, इसलिए उनकी महादशा भी लंबी होती है और इस दौरान व्यक्ति के धैर्य, कर्म, संबंध, अहंकार, प्रतिष्ठा और सहनशक्ति की परीक्षा होती है।
शनि क्यों करवाते हैं परीक्षा?_*
शास्त्रों में शनि को कर्मफलदाता कहा गया है।_*
वे दंड नहीं देते, बल्कि कर्मों का हिसाब करवाते हैं।_*
शनैः शनैः फलदाता च! अर्थात शनि धीरे-धीरे कर्मों का फल देते हैं।_*
19 = 12 + 7- ज्योतिषीय रहस्य यह माना जाता है कि 12 भाव भौतिक जीवन और 7 आध्यात्मिक परिपक्वता का संकेत हैं, 12 साल तक कुंभाभिषेक होता है और 7 साल इंसान के सुर बदलने में लगते हैं, ताकि असुर प्रवृत्ति का नाश हो जाए। इसलिए 19 वर्ष की शनि महादशा व्यक्ति को संसार और आत्मा दोनों का अनुभव कराती है।
*_शनैः शनैः समायाति शनिर्नाम ग्रहाधिपः। अर्थात शनि धीरे-धीरे जीवन में प्रवेश कर मनुष्य के कर्मों का लेखा खोलते हैं। शनि का अर्थ ही है -शनैः शनैः!! संस्कृत में शनैः का अर्थ होता है -धीरे-धीरे।इसीलिए शनि धीरे चलते हैं। देर से फल देते हैं, लेकिन स्थायी परिणाम देते हैं।
*_क्या शनि बच्चों को कष्ट देते हैं? ज्योतिष में एक मान्यता है कि छोटे बच्चों पर शनि का दुष्प्रभाव उतना तीव्र नहीं माना जाता क्योंकि उनका कर्म-संचय सीमित होता है। इसलिए शनि अधिकतर परिपक्व अवस्था में कर्मफल सक्रिय करते हैं।
*_शनि महादशा की सच्चाई शनि छीनते कम हैं, सिखाते अधिक हैं। जो व्यक्ति अनुशासन, सेवा, संयम, श्रम और सत्य का मार्ग पकड़ लेता है, उसके लिए यही 19 वर्ष जीवन का सबसे महान निर्माणकाल बन जाते हैं। शनि देर से देते हैं, पर स्थायी देते हैं।
*_माता-पिता और शनि का गूढ़ संबंध लोकमान्यता और कई परंपरागत ज्योतिष मतों में कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, शनि उसका भारी अनिष्ट नहीं करते।
*_विशेषकर पिता को शनि और माता को चंद्र का कारक माना गया है। माता-पिता का सम्मान शनि दोष को काफी हद तक शांत करता है।
*_मातृदेवो भव। पितृदेवो भव। स्कंद पुराण में शिवोपासना को शनि शांति का श्रेष्ठ मार्ग बताया गया है। राहुकाल में शिवलिंग पर शहद अर्पित करना कई परंपराओं में शुभ माना गया है।
*_शनि महादशा में क्या-क्या होता है? अहंकार का टूटना-युवावस्था, सौंदर्य, धन, पद या संबंधों का अहंकार हो तो शनि उसे धीरे-धीरे तोड़ते हैं। कई लोग इस काल में अपमान, दूरी, असफल प्रेम या सामाजिक उपेक्षा का अनुभव करते हैं ताकि भीतर विनम्रता जागृत हो। विशेषतः जो व्यक्ति बाहरी आकर्षण और दिखावे में अधिक डूबा रहता है, शनि उसे वास्तविकता का दर्पण दिखाते हैं।
*_धैर्य की परीक्षा-शनि तुरंत फल नहीं देते। वे प्रतीक्षा करवाते हैं, संघर्ष करवाते हैं और व्यक्ति को मेहनत का वास्तविक अर्थ समझाते हैं।
*_धैर्यं सर्वत्र साधनम्। धैर्य ही हर सिद्धि का आधार है। एकांत प्रिय बना देते हैं- यह एक दुर्लभ अनुभव है कि जिनकी शनि से बनी होती है, वे भीड़, शोर और दिखावे से दूर होकर एकांत, मौन और सीमित लोगों में रहना पसंद करने लगते हैं।संघर्ष करवाते हैं और व्यक्ति को मेहनत का वास्तविक अर्थ समझाते हैं।
सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः।_*
मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनिः॥_*
*_शनि मंद गति वाले हैं, परंतु शिवप्रिय और अंततः पीड़ा हरने वाले भी हैं। शनि पहले अहंकार तोड़ते हैं, फिर वास्तविक शक्ति देते हैं।
*_शनि और एकांत का दुर्लभ रहस्य पुराने तांत्रिक मतों में कहा गया है कि शनि की कृपा होने पर व्यक्ति भीड़ से दूर रहने लगता है।कम बोलता है। रात, मौन और एकांत पसंद करता है। दिखावे से विरक्त हो जाता है। इसीलिए अनेक साधु, योगी और तपस्वियों की कुंडली में शनि प्रबल पाए जाते हैं।
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।


