ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 13 जून 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾          
*शनिवार 13 जून  2026*
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *_दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*_शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*_शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*_शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*_शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌒 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – शनिवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 04:08 PM तक उपरांत चतुर्दशी_*
✒️ *_तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी  हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र कृत्तिका 01:16 AM तक उपरांत रोहिणी_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – कृतिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं। इस नक्षत्र के प्रमुख देवता अग्नि हैं और इसके अलावा भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) का भी इस नक्षत्र से गहरा संबंध है।_*
⚜️ *_योग – सुकर्मा योग 05:28 PM तक, उसके बाद धृति योग_*
⚡ *_प्रथम करण : गर 05:55 AM तक, बाद वणिज 04:08 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : विष्टि 02:15 AM तक, बाद शकुनि_*
🔥 *_गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:21:48_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:18:18_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:43 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:22 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:53 ए एम से 12:49 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:41 पी एम से 03:37 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:18 पी एम से 07:39 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : सायं काल 07:20 पी एम से 08:20 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : रात्रि काल 11:09 पी एम से 12:34 ए एम, जून 14_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल12:01 ए एम, जून 14 से 12:41 ए एम, जून 14_*
⭐ *_सर्वार्थ सिद्धि योग : रात्रि काल 01:16 ए एम, जून 14 से 05:23 ए एम, जून 14_*
🌊 *_अमृत सिद्धि योग : रात्रि काल 01:16 ए एम, जून 14 से 05:23 ए एम, जून 14_*
🚓 *_यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 28वाँ दिन, मासिक कार्तिगाई/ अधिक मासिक शिवरात्रि/ भद्रा/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ क्रांतिकारी उधम सिंह शहादत दिवस, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयन्ती, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी गणेश दामोदर सावरकर जयन्ती, मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नंबूदरीपाद जन्म दिवस, राष्ट्रीय रोज़े दिवस, विश्व जिन दिवस, सार्वजनिक स्थानों पर बुनाई का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, गुड़िया दिवस, राष्ट्रीय कप केक प्रेमी दिवस, राष्ट्रीय कप केक प्रेमी दिवस, सिलाई मशीन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय एल्बिनिज़्म जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय लविंग रिलैशन दिवस, राष्ट्रीय दोषारोपण दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ पियूष गोयल जन्म दिवस, मशहूर गीतकार प्रेम धवन जन्म दिवस, ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित मेजर विवेक गुप्ता स्मृति दिवस, प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक मेहदी हसन स्मृति दिवस, अभिनेत्री दिशा पटानी जन्म दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।       
🏘️ *_Vastu tips_* 🏚️
ऐसी स्थिति का तुरंत करें निवारण अगर आपके घर के मुख्य द्वार के सामने गड्ढा, कीचड़ या पानी जमा रहता है, तो इसे जगह को पहली फुरसत में समतल करा ले, क्योंकि वास्तु में शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे घर में नकारात्मकता बढ़ती है और मानसिक तनाव का माहौल बना रहता है।
*_गंदे पानी का बहाव मुख्य द्वार के सामने गंदा पानी या खुली नाली का होना किसी भी घर की सुंदरता में ग्रहण लगा देता है। वास्तु के अनुसार, इसे आर्थिक नुकसान का संकेत माना जाता है। इससे धन का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं।
*_सामने न हो कुआं शहरी इलाकों में तो जगह की कमी के कारण कुएं देखना दुर्लभ सा हो गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई घरों में आज भी कुआं देखने को मिल जाता है। अगर घर के प्रवेश द्वार के ठीक सामने कुआं हो, तो इसे स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल माना जाता है। ऐसी स्थिति परिवार के सदस्यों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।      
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
कर्मफल दाता शनिदेव। शनिदेव आपको कर्मों का फल देते हैं आपके कुकर्मों पर उनकी दृष्टि टेढ़ी पड़ती है जबकि सद्कार्यों को वे कोमल दृष्टि से देखते हैं।
*_शनिदेव के कोप से बचने के लिए आपको केवल अच्छे कर्म करने चाहिए माता पिता की सेवा करनी चाहिए अपनी पत्नी को सम्मान देना चाहिए, बच्चों की परवरिश अच्छे ढंग से करनी चाहिए। किसी की मदद न भी कर सको तो किसीका बूरा नहीं करना चाहिए, केवल मजाक के लिए किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
*_आप अच्छे काम करते रहें शनिदेव की कृपा आपपर बनी रहेगी आपको कोई अन्य अनुष्ठान करने की आवश्यकता नहीं है। अगर कोई ग़लती हो गई है तो मंदिर जाकर आप शनिदेव से क्षमा याचना करने के बाद कुछ जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र आदी उपहार दे सकते हैं। बाकी पाखंड की कोई सीमा नहीं आप जहां जाएंगे वहीं से ज्ञानी निकल आएंगे लेकिन वे सिवाए भ्रमित करने और पैसा ऐंठने के अलावा आपको कुछ नहीं दे सकते।        
🍻 *आरोग्य संजीवनी* 🍺
गर्मी में सत्तू के शीतल गुण: भुने हुए चने या जौ से बना सत्तू शीतवीर्य होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर में ठंडक पहुँचाता है। चरक संहिता के अनुसार, गर्मियों में पित्त दोष की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे अम्लता, जलन, घबराहट, पसीना, और थकावट जैसी स्थितियाँ होती हैं। सत्तू का शरबत इस पित्त वृद्धि को शांत करता है। इसमें मृदु लघुता (हल्कापन) होने के कारण यह पचने में आसान होता है और दीपन (भूख बढ़ाने वाला) व पाचन गुण भी रखता है।_*
जलतृषा और लवण संतुलन: गर्मियों में अत्यधिक पसीना शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स (लवण) की कमी कर देता है। सत्तू में यदि थोड़ा सेंधा नमक, भुना जीरा और नींबू मिलाया जाए, तो यह एक आदर्श ओरल रिहाइड्रेशन (जल पुनर्संयोजन) पेय बन जाता है। यह तृष्णा (प्यास) को शांत करता है — जैसा कि चरक ने कहा है:_*
*_“शीतं लघु स्निग्धं तृष्णाशमनं…”_*
अर्थात ठंडे और लघु पेयों का सेवन तृष्णा को शांत करता है और शरीर में क्लेश (दाह-ज्वर) को मिटाता है।
*_बलवर्धन और भूख का नियंत्रण: सत्तू में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और रेशे (फाइबर) संतुलित मात्रा में होते हैं। यह बल्य (शक्ति देने वाला) होता है और दिनभर की थकान में ऊर्जा प्रदान करता है, साथ ही पाचन को बिना भारी किए हुए पेट भरने का अनुभव कराता है। इससे बार-बार भूख लगने की प्रवृत्ति पर भी नियंत्रण रहता है।         
📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
    भगवद्गीता में सीधे तौर पर “मांसाहार करना चाहिए या नहीं” जैसी कोई स्पष्ट निषेध या अनुमति की सूची नहीं दी गई है, लेकिन इसमें भोजन के स्वभाव और उसका मनुष्य के मन-मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है, इस पर बहुत गहराई से बात की गई है।
        गीता के 17वें अध्याय में भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: सात्विक, राजसिक और तामसिक। इन्हीं श्रेणियों के आधार पर मांसाहार को समझा जाता है।
        भोजन के तीन प्रकार और उनका प्रभाव भोजन का प्रकार | लक्षण और उदाहरण | मन पर प्रभाव ।सात्विक भोजन | आयु, बुद्धि, बल, आरोग्य और सुख बढ़ाने वाला। रसयुक्त, चिकना, स्थिर रहने वाला और स्वाभाविक रूप से मन को प्रिय (जैसे- दूध, फल, सब्जियां, अनाज)। | मन को शांत, पवित्र और विचारशील बनाता है। राजसिक भोजन. | अत्यधिक कड़वे, खट्टे, नमकीन, बहुत गर्म, तीखे, रूखे और जलन पैदा करने वाले भोजन। | यह दुःख, शोक और रोग पैदा करता है। मन में चंचलता और इच्छाएं बढ़ाता है। तामसिक भोजन | जो भोजन अधपका, रसरहित, दुर्गन्धयुक्त, बासी, जूठा और अपवित्र हो। | यह अज्ञान, आलस्य, प्रमाद (लापरवाही) और निद्रा को बढ़ाता है।
*मांसाहार किस श्रेणी में आता है?*
        *_विद्वानों और टीकाकारों के अनुसार, मांसाहार को आमतौर पर तामसिक या राजसिक श्रेणी में रखा जाता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण दिए जाते हैं:
        *_पवित्रता और स्वभाव. मांस मूल रूप से एक मृत शरीर का हिस्सा है, इसलिए इसे तामसिक (अपवित्र या चेतना को सुलाने वाला) माना जाता है। गीता के अनुसार, ऐसा भोजन व्यक्ति के भीतर आलस्य और अज्ञान बढ़ाता है।
        *_अहिंसा का सिद्धांत हालांकि गीता का मुख्य फोकस कर्म और कर्तव्य पर है, लेकिन भारतीय दर्शन में ‘ाहिंसा’ को सर्वोच्च माना गया है। किसी जीव को कष्ट देकर प्राप्त किया गया भोजन सात्विक श्रेणी में नहीं आ सकता।कर्मयोग के नजरिए से गीता का एक बड़ा संदेश यह भी है कि जो भी काम या भोजन आप करते हैं, उसे पहले ईश्वर को समर्पित (प्रसाद रूप में) करना चाहिए। अध्याय 9 (श्लोक 26) में कृष्ण कहते हैं:”पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति…”
*_(जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्ता, फूल, फल या जल अर्पित करता है, उसे मैं स्वीकार करता हूँ।)
      *_यहाँ कृष्ण ने केवल शाकाहारी चीजों का उल्लेख किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सात्विक अर्पण ही श्रेष्ठ है।
       *_संक्षेप में कहें तो भगवद्गीता मनुष्य को सात्विक भोजन करने की सलाह देती है क्योंकि जैसा हम अन्न खाते हैं, वैसा ही हमारा मन बनता है। यदि कोई व्यक्ति आध्यात्मिक प्रगति, मानसिक शांति और शुद्धता चाहता है, तो गीता के दृष्टिकोण से मांसाहार को छोड़ना और शाकाहार अपनाना बेहतर माना गया है। ━━━━━━━⊱✿⊰━━━━━━━─
⚜️ *_त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
*_आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

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