कृषिमध्य प्रदेश

लकवाग्रस्त किसान के नाम पर वसूली का आरोप

नोहटा समिति में 50 हजार का विवाद, शिकायत के एक दिन बाद रसीद और केसीसी पर उठे सवाल
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
जबेरा । दमोह जिले के जबेरा तहसील के ग्राम घांघरी से सहकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। बिस्तर पर पड़े लकवाग्रस्त किसान के नाम पर 50 हजार रुपये की कथित वसूली और बाद में ‘बैकडेट’ रसीद काटे जाने के आरोपों ने सेवा सहकारी समिति नोहटा की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा किया है। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर, सहायक पंजीयक (एआर) कार्यालय और मंत्री की जनसुनवाई तक शिकायत दर्ज कराई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसान हल्कू सिंह वर्ष 2018-19 में राज्य शासन की कर्जमाफी योजना के तहत लगभग 95 हजार रुपये के ऋण से मुक्त हो चुके थे। कर्जमाफी का प्रमाण पत्र भी परिवार के पास मौजूद है। इसके बावजूद 21 जुलाई 2026 को जब उनके पुत्र बाबू सिंह यूरिया खाद लेने समिति पहुंचे, तो वहां पदस्थ मैनेजर प्रकाश राय ने किसान के नाम पर 55 हजार रुपये का बकाया बताया।
परिवार का आरोप है कि कर्जमाफी का प्रमाण पत्र दिखाने के बावजूद मैनेजर ने उसे मानने से इनकार कर दिया और खाद देने से मना कर दिया। मजबूरी में किसान पुत्र ने कर्ज लेकर 50 हजार रुपये नकद जमा किए और प्रबंधक के सामने गुहार लगाई कि उनके पिता पर कोई बकाया नहीं है। आरोप है कि प्रबंधक ने राशि ले ली, लेकिन तत्काल रसीद नहीं दी।
आरोपों के अनुसार, 24 जुलाई को किसान के नाम पर केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण बनाया गया और उसी प्रक्रिया में जमा की गई राशि में से 40 हजार रुपये वापस थमा दिए गए, जिससे पूरे मामले में संदेह और गहरा गया है। पीड़ित का कहना है कि बिना स्पष्ट जानकारी और सहमति के इस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई।
पीड़ित के अनुसार, रसीद के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़े। इसके बाद 3 अगस्त को मामला कलेक्टर, सहायक पंजीयक कार्यालय और मंत्री की जनसुनवाई तक पहुंचा। शिकायत के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। परिवार का दावा है कि 4 अगस्त की तारीख में रसीद काटकर उसे अपने पास ही रख लिया गया, ताकि अधिकारियों को गुमराह किया जा सके। साथ ही शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसान पहले से कर्जमुक्त था, तो उसके नाम पर 24 जुलाई को तत्काल केसीसी ऋण कैसे स्वीकृत हुआ और राशि का लेन-देन किस आधार पर किया गया।
इस मामले में सेवा सहकारी समिति नोहटा के मैनेजर प्रकाश राय का कहना है कि शासन द्वारा की गई कर्जमाफी में सभी किसानों की पूरी राशि माफ नहीं हुई थी। संबंधित किसान के खाते में 95 हजार रुपये के कर्ज में से करीब 47 हजार 500 रुपये ही माफ हुए थे, जबकि शेष राशि ब्याज सहित लगभग 55 हजार रुपये बकाया थी। उनका कहना है कि किसान द्वारा कर्ज जमा किया गया, लेकिन तत्काल रसीद जारी नहीं हो सकी थी। बाद में 4 अगस्त की तारीख में रसीद काट दी गई और किसान को रिकॉर्ड दिखा दिए गए हैं।
जांच की मांग, उठे बड़े सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने सहकारी समितियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पूरी राशि वापस दिलाने की मांग की है।
अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या पीड़ित किसान परिवार को न्याय मिल पाता है।

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