सिविल अस्पताल भवन हैंडओवर के पहले ही छत से टपकने लगा पानी
पुराने भवन में भी जगह, पानी की कमी के अलावा अव्यवस्थाओं की भरमार, नए से भी टूट रही उम्मीदें
नागरिक बोले अभी यह हालत तो संचालित होने पर क्या बनेगी स्थिति
सिलवानी। जिन परेशानियों से छुटकारा दिलाने के लिए शासन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सिविल अस्पताल में उन्नयन किया है। उन परेशानियों का छुटकारा अस्पताल के नए भवन में भी नहीं मिल पाएगा। क्योंकि वर्तमान भवन में जहां जगह, पानी की कमी है तो उपचार के दौरान भर्ती मरीजों को छत से टपक रहे पानी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है वह नए भवन में हैंडओवर के पहले ही दिखने लगी है। 8 करोड़ से भी ज्यादा राशि से नए भवन को तैयार किया गया है और भवन बनकर तैयार हो चुका है, कुछ काम शेष रह गए हैं, जिन्हें पूरा कर भवन अस्पताल को हैंडओवर किया जाएगा, लेकिन नए भवन की छत हैंडओवर से पहले ही बारिश का पानी छत से नीचे टपकने लगा है। वही भवन की दीवारों में भी पानी भरा गया है, इतना ही नहीं दीवारें, बीम आदि जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे में यह भवन भी लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है और लोगों की उम्मीदों को तोड़ रहा है। चिंता की बात यह है कि निर्माण एजेंसी के जिम्मेदार तो अपनी मनमर्जी से भवन का निर्माण करवा रहे थे, लेकिन मूल्याकंन करने वाले अफसर भी ठेकेदार की हां में हां करके मूल्याकंन कर भुगतान करवा रहे हैं। ऐसें भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है कि यह भवन कितने सालों चलेगा।
भवन निर्माण करने वाले इंजीनियरों से भवन निर्माण की तकनीक और औसतन उम्र की जानकरी ली तो उन्होंने बताया कि वैसे एक सामान्य भवन की औसतन उम्र 25 साल होती है। लेकिन भवन की निर्माण सामग्री पर भवन की गुणवत्ता परखी जाती है। यदि निर्माण सामग्री में कमी है या निश्चित मात्रा में क्रांकीट, लोहा, या सीमेंट नहीं डाली जाती तो छतों में लीकेज होने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर मौसम का भी असर भवन पर पड़ता है। यदि गर्मी के मौसम में छत डली है तो बारिश में लीकेज होना आम बात है। यदि बारिश या सर्दी के मौसम में छत डलती है तो छतों के लीकेज की संभावना कम सी रहती है।
पीआईयू इस भवन का निर्माण करवा रही है। भवन निर्माण हो चुका है और अंतिम चरणों में है, फिनिशिंग आदि काम चल रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टेक्निकल टीम हैंडओवर लेने से पहले निरीक्षण करेगी, इसके बाद जो भी कमियां रहेंगी उन्हें पीआईयू ठेकेदार से पूरा करवाएगा। इसके बाद हैंडओवर की प्रक्रिया शुरु होगी। हैंडओवर से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इसका शुभारंभ करवाया जाएगा। खास बात यह है कि समय सीमा निकलने के दो साल बाद यह भवन बनकर तैयार हो पाएगा और संभवत: नंबवर दिसबंर में भवन अस्पताल प्रबंधन को हैँडओवर कर दिया जाएगा।
इस संबंध में सुरेश कुमार मिश्रा, ईई पीआईयु रायसेन का कहना है कि भवन अभी अंडर कंस्ट्रक्शन है, जो भी कमियां है उसे पूरा करवाया जाएगा। गर्मी के मौसम में बनने वाले भवनों की छतों में बारिश का पानी बैठने लगता है। लेकिन उस पर वाटर प्रूफ करवाएंगे। हमारा प्रयास है कि दीपावली तक भवन हैंडओवर हो जाए।



