ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 02 मई 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 02 मई 2023

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – वैशाख मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बैशाख माह द्वादशी तिथि 11:18 PM तक उपरांत त्रयोदशी |
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी इस तिथि के स्वामी श्री हरि विष्णु जी हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 07:41 PM तक उपरांत हस्त |
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। उत्तराफाल्गुनी के देवता अर्यमा होते हैं।
🔊 योग – व्याघात योग 11:49 AM तक, उसके बाद हर्षण योग |
प्रथम करण : बव – 10:48 ए एम तक
द्वितीय करण – बालव – 11:17 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:31:00 AM
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:29:00 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:14 ए एम से 04:57 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:36 ए एम से 05:40 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:31 पी एम से 03:24 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:55 पी एम से 07:17 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:57 पी एम से 08:01 पी एम
💧 अमृत काल : 11:56 ए एम से 01:40 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:39 ए एम, मई 03
🌸 त्रिपुष्कर योग : 05:40 ए एम से 07:41 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा चढाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – त्रिपुष्कर योग, परशुराम द्वादशी, अंतर्राष्ट्रीय हैरी पॉटर दिवस, राष्ट्रीय शिक्षक दिवस, शिशु दिवस, राष्ट्रीय भाई और बहन दिवस, विश्व अस्थमा दिवस, साहित्यकार – बनारसीदास चतुर्वेदी स्मृति दिवस, विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान दिवस, विष्णु कांत शास्त्री जन्म दिवस, यशवंत सिंह परमार पुण्य तिथि, अजय देवगन / अभिनेता जन्मोत्सव, मई मातृ दिवस
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🌷 Vastu tips 🌸
वास्तु के कुछ आसान उपाय
गुग्गल का धुंआ सप्ताह में एक बार घर में फैलाना।
गेहूं में दो दाने नागकेसर के बीज और ग्यारह तुलसी के पत्ते डालने से लाभ होता है।
घर में सरसों के तेल के दीये में लौंग डालें।
हर गुरुवार को तुलसी के पौधे पर दूध चढ़ाना चाहिए।
पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें।
घर में 3 दरवाजे एक सीध में नहीं होने चाहिए।
सुनिश्चित करें कि कभी भी सूखे फूल घर में न रखें।
सूफियों, संतों, देवी-देवताओं और महात्माओं का आशीर्वाद लेने के लिए उनकी तस्वीरें टांगें।
घर में टूटी-फूटी, जली, बिखरी हुई या नकारात्मक वस्तुओं को रखने से बचें।
प्राकृतिक दृश्यों का चित्र आग्नेय दिशा के कोने में टांगें।
घर में पानी का रिसाव नहीं होना चाहिए।
घर में गोल किनारों का फर्नीचर शुभ होता है और आवाज नहीं करनी चाहिए।
गैलरी में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा में लगाएं।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🚩 वैशाख द्वादशी (मंगलवार, 2 मई): वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा और दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु के मधुसूदन रूप की पूजा और व्रत करने का विधान है। इससे अग्निष्टहोम करने जितना पुण्य फल मिलता है। वराह पुराण के मुताबिक इस तिथि पर ही तांबे के बर्तन में चंदन, धूप, फूल, चावल से भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान भी है।
🔱 प्रदोष व्रत (बुधवार, 3 मई): वैशाख मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। नारद जी ने बताया कि वैशाख मास को ब्रह्माजी ने सब महीनों में उत्तम सिद्ध किया है। यह मास संपूर्ण देवताओं द्वारा पूजित है। इसलिए इस महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में सुख बढ़ता है। शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।
🦁 नृसिंह प्राकट्योत्सव (गुरुवार, 4 मई): पद्म पुराण के मुताबिक वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान नरसिंह प्रकट हुए थे। ये भगवान विष्णु का चौथा अवतार था। इनका आधा शरीर सिंह और आधा इंसान का था। इन्होंने राक्षस हिरण्यकश्यप को मारकर भक्त प्रहलाद को बचाया था।
🌝 वैशाख पूर्णिमा (शुक्रवार, 5 मई): वैशाख महीने की पूर्णिमा पर ब्रह्मा जी ने तिल का निर्माण किया था। इसलिए उस दिन दोनों तरह के तिल यानी सफेद और काले तिल वाले जल से नहाना चाहिए। इस तिथि पर अग्नि में तिल की आहुति देना चाहिए। साथ ही इस पूर्णिमा पर तिल और शहद से भरा बर्तन दान दें। ऐसा करने से हर तरह के पाप, परेशानियां और दोष खत्म हो जाते हैं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
किडनी की पथरी का घरेलू उपचार है लेमनग्रास किडनी की पथरी के लिए लेमनग्रास एक घरेलू इलाज है। ये पहले तो, आपके फिल्ट्रेशन के प्रोसेस को तेज करता है और किडनी में जमा क्रिएटिनिन को साफ करने में मदद करता है। इसका विटामिन सी जो कि साइट्रिक एसिड से भरपूर है, पथरी को पिघलाने में मदद करता है और इसे शरीर से फ्लश ऑउट करता है।
किडनी में इंफेक्शन से करता है बचाव किडनी की कुछ बड़ी समस्याओं में से एक है यूटीआई इंफेक्शन जो कि किडनी डैमेज का कारण बन सकता है। ऐसे में लेमनग्रास की पत्तियों का सेवन इस समस्याओं कम करने में मदद कर सकता है। ये एंटीबैक्टीरियल है जो कि बैक्टीरिया को मारने में मदद करता है। दूसरा ये मूत्रवर्धक है जो कि पेशाब के जरिए बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। इस प्रकार से ये यूटीआई में ये बेहद कारगर है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्रीमद् भगवद् गीता के पहले अध्याय में महाभारत युद्ध के पहले दिन अर्जुन ने श्रीकृष्ण से अपना रथ युद्ध भूमि के बीच में ले जाने के लिए कहा था। श्रीकृष्ण ने रथ आगे बढ़ाया और भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य के सामने ले जाकर खड़ा कर दिया। अर्जुन ने जब कौरव सेना में अपने कुटुम्ब के लोग देखे तो वह निराश हो गए थे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा कि मैं युद्ध नहीं चाहता। मैं संन्यास लेना चाहता हूं। अपने कुंटुम्ब के लोगों को मारकर मिलने वाला राज्य मेरे लिए किसी काम का नहीं है।
अर्जुन ने जब युद्ध के लिए मना किया तो श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। श्रीमद् भगवद् गीता के दूसरे अध्याय में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जो लोग कर्म नहीं करते हैं, अपने कर्तव्य से भागते हैं, वे कायर होते हैं। ऐसे लोगों को घर-परिवार और समाज में सम्मान नहीं मिलता, बल्कि इन्हें अपमानित होना पड़ सकता है।
गीता के पहले अध्याय में श्रीकृष्ण मौन थे। अर्जुन श्रीकृष्ण से लगातार प्रश्न कर रहे थे। युद्ध न करने के निर्णय को सही बताते हुए अपने तर्क दे रहे थे। लेकिन, श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कुछ नहीं कहा। श्रीकृष्ण का मौन देखकर अर्जुन की आंखों से आंसू बहने लगे तब भगवान ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया।
जब तक व्यक्ति स्वयं को बुद्धिमान मानता है और व्यर्थ तर्क देता है, तब तक भगवान मौन रहते हैं। लेकिन, जब व्यक्ति अहंकार छोड़कर भगवान की शरण में चला जाता है, तब वे भक्त के सभी प्रश्नों के उत्तर देते हैं। जब हम अहंकार छोड़ देते हैं, तब ही भगवान की कृपा मिलती है। अर्जुन की आंखों में जब आंसू आ गए, तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन के अज्ञान को दूर करने के लिए उपदेश दिया। गीता में भगवान ने अर्जुन को कर्म और कर्तव्य का महत्व समझाया।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि उठो और अपना कर्म करो। सभी तरह के मोह का त्याग करो और युद्ध करो।
अर्जुन ने कहा कि हे मधुसूदन, आप ही बताए मैं भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य पर प्रहार कैसे करूं? मैं धृतराष्ट्र के संबंधियों पर प्रहार कैसे कर सकता हूं? इन्हें मारकर मैं धन प्राप्त नहीं करना चाहता।
अर्जुन के इन प्रश्नों के उत्तर में श्रीकृष्ण बोलें कि हमें शोक न करने योग्य लोगों के लिए शोक नहीं करना चाहिए। जो लोग अधर्म का साथ देते हैं, उनके लिए किसी तरह का दुख मन में नहीं होना चाहिए। इसीलिए तुम्हें ये युद्ध करना है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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