ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 10 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 10 अगस्त 2023

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास कृष्ण पक्ष दशमी तिथि 05:06 AM तक उपरांत एकादशी
✏️ तिथि स्वामी – दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 04:01 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और नक्षत्र की राशि का स्वामी शुक्र है।
🔔 योग – ध्रुव योग 03:10 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
प्रथम करण : वणिज – 04:34 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 05:06 ए एम, अगस्त 11 तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:17:24 AM
🌅 सूर्यास्त – सायं 19:09:11 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:22 ए एम से 05:05 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:43 ए एम से 05:47 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:39 पी एम से 03:33 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:05 पी एम से 07:27 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:05 पी एम से 08:10 पी एम
💧 अमृत काल : 12:37 ए एम, अगस्त 11 से 02:19 ए एम, अगस्त 11
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, अगस्त 11 से 12:48 ए एम, अगस्त 11
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को केसर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’, झण्डा गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ के रचयिता पुण्य तिथि, प्रख्यात संगीतकार विष्णु नारायण भातखंडे जन्म दिवस, भारतीय कुख्यात डाकू फूलन देवी जन्म दिवस, पद्म भूषण आचार्य बलदेव उपाध्याय, स्मृति दिवस, भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरि जन्म दिवस, फतेह सिंह रथोड / पुलिस अधिकारी जन्म दिवस, राष्ट्रीय आलसी दिवस, राष्ट्रीय स्मोर्स दिवस, राष्ट्रीय कनेक्टिकट दिवस, डेंगू निरोधक दिवस, विश्व जैव ईंधन दिवस, इक्वाडोर स्वतंत्रता दिवस, विश्व शेर दिवस
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗺️ Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे स्टडी रूम में टेबल रखने के बारे में। वास्तु के अनुसार स्टडी रूम के साथ-साथ स्टडी टेबल के लिए भी सही दिशा का निर्धारण करना आवश्यक है। दरअसल, स्टडी टेबल को सही दिशा में रखने से बच्चे की एकाग्र शक्ति बढ़ती है, साथ ही पढ़ाई में उसकी रूचि बढ़ती है। स्टडी टेबल को रखने के लिए सही दिशा का निर्धारण उसकी धातु के आधार पर किया जाता है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर स्टडी टेबल लकड़ी की है, तो उसे रखने के लिए पूर्व दिशा या आग्नेय कोण, यानि दक्षिण-पूर्व दिशा का चुनाव करना चाहिए। लेकिन अगर आपकी स्टडी टेबल लकड़ी के अलावा किसी अन्य धातु की है, जैसे लोहे आदि की है तो उसके लिए पश्चिम दिशा या वायव्य कोण, यानि उत्तर-पश्चिम दिशा का चुनाव करना ठीक होता है। इस प्रकार अलग-अलग धातु के अनुसार दिशा का चुनाव करके स्टडी टेबल रखने से और उस दिशा में पढ़ाई करने से पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं।
वास्तु के अनुसार, स्टडी रूम में पानी की व्यवस्था के लिए उत्तर दिशा का चुनाव करना चाहिए। आप इस दिशा में पानी का कोई जग या बड़ा मयूर जग आदि रख सकते हैं। इससे आपके बच्चे को किसी प्रकार का भय आदि भी नहीं रहेगा।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बच्चों को बुरी नजर से रक्षा करता है पुत्रजीवक बीज |
पुत्रजीवक बीज के बारे में यह भी कहा जाता है कि ये बच्चों को बुरी नजर से बचाता है. साथ ही पुत्रजीवक बीज की माला बच्चों के गले में पहनाने से उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है. सिर्फ इतना ही नहीं, पुत्रजीवक बीज का इस्तेमाल बुरी नजर से बचाने के लिए पहले भी किया जाता रहा है. जानकारी रहे कि पुत्रजीवक बीज का उल्लेख आयुर्वेद में भी किया गया है. आयुर्वेद के मुताबिक, अगर कोई महिला पुत्र प्राप्ति की कामना रखती हैं तो उन्हें पुत्रजीवक बीज की माला गले में धारण करने से फायदा होता है.
🫀 आरोग्य संजीवनी 🍶
हार्ट ब्लॉकेज के बारे में कैसे पता करें? दिल की नसें ब्लॉक होने के शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द की शिकायत रहती है। अगर आपको अक्सर सीने में अचानक दर्द उठता है तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
हार्ट की नसें ब्लॉक होने पर चक्कर आने की समस्या भी होती है, अगर आपको चक्कर के साथ बेहोशी आती है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
थकान भी हार्ट की नसें ब्लॉक होने का एक लक्षण है, जब ब्लड फ्लो सही से नहीं हो पाता है तो थकान और सांस फूलने की समस्या होने लगती है। ऐसा अक्सर तब होता है जब आप एक्सरसाइज करते हैं और वॉक करते हैं।
हार्ट की नसें ब्लॉक होने पर जी मिचलाने और उल्टी की समस्या भी हो सकती है। अगर आपको अक्सर ऐसा होता है तो इसे इग्नोर न करें। कई बार लोग इस समस्या को सीरियस नहीं लेते हैं और इसका नतीजा गंभीर भुगतना पड़ता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
रघुवंशी हैं सूर्यवंशी, यदुवंशी हैं चंद्रवंशी महाराज रघु इक्ष्वाकु वंश का शासक थे. रघुवंश के अनुसार, वह राजा दिलीप और उनकी रानी सुदक्षिणा के पुत्र थे. इक्ष्वाकु वंश की स्थापना महान राजा इक्ष्वाकु ने किया था. इक्ष्वाकु कोसल साम्राज्य के पहले राजा थे और वैवस्वत मनु के दस पुत्रों में से एक थे. हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार, वैवस्वत मनु को मानव जाति के प्रणेता व प्रथम पुरुष माना जाता है. वैवस्वत मनु को सूर्य और विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा का पुत्र माना जाता है.
इस प्रकार से, मूल रूप से रघुवंश/ इक्ष्वाकु वंश की उत्पत्ति भगवान सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु से हुई है. भगवान सूर्य के पुत्र होने के कारण मनु सूर्यवंशी कहलाये तथा इनसे चला यह वंश सूर्यवंश के नाम से प्रसिद्ध हुआ. यदुवंश की बात करें तो जैसा कि आप जानते हैं कि इस वंश की उत्पत्ति पौराणिक राजा यदु से हुई है. यदु ययाति के पुत्र थे. पौराणिक कथाओं में ययाति को एक चंद्रवंशी राजा के रूप में वर्णित किया गया है. इस प्रकार से, यदुवंशियों का संबंध चंद्रवंश से है.
भगवान राम हैं रघुवंशी, भगवान कृष्ण हैं यदुवंशी रघुवंश में एक से बढ़कर एक प्रतापी राजा हुए. अयोध्या के सूर्यवंश में आगे चल कर प्रतापी राजा रघु हुये जिनके नाम पर यह वंश रघुवंश कहलाया. इस महान सूर्यवंश में इक्ष्वाकु, हरिश्चंद्र, सगर, भगीरथ, अंबरीष, दिलीप, रघु, दशरथ, राम, और कुश जैसे प्रतापी राजा हुये हैं.यदुवंश की अगर बात करें तो ययाति के 5 पुत्र हुए- 1. पुरु, 2. यदु, 3. तुर्वस, 4. अनु और 5. द्रुह्मु. ययाति के बाद इन पांचों ने संपूर्ण पृथ्वी पर राज किया और अपने कुल का दूर-दूर तक विस्तार किया. आगे चलकर न, कई पीढ़ियों बाद, इसी वंश में वासुदेव हुए. भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण ने वसुदेव और देवकी की 8वीं संतान के रूप में जन्म लिया
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

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