Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 15 फरवरी 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 15 फरवरी 2023
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।h
🤴🏻 15 फरवरी 2023 दिन बुधवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज आर्य समाज के संस्थापक विद्वत् वरेण्य सनातन के ह्रदय स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का जन्म दिवस है। आप सभी सनातनियों को स्वामी जी के जन्म जयन्ती की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – दशमी 24:24 PM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – ज्येष्ठा 20:05 PM तक उपरान्त मूल नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
📢 योग – व्याघात 05:41 AM तक उपरान्त हर्षण योग है।
⚡ प्रथम करण : गर – 07:39 ए एम तक
✨ द्वितीय करण – वणिज – 06:41 पी एम तक
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : बुधवार का (अशुभ ) काल 11:12 ए एम से 12:35 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:26:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:34:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:17 ए एम से 06:09 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:43 ए एम से 07:00 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:27 पी एम से 03:12 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:08 पी एम से 06:34 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:11 पी एम से 07:28 पी एम
💧 अमृत काल : 04:26 पी एम से 05:57 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 16 से 01:01 ए एम, फरवरी 16
☄️ व्याघात योग – आज देर रात 2 बजकर 2 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♂️ आज का उपाय-विप्र को हरा वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – समर्थ रामदास नवमी, ह्रदय स्वामी दयानन्द सरस्वती जी जन्म दिवस, भारतीय शायर “मिर्ज़ा ग़ालिब” पुण्य तिथि, संत सेवालाल जयंती उत्सव, गालिब और सुभद्रा कुमारी चौहान पुण्यतिथि, महान खगोलशास्त्री गैलीलियो जन्मोत्सव, प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान पुण्यतिथि, दादासाहेब फालके पुरस्कार दिवस, भारतीय खाद्य निगम स्थापना दिवस, उत्पादकता सप्ताह, लव रीसेट डे
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗽 Vastu tips 🏝️
झाड़ू से जुड़े आसान उपाय— ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नई झाड़ू खरीदने के लिए अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और रविवार का दिन बेहद शुभ माना जाता है ऐसे में आप झाड़ू को किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष में इन दिनों पर खरीद सकते है वही नई झाड़ू का प्रयोग शनिवार के दिन से करना उत्तम माना जाता है मान्यता है ऐसा करने से शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है वही वास्तु की मानें तो झाड़ू को हमेशा ही जोड़े में खरीदना शुभ होता है कभी भी एक झाड़ू नहीं खरीदनी चाहिए।
ऐसा करने से घर की दरिद्रता दूर हो जाती है और धन में वृद्धि होने लगती है। लेकिन भूलकर भी पुरानी झाड़ू को गुरुवार, पूर्णिमा, एकादशी और मंगलवार के दिन घर से बाहर नहीं करना चाहिए ऐसा करने से आर्थिक परेशानियों और धन हानि का सामना करना पड़ता है वास्तु की मानें तो झाड़ू को हमेशा ही घर की उत्तर दिशा में छिपाकर रखना चाहिए इस पर किसी की नजर नहीं पड़नी चाहिए मान्यता है कि ऐसा करने से दरिद्रता का घर में वास होने लगता है।
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अच्छी नींद एक अच्छी फुट मसाज न केवल हमारे थके हुए पैरों को आराम देती है बल्कि यह तनावग्रस्त दिमाग को भी शांत करती है. पैरों की अच्छी मालिश करने से आपको जल्दी नींद आ जाएगी.
पैरों की सेहत फुट मसाज से पैरों के स्वास्थ्य में सुधार होता है. इसके अलावा, पैरों के जोड़ और मसल्स को मजबूती मिलती है
पैरों की मालिश करने का सही तरीका बस थोड़ा सा गर्म तेल लें और धीरे-धीरे अपने पैरों के तलवों में मालिश करें. पैर की उंगलियों से शुरू करते हुए नीचे जाएं. इसके लिए तिल, ब्राह्मी जैसे गर्म तेलों का प्रयोग करें. घाव, कट, खरोंच या कोई संक्रमण होने पर मालिश करने से बचें.
🧉 आरोग्य संजीवनी 🥃
कैस्टर ऑइल है रामबाण एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर कैस्टर ऑइल हड्डियों के असहनीय दर्द को कम करने में बेहद मददगार हैं। कैस्टर ऑयल यानी अरंडी के तेल से बॉडी के जॉइंट्स पर मसाज कर पुराने से पुराने दर्द को कम किया जा सकता है। यदि इसका सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो अर्थराइटिस के दर्द से आसानी से छुटकारा मिल सकता है।
हफ्ते में ही दिखता है असर अगर आप 1 हफ्ते तक लगातार इस ऑइल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो अर्थराइटिस के दर्द से आसानी से छुटकारा मिल सकता है। जहां आपको बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है उस एरिया पर कैस्टर ऑइल को हल्का गुनगुना कर मसाज करें। इससे जोड़ों में होने वाली सूजन और अकड़न को भी ठीक किया जा सकता है। चार हफ्ते तक दिन में तीन बार मसाज करने से मांसपेशियों को दोबारा एक्टिव करने में मदद मिल सकती है।
मसाज के बाद करें सिकाई अर्थराइटिस का दर्द असहनीय होता है। कई बार ये इतना बढ़ जाता है कि लोगों का उठना-बैठना भी मुश्किल हो जाता है। जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए कैस्टर ऑयल से मसाज के बाद गर्म पानी की थैली से सिकाई की जा सकती है। मसाज के बाद सिकाई करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
शादी विवाह जैसे शुभ कार्यों में किन्नरों का आना आम बात है वे आते है और लोगों को बाधाई और आशीर्वाद देते है कहा जाता है कि इनके द्वारा दिया गया आशीर्वाद बेहद फलित होता है लेकिन इनकी बदुआ को कभी नहीं लेना चाहिए क्योंकि माना जाता है कि इनकी बदुओं भी दुओं की तरह असर जरूर करती है ऐसे में ऐसे कई लोग है जो किन्नरों के जीवन के बारे में जानने की इच्छा रखते है।
किन्नरों के जीवन को लेकर कई पहलु आज भी रहस्यमयी है या फिर इनके बारे में लोगों को बहुत कम ही मालूम है आमतौर पर माना जाता है कि किन्नर समाज से अलग थलग रहते है और ये कभी शादी नहीं करते है लेकिन आज हम आपको एक ऐसी हकीकत से रूबरू कर रहा है जिसके अनुसार किन्नर विवाह भी रचाते है और शादी के बाद दुल्हन भी बनते है लेकिन केवल एक रात के लिए, तो आइए जानते है क्या है किन्नरों के जीवन से जुड़ रहस्य।
ऐसा कहा जाता है कि किन्नर ना तो पूरी तरह से पुरुष होते है और ना ही इनकी गिनती महिलाओं में की जाती है लिहाजा उनकी शादी होती है या नहीं, इस बारे में पूर्णत: कुछ नहीं कहा जा सकता है अलग समुदाय में रहने वाले किन्नर आमतौर पर अविवाहित रहते है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं होता है क्योंकि किन्नर विवाह करत है और केवल एक रात्रि के लिए शादी करके दुल्हन बनते है किन्नरों की शादी किसी व्यक्ति से न होकर ये भगवान से विवाह रचाते है आपको बता दें कि किन्नरों के भगवान अर्जुन और नाग कन्या उलूपी की संतान इरावन जिन्हें अरावन नाम से जाना जाता है।
महाभारत कथा के अनुसार अर्जुन भी अज्ञातवास के समय किन्नर रूप में रहे। कहते है कि हर साल तमिलनाडु के कूवगाम में किन्नरों के विवाह का जश्न मनाया जाता है जिसमें तमिल नव वर्ष की पूर्णिमा से किन्नरों का विवाह उत्सव आरंभ हो जाता है और यह पूरे 18 दिनों तक चलता है वही 17वें दिन किन्नरों का विवाह कराया जाता है लेकिन शादी के अगले ही दिन अरावन देवता की प्रतिमा को पूरे शहर भर में घुमाकर इसे तोड़ दिया जाता है जिसके बाद विवाहित किन्नरें अपना पूरा श्रृंगार उताकर एक विधवा की तरह विलाप करती है, मान्यता है कि ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे फिर किसी को किन्नर का जन्म न लेना पड़े।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।


