ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 23 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 23 अगस्त 2023

23 अगस्त 2023 दिन बुधवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज शीतला सप्तमी है और आज माता गौरी देवी के दर्शन एवं पूजन आदि करना चाहिये। आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म जयन्ती है, जिसे तुलसी जयन्ती भी कहा जाता है। आज स्कुल-कॉलेजों में कविता एवं खेल-कूद आदि की प्रतियोगिता आदि का आयोजन करके विधिपूर्वक तुलसी जयन्ती मनाया जाता है। आदरणीय तुलसीदास जी ने हमारे वैदिक सनातन परम्परा के रक्षक की भूमिका निभायी है। ये हमारे समाज के सबसे लोकप्रिय एवं आदर्शवादी व्यक्तित्व थे। आज की सप्तमी को जैन समाज में मोक्ष सप्तमी व्रत के रूप में मनाया जाता है। आज सर्वार्थ अमृत योग भी है, जो आज के दिन को अत्यन्त महत्वपूर्ण बनाती है। आप सभी सनातनियों को शीत सप्तमी व्रत एवं तुलसी जयन्ती की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु प्रारंभ
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : श्रावण माह शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 03:31 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि के स्वामी – सप्तमी के स्वामी भगवान सूर्य देव हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र स्वाति 08:08 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र देवता वायु और सरस्वती जी है। तथा राशि के स्वामी ग्रह शुक्र है।
🔕 योग : ब्रह्म योग 09:44 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : गर – 03:23 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 03:31 ए एम, अगस्त 24 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:27:00
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:26 ए एम से 05:10 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:48 ए एम से 05:54 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:33 पी एम से 03:25 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:53 पी एम से 07:15 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:53 पी एम से 07:59 पी एम
💧 अमृत काल : 11:55 पी एम से 01:35 ए एम, अगस्त 24
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, अगस्त 24 से 12:46 ए एम, अगस्त 24
❄️ रवि योग : 05:54 ए एम से 08:08 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि/ सौर शरद ऋतु प्रारंभ/तुलसी जयन्ती/ मोक्ष सप्तमी व्रत/ गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती/ सीत सप्तमी व्रत/ अभिनेत्री सायरा बानो जन्म दिवस, वरिष्ठ नेता बलराम जाखड़ जयन्ती, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी टी. प्रकाशम जयन्ती, सस्ता उड़ान दिवस , स्वास्थ्य इकाई समन्वयक दिवस और राष्ट्रीय स्पंज केक दिवस
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
🗽 Vastu Tips 🗼
वास्तु शास्त्र में आज हम अलग-अलग दिशाओं में सोने के फल के बारे में चर्चा करेंगे। वास्तु शास्त्र के अनुसार सोते समय अपना सिर पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। इस दिशा में सिर करके सोना अच्छा होता है। आपको बता दें कि पूर्व दिशा में सिर करके सोने से विद्या का लाभ मिलता है और बौद्धिक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। साथ ही दक्षिण दिशा में सिर करके सोने से सुख-सम्पत्ति का लाभ होता है, इससे आपको हर तरह का सुख पाने में आसानी होती है।
वहीं उत्तर दिशा में सिर करके सोने से आपको समस्याओं का सामना करना पड़ता है और पश्चिम दिशा में सिर करके सोने से चिंता बढ़ती है, जिससे आपकी परेशानी भी बढ़ती है। अतः आपको उत्तर या पश्चिम दिशा में सिर करके नहीं सोना चाहिए। इसके अलावा ऐसा भी कहा गया है कि अपने घर में जहां तक हो सके पूर्व दिशा की तरफ सिर करके सोना चाहिए और अपने ससुराल में दक्षिण दिशा में सिर करके सोना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गुस्से में लोग पागलपन की हदें पार कर जाते हैं, कोई मामूली झगड़े में बंदूक से दनादन फायर कर देता है तो कहीं रेस्टोरेंट के बाहर गोलियां बरस जाती हैं और फिर इस एक पल के पागलपन की सजा उन्हें जिंदगी भर भुगतनी पड़ती है।
लोग गुस्सा करके खुद को ही सज़ा देते हैं, उन्हें पता तक नहीं कि ताव में आना उनकी हेल्थ के लिए कितना खतरनाक है। लगातार रहने वाला एंगर सबसे पहले आपको हाई बीपी का मरीज़ बनाता है। इस खतरनाक बला से पाचन तंत्र खराब होता है, धड़कन तेज़ रहती है, डिप्रेशन हावी होने लगता है और इम्यून सिस्टम भी कमज़ोर पड़ जाता है।
बड़े तो बड़े आजकल बच्चों में भी एंगर लेवल काफी हाई रहता है। बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं तो जैसा वो देखते हैं वैसा एडॉप्ट कर लेते हैं। लोगों में बढ़ते एंगर की एक वजह जिंदगी में भरा तनाव भी है। आइए स्वामी रामदेव से जानें कि एंगर यानी गुस्सा पर कैसे कंट्रोल पाया जा सकता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
मोटापा कम करने के लिए आप सुबह नाश्ते में कई प्रकार की चीजों को सेवन कर सकते हैं लेकिन, बिना समय लगाए और चूल्हे पर चढ़ाए आपको कोई चीज खानी है तो स्प्राउट्स आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे बनाने के लिए आपको बस अंकुरित मूंग, मेथी, चना और मूंगफली लेना है और फिर इसमें टमाटर व प्याज काटकर मिलाना है। इसके बाद ऊपर से काला नमक, हरी मिर्च और फिर हल्का सा नमक और मिला लें। फिर इस स्प्राउट्स सलाद को वेट लॉस के लिए खाएं।
छाछ पीना वेट लॉस तेजी से मदद कर सकता है। छाछ में काला नमक मिलाकर पीना आपके मेटाबोलिज्म को तेज करता है और फिर फैट पचाने की गति को बढ़ावा देता है। इसके अलावा ये आपके बॉवेल मूवमेंट को भी तेज करता है और मल के साथ फैट के कणों को चिपकाकर बाहर निकालने में मदद करता है। इस प्रकार से छाछ का सेवन तेजी से वेट लॉस में मदद कर सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
चौदह मनुओं के नाम: 1.स्वायम्भु, 2.स्वरोचिष, 3.औत्तमी, 4.तामस मनु, 5.रैवत, 6.चाक्षुष, 7.वैवस्वत, 8.सूर्यसावर्णि, 9.दक्ष सावर्णि, 10.ब्रह्म सावर्णि, 11.धर्म सावर्णि 12.रुद्र सावर्णि, 13.रौच्य या देव सावर्णि, 14.भौत या इन्द्र सावर्णि।
प्रजापत्य कल्प में ब्रह्मा ने रुद्र रूप को ही स्वायम्भु मनु और स्त्री रूप में शतरूपा को प्रकट किया। स्वायंभुव मनु एवं शतरूपा की कुल पांच सन्ताने थीं जिनमें से दो पुत्र प्रियव्रत एवं उत्तानपाद तथा तीन कन्याएं आकूति, देवहूति और प्रसूति थे। आकूति का विवाह रुचि प्रजापति के साथ और प्रसूति का विवाह दक्ष प्रजापति के साथ हुआ। देवहूति का विवाह प्रजापति कर्दम के साथ हुआ। रुचि के आकूति से एक पुत्र उत्प‍न्न हुआ जिसका नाम यज्ञ रखा गया। इनकी पत्नी का नाम दक्षिणा था। कपिल ऋषि देवहूति की संतान थे। हिंदू पुराणों अनुसार इन्हीं तीन कन्याओं से संसार के मानवों में वृद्धि हुई।
दक्ष ने प्रसूति से 24 कन्याओं को जन्म दिया। इसके नाम श्रद्धा, लक्ष्मी, पुष्टि, धुति, तुष्टि, मेधा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा, वपु, शान्ति, ऋद्धि, और कीर्ति हैं। तेरह का विवाह धर्म से किया और फिर भृगु से ख्याति का, शिव से सती का, मरीचि से सम्भूति का, अंगिरा से स्मृति का, पुलस्त्य से प्रीति का पुलह से क्षमा का, कृति से सन्नति का, अत्रि से अनसूया का, वशिष्ट से ऊर्जा का, वह्व से स्वाह का तथा पितरों से स्वधा का विवाह किया। आगे आने वाली सृष्टि इन्हीं से विकसित हुई।
दो पुत्र- प्रियव्रत और उत्तानपाद। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नी थीं। राजा उत्तानपाद के सुनीति से ध्रुव तथा सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र उत्पन्न हुए। ध्रुव ने बहुत प्रसिद्धि हासिल की थी।
स्वायंभुव मनु के दूसरे पुत्र प्रियव्रत ने विश्वकर्मा की पुत्री बहिर्ष्मती से विवाह किया था जिनसे आग्नीध्र, यज्ञबाहु, मेधातिथि आदि दस पुत्र उत्पन्न हुए। प्रियव्रत की दूसरी पत्नी से उत्तम तामस और रैवत- ये तीन पुत्र उत्पन्न हुए जो अपने नामवाले मनवंतरों के अधिपति हुए। महाराज प्रियव्रत के दस पुत्रों मे से कवि, महावीर तथा सवन ये तीन नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे और उन्होंने संन्यास धर्म ग्रहण किया था।
शेष कल
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

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