ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 24 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 24 दिसम्बर 2023

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि हैं आज पावन प्रदोष का व्रत भी है। आज रवियोग भी योग है। आज काशी की यात्रा की जाती है। आज अनंग त्रयोदशी भी है। आप सभी सनातनियों को “अनंग त्रयोदशी एवं प्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष वार रविवार त्रयोदशी तिथि 05:55 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✏️ तिथी स्वामी : त्रयोदशी तिथि के देवता हैं त्रयोदशी और शिव। त्रयोदशी में कामदेव की पूजा करने से मनुष्य उत्तम भार्या प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र कृत्तिका 09:19 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं।
📢 योग – सिद्ध योग 07:17 AM तक, उसके बाद साध्य योग 05:41 AM तक, उसके बाद शुभ योग
प्रथम करण : कौलव – 06:07 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 05:54 ए एम, दिसम्बर 25 तक
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:00 ए एम से 05:51 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:25 ए एम से 06:43 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:53 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:51 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:46 पी एम से 06:12 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:48 पी एम से 07:06 पी एम
💧 अमृत काल : 06:55 पी एम से 08:31 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:42 ए एम, दिसम्बर 25
❄️ रवि योग : 09:19 पी एम से 06:43 ए एम, दिसम्बर 25
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में गुड़ से बनी मिठाई चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/रवियोग, राष्ट्रिए उपभोक्ता दिवस, लीबिया स्वतंत्रता दिवस, उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार स्मृति दिवस, भारतीय राष्ट्रवादी, वैज्ञानिक सतीश चंद्र दासगुप्ता पुण्य तिथि, भारतीय गायक मुहम्मद रफ़ी जन्म दिवस, अभिनेता अनिल कपूर जन्मोत्सव, प्रसिद्ध हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी नारायण भाई देसाई जन्म दिवस, भारतीय ग्राहक दिवस
✍🏼 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है
🗼 Vastu tips 🗽
घर के बाहर जूते-चप्पल उतारने के क्या कारण हैं?
घर को मंदिर और देवालय का दर्जा दिया गया है और हम सभी जानते हैं कि मंदिर में हमेशा जूते उतारने के बाद ही प्रवेश किया जाता है। इसलिए कहा जाता है कि हमेशा घर के बाहर जूते-चप्पल उतारने के बाद अंदर जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा जाता है कि घर के अंदर जूते ले जाने से घर का वातावरण अशुद्ध होता है। क्योंकि चप्पल हम सभी जगह पर पहन कर जाते हैं, ऐसे में इसके नीचे गंदगी का चिपकना लाजमी है। ऐसे में अगर आप इसे घर के अंदर ले जाते हैं तो वह आपके घर की ऊर्जा को खराब करती हैं। ये भी एक वजह है की हमे जूते -चप्पल घर के बाहर ही उतारने चाहिए।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां 🔰
गर्भधारण कैसे अगर आपको किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं हो रहा हो तो मंगलवार के दिन कुम्हार के घर आएं और उसमें प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन वाला डोरा ले आएं। उसे किसी गिलास में जल भरकर दाल दें। कुछ समय पश्चात डोरे को निकाल लें और वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है अगर संभव हो तो उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही रमण करें। गर्भ की स्थिति बनते ही उस डोरे को हनुमानजी के चरणों में रख दें।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
वॉक करने के बाद कौन सा पानी पिएं-वॉक करने के बाद शरीर में बीपी बढ़ा हुआ होता है और इस लिहाज से ठंडा पानी पीना फायदेमंद है। लेकिन, सर्दियां हैं इसलिए ठंडा पानी पीना गर्म शरीर में अचानक से तापमान को बदल सकता है जिससे आपको सर्दी-जुकाम की समस्या हो सकती है। पर ज्यादा ठंडा पानी आपकी धमनियों को सख्त भी कर सकती है जिससे दिल के काम काज पर प्रेशर आ सकता है। ऐसे में न ठंडा पानी पिएं न गर्म। बस दोनों को मिक्स कर लें और फिर वॉक करने के बाद इसे पिएं। यानी कि सर्दियों में वॉक करने के बाद गुनगुना पानी पिएं जो कि पूरी सेहत के लिए हर प्रकार से फायदेमंद है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
सबसे आसान ध्यान विधि क्या है जल्दी आत्मा ज्ञान प्राप्त करने के लिए?
“साक्षी में प्रवेश कर विचारों को देखने वाली भगवान शिव की बेजोड़ ध्यान विधि।”
शिव ने कहा है “होश को दोनों भौहों के मध्‍य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो। देह को पैर से सिर तक प्राण तत्‍व से भर जाने दो, ओर वहां वह प्रकाश की भांति बरस जाए।”
वह विधि पाइथागोरस को दी गई थी। पाइथागोरस यह विधि लेकर ग्रीस गया। और वास्‍तव में वह पश्‍चिम में सारे रहस्‍यवाद का उद्गम बन गया। स्‍त्रोत बन गया। वह पश्‍चिम में पूरे रहस्‍यवाद का जनक है।
यह विधि बहुत गहन पद्धतियों में से है। इसे समझने का प्रयास करो: ‘’होश को दोनों भौहों के मध्‍य में लाओ।‘’
आधुनिक मनोविज्ञान और वैज्ञानिक शोध कहता है कि दोनों भौंहों के मध्‍य में एक ग्रंथि है जो शरीर का सबसे रहस्‍यमय अंग है। यह ग्रंथि, जिसे पाइनियल ग्रंथि कहते है। यही तिब्‍बतियों का तृतीय नेत्र है—शिवनेत्र : शिव का, तंत्र का नेत्र। दोनों आंखों के बीच एक तीसरी आँख का अस्‍तित्‍व है, लेकिन साधारणत: वह निष्‍कृय रहती है। उसे खोलने के लिए तुम्‍हें कुछ करना पड़ता है। वह आँख अंधी नहीं है। वह बस बंद है। यह विधि तीसरी आँख को खोलने के लिए ही है।
‘’होश को दोनों भौंहों के मध्‍य में लाओ ।‘’……अपनी आंखें बंद कर लो, और अपनी आंखों को दोनों भौंहों के ठीक बीच में केंद्रित करो। आंखे बंद करके ठीक मध्‍य में होश को केंद्रित करो, जैसे कि तुम अपनी दोनों आँखो से देख रहे हो। उस पर पूरा ध्‍यान दो।
यह विधि सचेत होने के सरलतम उपायों में से है। तुम शरीर के किसी अन्‍य अंग के प्रति इतनी सरलता से सचेत नहीं हो सकते। यह ग्रंथि होश को पूरी तरह आत्‍मसात कर लेती है। यदि तुम उस पर होश को भ्रूमध्‍य पर केंद्रित करो तो तुम्‍हारी दोनों आंखें तृतीय नेत्र से सम्‍मोहित हो जाती हैं । वे जड़ हो जाती है, हिल भी नहीं सकती। यदि तुम शरीर के किसी अन्‍य अंग के प्रति सचेत होने का प्रयास कर रहे हो तो यह कठिन है। यह तीसरी आँख होश को पकड़ लेती है। होश को खींचती है। वह होश के लिए चुम्‍बकीय है। तो संसार भर की सभी पद्धतियों ने इसका उपयोग किया है। होश को साधने का यह सरलतम उपाय है। क्‍योंकि तुम ही होश को केंद्रित करने का प्रयास नहीं कर रहे हो; स्‍वयं वह ग्रंथि भी तुम्‍हारी मदद करती है; वह चुम्‍बकीय है। तुम्‍हारा होश बलपूर्वक उनकी और खींच लिया जाता है। वह आत्‍मसात हो जाता है।
तंत्र के प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि होश तीसरी आँख का भोजन है। वह आँख भूखी है; जन्‍मों-जन्‍मों से भूखी है। यदि तुम उस पर होश को लाओगे तो वह जीवंत हो जाती है। उसे भोजन मिल जाता है। एक बार बस तुम इस कला को जान जाओं। तुम्‍हारा होश स्‍वयं ग्रंथि द्वारा ही चुम्‍बकीय ढंग से खिंचता है। आकर्षित होता है। तो फिर होश को साधना कोई कठिन बात नहीं है। व्‍यक्‍ति को बस ठीक बिंदु जान लेना होता है। तो बस अपनी आंखें बंद करों, दोनों आँखो को भ्रूमध्‍य की और चले जाने दो, और उस बिंदु को अनुभव करो। जब तुम उस बिंदु के समीप आओगे तो अचानक तुम्‍हारी आँख जड़ हो जाएंगी। जब उन्‍हें हिलाना कठिन हो जाए तो जानना कि तुमने ठीक बिंदु को पकड़ लिया है।
शेष कल
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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