ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 26 मार्च 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 26 मार्च 2023

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
👣 26 मार्च 2023 दिन रविवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की वासन्तीय नवरात्रि का पांचवा दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को वासन्तीय नवरात्रा के पांचवे दिन की माता चंडी की पाँचवी स्वरूप माँ स्कंदमाता के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – पञ्चमी 18:47 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी : तिथि के स्वामी नाग देवता हैं। तथापंचमी के देवता नागराज है।
💫 नक्षत्र – कृतिका 16:16 PM तक उपरान्त रोहिणी नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : कृतिका नक्षत्र को कृत्तिका भी कहते हैं। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं।नक्षत्र के देवता अग्नि देव है।
🔊 योग – प्रीति 01:45 AM तक उपरान्त आयुष्मान योग है।
प्रथम करण : बालव – 04:32 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:54 ए एम, मार्च 27 तक
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : रविवार का (अशुभ गुलिक) काल 03:31 पी एम से 05:03 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:56:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:04:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:45 ए एम से 05:32 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:08 ए एम से 06:19 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:34 पी एम से 06:58 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:35 पी एम से 07:46 पी एम
💧 अमृत काल : 11:33 ए एम से 01:12 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, मार्च 27 से 12:50 ए एम, मार्च 27
❄️ रवि योग : 02:01 पी एम से 06:18 ए एम, मार्च 27
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र महिला को स्वर्ण भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्रीपंचमी, श्री लक्ष्मी पंचमी, श्री राम राज्य महोत्सव, संगीतकारआनंद शंकर पुण्य तिथि, भारतीय राजनीतिज्ञ अनिल बिस्वास स्मृति दिवस, अभिनेता धीरेन्द्र नाथ गांगुली जन्म दिवस, जीवन, शांति और न्याय का राष्ट्रीय दिवस, विमल प्रसाद चालिहा जन्मोत्सव, बीरेंद्र नारायण चक्रवती पुण्य तिथि, महादेवी वर्मा जन्म दिवस, अनिल बिस्वास स्मृति दिवस, बांग्लादेश स्वंतत्रता दिवस, Independence Day of Bangladesh (स्वतंत्रता दिवस)
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देने वाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
शास्त्रों में तुलसी के पौधे को लक्ष्मी का रूप बताया गया है, यानि जहां पर तुलसी होती है वहां लक्ष्मी जी का आगमन होता ही है। यह एक अद्भुत औषधिय पौधा है। तुलसी का पौधा घर में लगाने से निगेटिव ऊर्जा नष्ट होती है और पॉजिटिव ऊर्जा बढ़ती है। तुलसी का पौधा घर में आने वाली विपत्ति को रोकने के साथ-साथ रोगों के नाश के लिए भी एक अच्छा उपाय है। साथ ही यह परिवार की आर्थिक स्थिति के लिए भी शुभ होती है। तुलसी का पौधा घर में होने से मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तनाव और बेचैनी कम होती है
बिना कपड़ों के अगर सोते हैं, तो इससे तनाव और बेचैनी कम होती है, खासतौर पर अगर आप अपने पार्टनर के साथ सोते हैं तो। स्किन से स्किन का कॉन्टेक्ट शरीर में ऑक्सीटोसिन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे तनाव का स्तर कम होता है। अगर आप अकेले सोते हैं, तो इससे आपका शरीर ठंडा रहता है, जिससे तनाव और बेचैनी कम होती है।
दिल की बीमारी और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम होता है
अमेरिका के सीडीसी के अनुसार, नींद की कमी दूसरी दिक्कतों के साथ दिल की बीमारी और डायबिटीज के खतरे को बढ़ाती है। अगर आप कपड़ों को उतार कर सोते हैं, तो इससे ज्यादा देर तक अच्छी नींद ले सकेंगे। जिससे दिल की बीमारी और डायबिटीज का जोखिम भी कम होगा।
वजन नहीं बढ़ता शोध से पता चलता है कि रात में अच्छी नींद न लेने से वजन बढ़ सकता है। अगर आप बिना कपड़ों के सोएंगे, तो इससे अच्छी नींद आएगी और वजन भी नहीं बढ़ेगा। इसके अलावा बिना कपड़ों के सोने से आपका शरीर ठंडा रहता है, जिससे ब्राउन फैट्स का उत्पादन ज्यादा होता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। शरीर में ब्राउन फैट्स की मात्रा बढ़ने से मोटापे और डायबिटीज का खतरा भी कम होता है।
🌿 आरोग्य संजीवनी ☘️
बेरीज में एंटी-इंफ्लेमेट्री तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। साथ ही, इसके सेवन से जोड़ों में जल्दी यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स नहीं बनते हैं। ऐसे में खून में यूरिक एसिड का लेवल कंट्रोल में रहता है। इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जामुन, स्ट्रॉबेरीज, चेरी और ब्लूबेरीज को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
गाजर ये एक मौसमी सब्जी है जो सर्दियों के दिनों में ज्यादा खाया जाता है। हालांकि, गर्मियों में भी गाजर का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ये शरीर के फ्री रेडिकल्स को कंट्रोल करने में भी मददगार होते हैं। साथ ही जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए भी गाजर का सेवन फायदेमंद होता है। आप इसका सेवन सलाद, सब्जी या जूस के रूप में कर सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
माता जगतजननी, जगदम्बा भवानी माता दुर्गा देवी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है। इन्हें स्कन्द कुमार कार्तिकेय की जननी के वजह से स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। कार्तिकेय को पुराणों में कुमार, शौर, शक्तिधर आदि के नाम से भी इनके शौर्य का वर्णन किया गया है। इनका वाहन मयूर है अतः इन्हें मयूरवाहन के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है।
नवरात्रि के नव दिनों तक व्रत और उपवास करनेवाले साधक का मन इस दिन अर्थात पांचवें दिन विशुद्ध चक्र में होता है। क्योंकि माता स्कन्दमाता की पूजा नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे रहते हैं। स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं। ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकड़े हैं। और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल का फुल पकड़ा हुआ है।
माता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी वजह से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। परन्तु मूल रूप में इनका भी वाहन सिंह ही है। स्कन्द माता की पूजा भक्तों को उनके माता के वात्सल्य से भर देता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से समस्त दुःखों से मुक्ति मिलती है। तथा व्यक्ति का मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है।
रूप और सौंदर्य की अद्वितिय आभा लिए हुए माता अभय मुद्रा में कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। पद्मासना देवी, विद्यावाहिनी दुर्गा तथा सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी यही स्कन्दमाता ही हैं। इनकी उपासना से साधक अलौकिक तेज प्राप्त कर लेता है। क्योंकि यही हिमालय की पुत्री पार्वती भी हैं। इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है। जो अपने पुत्रों से अत्यधिक प्रेम करती हैं।
इनको अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है। जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान ही स्नेह लुटाती हैं। स्कंदमाता की पूजा उसी प्रकार से करना चाहिए जैसे अन्य सभी देवियों का पूजन किया जाता है। शुद्ध चित से देवी का स्मरण करना चाहिए। तथा पंचोपचार, षोडशोपचार या फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार स्कन्दमाता की पूजा करने के पश्चात भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए।
जो भक्त देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की सम्पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि सदैव बनी रहती है। वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में इनकी पूजा करने से माता पूर्णत: वात्सल्य लुटाती हुई नज़र आती हैं। और नि:संतानों की गोद भी अनायास ही भर देती हैं।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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