Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 28 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 28 अक्टूबर 2023
28 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। आज अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि पुर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा का पावन व्रत है। आज ही के दिन हमारे परम आराध्य भगवान नटवर रास-राशेश्वर योगीराज कृष्ण-कन्हैया ने वृन्दावन में रास रचाया था। कहा जाता है, कि आज की रात आकाश से अमृतवर्षा होती है। आज रात शुद्ध दूध से घी और शर्करा से युक्त निर्मित खीर को पूर्ण चन्द्रमा की अमृतमयी चाँदनी में रख दिया जाता है। कुछ समय बाद उस खीर को प्रसाद के रूप में सभी में बाँटकर ग्रहण किया जाता है। इस अमृतवर्षा से सिंचित खीर में अनेकों रोगों को मिटाने की क्षमता होती है। परन्तु इस वर्ष एक विशेष स्थिति उत्पन्न हो गई है। क्योंकि आज की रात 01 बजे के बाद खंडग्रास चन्द्रग्रहण लग रहा है। अब इसमें समान्य सी बात है, कि ग्रहण का सूतक भी लगेगा। जो 9 घंटे पहले से ही शुरू हो जाएगा। तो शाम 04 बजे से ही ही ग्रहण का सूतक लग जाएगा। अगर विशिष्ट त्यौहार के नाते सूतक कि अवधि 06 घंटा भी मान लें तो भी शाम 07 बजे चन्द्रमा ही नहीं निकलता तो चाँदनी कहाँ से आएगी। आप सभी सनातनियों को शरद पूर्णिमा व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। आपके जीवन में भी धन-धान्य एवं हर प्रकार के खुशियों का रास सदैव रचता रहें ऐसी हमारी शुभकामना है!!
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 01:53 AM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रेवती 07:31 AM तक उपरांत अश्विनी 05:54 AM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं। नक्षत्र के देवता पूषा हैं।
🔊 योग – वज्र योग 10:52 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 03:02 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 01:53 ए एम, अक्टूबर 29 तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:24:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:36:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:47 ए एम से 05:39 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:13 ए एम से 06:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:41 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:40 पी एम से 06:05 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:40 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 11:11 पी एम से 12:41 ए एम, अक्टूबर 29
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 29
❄️ रवि योग : 06:30 ए एम से 07:31 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सवा किलो काले चने चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/शरद पूर्णिमा व्रत/कार्तिक स्नान प्रारंभ/ लक्ष्मींद्र पुजा/ आयंवील ओली समाप्ति (जैन)/ कुमार पूर्णिमा/ महर्षि बाल्मीकि जयन्ती/ कार्तिक स्नानारंभ/ पूर्णिमा समाप्ति रात्रि 01.53/ पंचक समाप्ति 07.30/ मीराबाई जयंती, बिल गेट्स जन्म दिवस, अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन दिवस, चेक गणराज्य स्वतंत्रता दिवस, ऑस्ट्रिया और हंगरी से स्वतंत्रता दिवस, लोकप्रिय उपन्यासकार राजेंद्र यादव पुण्य तिथि, (भारतीय रिज़र्व बैंक के 24वें गवर्नर) उर्जित पटेल जयन्ती, अशोक चव्हाण, पूर्व मुख्यमंत्री जन्म दिवस, जहांगीर, मुगल सम्राट स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इस पूर्णिमा तिथि के देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णिमा तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🏜️ Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे घर में लगी पक्षियों की तस्वीरों के बारे में पक्षियों की तस्वीरें घर में पॉजिटिव रिजल्टस लेकर आती हैं। कई लोगों को काफी मेहनत और लगन से काम करने के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती, तो ऐसे लोगों को अपने घर में पक्षियों की तस्वीर लगानी चाहिए। वास्तु की दृष्टि में पक्षियों को शुभ माना जाता है। जहां पक्षी होते हैं वहां का वातावरण अपने आप ही आनंनदित हो जाता है। वैसे तो आप असली के पक्षी भी आपने घर में रख सकते हैं, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं चाहते तो पक्षियों की तस्वीर अथवा मूर्ति घर में रखने से भी सकरात्मक ऊर्जा का निवास होता है और नकारात्मक उर्जा से छुटकारा मिलता है। इससे आपकी सफलता के योग बनने शुरू हो जाते हैं । पक्षियों की तस्वीर लगाने के लिये पूर्व दिशा का चुनाव करना सबसे अच्छा होता है।
▶️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्रेम में धोखा मिला, तो कैसे करें मूव ऑन
भगवाव श्रीकृष्ण ने गीता में कहा कि किसी भी इंसान से ज्यादा लगाव हानिकारक बन जाता है। क्योंकि इससे आपके अंदर उम्मीदें जागती है और किसी से उम्मीद रखना दुख का सबसे बड़ा कारण बनता है।
श्रीकृष्ण ने कहा है कि जीवन के अहम फैसले हमें खुद करने चाहिए। इसके लिए हमें बाद में अफसोस नहीं करना चाहिए।
गीता में कहा गया है कि शंका और आशंका करने वालों को कभी सफलता नहीं मिलती. इसलिए मन में कभी किसी को लेकर या किसी बात को लेकर संदेह नहीं रखना चाहिए। जो लोग दृढ़ विश्वास से भरे होते हैं वो जीवन में जरूर सफल होते हैं।
भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, प्रेम किसी को पाना नहीं बल्कि उसमें खो जाना है। प्रेम छीन कर या मांग कर हासिल नहीं किया जाता बल्कि प्रेम में त्याग करना पड़ता है।
गीता के दूसरे अध्याय के 14वें श्लोक में भगवान कृष्ण ने कहा है कि सुख और दुख का भाव इंद्रियों से निकलता है. इंद्रियां मौसम की तरह बदलती हैं। यानि जीवन में दुख के बाद सुख समान भाव से चलता रहेगा।
🥒 आरोग्य संजीवनी 🫒
आंतों में जमे हुए मल को साफ करने का कोई पक्का इंतजाम क्या हो सकता है?
हरड़,हर्रे,हरीतकी एकमात्र उपाय है जो आंतों में जमे हुए मल को आसानी से,बिना किसी तकलीफ एवं अन्य विरेचकों की तरह कमजोरी नहीं देता है।जहाँ,अन्य विरेचन क्रियाओं में कमजोरी एवं शरीर को कष्ट झेलना पड़ता है वहीं हरड़ पेट को सरलता से साफ करती है एवं शरीर में स्फूर्ति एवं ताजगी देती है।
(यह अनुभवित एवं प्रामाणिक है।)
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
आध्यात्मिक शक्ति कैसे प्राप्त होती है ?
हर इंसान में एक आत्मा होती है और वह खूब शक्तिशाली है। बस, उसके ऊपर के पड़े हुए कर्म संचय के आवरणों को हटाने का कार्य करना होता है और इंसान की सुप्त शक्तियां जागृत हो जाती हैं। जो आत्मा है वही हम हैं। हमारा जो वर्तमान परिचय है जो संस्कार है विचार है वृतियां हैं , इन्हें खत्म करते ही हम आत्म स्वरूप हो जाते हैं यानी आध्यात्मिक रूप से शक्तियों के स्वामी। आत्मा के ऊपर पड़े हुए आवरण हटाने के लिए ध्यान मार्ग परिवार में रहने वाले लोगों के लिए सर्वोत्तम है। एक ध्यान विधि जो मैं कुछ बरसों से कर रहा हूं वह मुझे सर्वोत्तम लगी क्योंकि इसका परिणाम अनुपात बेहद प्रभावशाली है अन्य विधियों से। इसको एक माह अभ्यास करके सबको देखना चाहिए। अगर सही लगे तो जारी रखें अन्यथा मुक्त हैं आप। प्रथम बार संसार में ऐसी साधना विधि आई है जो भौतिक जीवन और आध्यात्मिक जीवन का संतुलन बनाकर चलती है। भौतिक जीवन की कठिनाइयों को दूर करती चलती है और इसी जन्म में मोक्ष तक देने में सक्षम है। कुछ ही समय में शरीर की बीमारियां दूर होने लगती है। आने वाली घटनाओं का आभास होने लगता है। कपटी नकारात्मक लोग आपसे दूर होने लगते हैं। जादू टोना निम्न तामसिक शक्तियों का आप पर असर होना बंद होने लगता है। मन में संतुष्टि और शांति का भाव आने लगता है। तनाव को सहन करने की शक्ति आने लगती है। खेचरी मुद्रा से अमृत द्रव्य मुंह में आने लगता है। ध्यान में देवी देवताओं के दर्शन होने लगते हैं। पिछले संचित कर्म संचय के कारण अब तक जो भोग लिया है , वह भोग लिया, मगर यह ध्यान शुरू करने के बाद से आगे कर्म संचय नहीं भोगना पड़ता क्योंकि कुंडलिनी महा शक्ति उन्हें समाप्त करने लगती है और इसी वजह से विघ्न विदा हो जाते हैं या अति न्यून होकर निकल जाते हैं। अगर कोई लोग आपके प्रति साजिश करते हैं तो वे असफल हो जाते हैं। दुर्घटना होने का खतरा नहीं रहता। दवाई से मुक्ति और डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ता। एक अदृश्य सुरक्षा कवच साधक के साथ हमेशा रहने लगता है। जहां किसी गड़बड़ से आपके नुकसान की संभावना हो सकती है वहां आपको पहले ही रोक दिया जाता है। नशे की लत छूट जाती है। सबके प्रति सकारात्मक भाव आने लगता है। सात चक्र सक्रिय होने लगते हैं और चक्रों के लाभ मिलने लगते हैं।
यह उपरोक्त बातें मेरे अनुभव की है और कुछ इसमें हमारे सिद्ध योग करने वाले मेरे ग्रुप तथा सर्किल के साधक साधिकाओं के अनुभव भी है। ऐसे अनुभूतियों, अनुभवों की मोटी किताबें बन सकती हैं। मेरे साथ सौ से ऊपर लोग जुड़े हैं जो यह ध्यान करते हैं। यह नि:शुल्क है। इसकी विधि विवरण और गुरु मंत्र आदि मोबाइल या ईमेल से मंगा सकते हैं। रोज सुबह शाम पंद्रह मिनट ध्यान का नियम होता है। बाकी आपकी लाइफ जैसी चल रही है उसमें अपनी तरफ से बदलाव नहीं करना होता बल्कि उसमें सहज बदलाव आना शुरू हो जाता है। जोधपुर स्थित अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र द्वारा इस अद्भुत योग के कार्यक्रम स्कूलों, कालेजों, संस्थाओं आदि जगह करवाए जाते हैं। विश्व स्तर पर लोग इसे कर रहे हैं। यह सिद्ध योग साधना घर बैठे शुरू करने हेतु मैसेज बॉक्स में संपर्क कर सकते हैं। आपको नि:शुल्क प्रेषित की जाएगी।
जय श्री कृष्णा।
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⚜️ सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज शरद पूर्णिमा है और आज ही के दिन सांसारिक जीवन एवं आध्यात्मिक जीवन का अंतर भगवान श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में गोपियों के साथ रास रचाकर बताया था। इसीलिये आज के दिन देश के बहुधा क्षेत्रों में रात्रि में लोग नृत्य-गीतादि के आयोजनों के साथ खुले आसमान के तले खीर बनाकर भगवान को समर्पित कर उसे प्रसाद की तरह मिल-बाँटकर खाते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस रात्रि आसमान से चन्द्रमा अपनी किरणों के साथ अमृत की वर्षा करता है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा तिथि में उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।
पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन माता महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।


