Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 13 अक्टूबर 2023
13 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज चौदहवें दिन का श्राद्ध किया जाएगा। वर्ष भर में किसी के भी पूर्वज किसी भी मास एवं किसी भी पक्ष के चतुर्दशी तिथि को गुजरे हों उनका श्राद्ध आज ही किया जाएगा। आप सभी सनातनियों को “चौदहवें दिन का श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि है।चतुर्दशी तिथि 09:51 PM तक उपरांत अमावस्या
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर।चतुर्दशी तिथि में भगवान देवदेवेश्वर सदाशिव की पूजा करके मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से समन्वित हो जाता है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 02:11 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।
📣 योग – ब्रह्म योग 10:05 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 08:54 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : शकुनि – 09:50 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:41 ए एम से 05:31 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:06 ए एम से 06:20 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:30 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:03 पी एम से 02:49 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:54 पी एम से 06:19 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:54 पी एम से 07:09 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:43 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 14
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : भद्रा/चतुर्दशी श्राद्ध/दग्धशस्त्रादिहंतानां श्राद्ध/ अंत्योदय दिवस, नेशनल ट्रेन योर ब्रेन डे, नेशनल ट्रांसफर मनी टू योर सन डे, वर्ल्ड एग डे, नेशनल नो ब्रा डे, वेट नर्स डे, विश्व दृष्टि दिवस, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अभिनेता अशोक कुमार जयन्ती, अभिनेत्री पूजा हेगड़े जन्म दिवस, पार्श्व गायक और अभिनेता किशोर कुमार स्मृति दिवस, विश्व डाक दिवस (सप्ताह), राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह), अमावस्या प्रारंभ रात्रि 09 .50
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗺️ Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे घर में शौचालय की दिशा के बारे में। होगा। सबसे पहले शुरुआत करते हैं पूर्व दिशा से। पूर्व दिशा में शौचालय बनवाने से आपकी जीवन की गति गडबड़ा सकती है। आपके ऊपर मुसीबतों के बादल घराने लगेंगे।आपके बड़े बच्चे की तरक्की में बाधा होगी। उन्नति का मार्ग अवरूद्ध हो सकता है। जीवन में एक ठहराव की स्थिति हो सकती है और जैसे रूका हुआ पानी सड़ जाता है, वैसे ही जीवन में ऊब महसूस होने लगती है।
वास्तु के अनुसार हमारे पैरों पर इस दिशा के शौचालय का बुरा असर पड़ सकता है और हर दिन सुबह 5 से 7 बजे के बीच हमें आवांछित स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। अगर किसी वजह से आपके घर की पूर्व दिशा में शौचालय है तो शौचालय की छत में बांस का प्रयोग करके दुष्टप्रभावों को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कच्चा पपीता ऑस्टियोआर्थराइटिस, गाउट और गठिया के रोगियों के लिए सूजन-रोधी यानी एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। इसलिए भी हाई यूरिक एसिड के मरीज इसे आराम से खा सकते हैं। इसमें फाइबर और रफेज की अच्छी मात्रा होती है जो कि प्यूरिन मेटाबोलिज्म को तेज करता है और मल के जरिए अतिरिक्त प्यूरिन को बहार निकालने में मदद करता है।
कच्चा केला और पपीता खाने का सही तरीका ये है कि इन दोनों की सब्जी बनाकर खाएं। इसके अलावा आप इन दोनों को उबालकर और इनका चोखा बनाकर खा सकते हैं। ये पेट की कई समस्याओं को कम करने में मददगार है। तो, अगर आपका यूरिक एसिड बढ़ा रहता है तो आप अपनी डाइट में इन दो फलों को कच्चा खा सकते हैं।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍓
ये है शराब छुड़वाने का अचूक टोटका शराब एक सामाजिक बुराई है। शराब न सिर्फ एक व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार को नष्ट कर देती है। शराब की लत जिसे लग जाती है उसका जीवन खराब हो जाता है। तंत्र शास्त्र के अतंर्गत ऐसे कई टोटके हैं जिनसे शराब की लत को छुड़वाया जा सकता है। उन्हीं में से एक यह भी है-
👉🏽 टोटका
शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार को सुबह सवा मीटर काला कपड़ा तथा सवा मीटर नीला कपड़ा लेकर इन दोनों को एक-दूसरे के ऊपर रख दें। इस पर 800 ग्राम कच्चे कोयले, 800 ग्राम काली साबूत उड़द, 800 ग्राम जौ एवं काले तिल, 8 बड़ी कीलें तथा 8 सिक्के रखकर एक पोटली बांध लें। फिर जिस व्यक्ति की शराब छुड़वाना हो उसकी लंबाई से आठ गुना अधिक काला धागा लेकर एक जटा वाले नारियल पर लपेट दें।
🌹 गुरु भक्ति योग 🌸
बुद्ध ने पेड़ के नीचे बैठ कर ऐसा क्या किया? अगर मैं गलत नहीं हूँ, तो आपके मन के एक और प्रश्न को भांप रहा हूँ। कि क्या मेरे भी पेड़ के नीचे बैठने और वही करने से मैं भी वैसा ज्ञान पा सकता हूँ?
छोटी-मोटी बात नहीं, बात सिद्धार्थ के बुद्ध बन जाने के बारे में है। इसलिए थोड़ा सा विस्तार में देखना ज़रूरी होगा।
सबसे पहली बात है जिज्ञासा। जिज्ञासा ही ज्ञान-तृष्णा का आधार है। आपने छोटे बच्चों को देखा होगा ना कि वे कितने सवाल करते हैं। बारिश क्यों होती है, साँप ज़हरीला है तो अपने ज़हर से क्यों नहीं मरता, मेरे माँ-बाप मुझे कहाँ से लाए थे, जैसे कितने सवाल वे सबसे करते रहते हैं। उनके लिए ये सब जानना पढ़ाई जैसा बोझिल काम नहीं है। अपितु उनके लिए ये नए संसारों के दरवाज़े खुलने जैसा है।
परंतु बहुत कम उम्र में ही उनकी जिज्ञासा पर वार कर दिया जाता है। सवाल मत करो। फालतू बातें मत पूछो, पढ़ाई पर ध्यान दो। जिज्ञासा को ख़त्म कर दिया जाता है। बचपन से ही करियर, नौकरी, विदेश, तंख्वाह के फेर में उन्हें डाल दिया जाता है। फिर भी बच्चे के दिमाग़ में आता है कि कोई आविष्कार कर दिया तो प्रसिद्धि और अरबों रुपए मिलेंगे। लेकिन इस प्रलोभन में बहुत अधिक अनिश्चितता जुड़ी हुई है। क्या पता कि कोई नया आविष्कार ना कर पाएँ? क्या पता कि नए अर्जित किए हुए ज्ञान का कितना आर्थिक मूल्य लगे या नहीं? इसलिए इन सब लालच की वजह से शोध करना संभव नहीं है। जिज्ञासा और उससे उत्पन्न ज्ञान-तृष्णा ही आपको उकसाती है जवाब ढूँढने के लिए।
न्यूटन को जिज्ञासा हुई कि चीज़ें नीचे क्यों गिरती हैं? बुद्ध ने जब वृद्ध, बीमार और मरते हुए लोगों को देखा तो वे भाव-विह्वल हो उठे। उन्हें जिज्ञासा हुई कि क्या ज़िंदगी से दुःख ख़त्म हो सकता है? जिज्ञासा के साथ ही उनके मन में भावुकता थी कि दुनिया का दुःख मैं कैसे दूर करूँ?
दूसरी बात है बुनियादी ज्ञान। जो बिल्कुल ही निरक्षर है, वह भला किसके आधार पर शोध करेगा? जिसका इतिहास का ज्ञान अफवाहों से भरा है, जिसे देश की समस्याों का सही जायज़ा नहीं, जो सरकारी काम के आँकड़े और रिपोर्ट देखना नहीं जानता, वह उचित राजनीतिक विचार कहाँ से लाएगा? जिसमें भावुकता नहीं, वह अध्यात्म कहाँ से पाएगा?
बुद्ध ने राजमहल में तो केवल सुख और ऐश्वर्य देखा। जब वे बाहर निकले, तब उन्होंने दुनिया को पूर्ण रूप से देखा। सुख के साथ ही दुःख को भी देखा। तभी उन्हें आभास हुआ कि कोई समस्या है।
(शेष कल)
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।


