ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 13 नवम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 13 नवम्बर 2023

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – कार्तिक मास कृष्ण पक्ष सोमवार अमावस्या तिथि 02:57 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथी स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 03:22 AM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र का स्वामी गुरू है।विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं।
🔊 योग – सौभाग्य योग 03:23 PM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : नाग – 02:56 पी एम तक
द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 02:50 ए एम, नवम्बर 14 तक
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:34:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:26:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:39 ए एम से 05:29 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:04 ए एम से 06:20 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:38 ए एम से 12:23 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:06 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:41 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 06:23 पी एम से 08:01 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:35 पी एम से 12:26 ए एम, नवम्बर 14
सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:23 ए एम, नवम्बर 14 से 06:20 ए एम, नवम्बर 14
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को श्वेत वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अन्नकूट चंद्र दर्शन गोवर्धन पूजा/ सर्वार्थसिद्धि योग/देवपितृकार्ये/ दर्श अमावस्या/ सोमवती अमावस्या दोपहर 02.56 तक/ केदार गौरी व्रत/ अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि जन्मोत्सव, अभिनेत्री जूही चावला जन्म दिवस, शिक्षाशास्त्री मुकुन्द रामाराव जयकर जन्म दिवस, पंजाब के शासक महाराजा रणजित सिंह जयन्ती, विश्व अनाथ दिवस , राष्ट्रीय संगीतकार आलिंगन दिवस, सिम्फोनिक मेटल दिवस, ऑड सॉक्स दिवस, विश्व दयालुता दिवस, विश्व एंटीबायोटिक जागरूकता सप्ताह, 13-19 नवंबर [डब्ल्यूएचओ], अमावस्या समाप्ति दोपहर 02.56
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा को कद्दू एवं कूष्माण्ड तथा द्वितीया तिथि को कटेरी के फल का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि और सिद्धिप्रद तिथि मानी जाती है। इसके स्वामी अग्नि देवता हैं और यह तिथि नन्दा नाम से विख्यात है।
🗽 Vastu tips 🛕
उन्नति के लिए घर में किस दिशा में कैसी रंगोली बनाएं पिरामिड युक्त तोरण लगाने से परहेज करें। उत्तर या उत्तर पूर्व दिशा में रंगोली लहरिया आकार की बनाएं। उन्नति के नये अवसरों को आमंत्रित करने के लिए पूर्व में अंडाकार बनायें और दक्षिण में त्रिकोणाकार बनाएं। इससे आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। घर में समृद्धि के लिए उत्तर व उत्तर पूर्व दिशा को साफ-सुथरा रखें। ये स्थान धन रखने के लिए उपयुक्त हैं पर यदि वास्तव में हम धन, सुख, समृद्धि अपने जीवन में लाना चाहते हैं, तो जरूरी है कि हम स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाएं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
किया कराया , टोना – जादू , तंत्र अभिचार के अन्य लक्षण
एकदम घर की खुशहाली गायब होना , चलता हुआ व्यापर ठप्प होना , कर्जा हो जाना।
हर समय मानसिक अशांति, सांसो का भारीपन , तेज गति से चलना , गले में खिंचाव आना ।
अचानक घर में किसी की असामयिक मौत , या बिना लक्षणों वाली बीमारी होना , जो डॉक्टरों की समझ नहीं आती।
हर समय किसी की उपस्थिति का संदेह होना , शरीर या सर में भारीपन महसूस होना , शरीर में चोट लगने पर पाए जाने वाले नीले निशान जब कि चोट ना लगी हो |
सही तरीके से नींद ना आना , व्यक्ति के अंदर कुंठा , निराशा और किसी भी काम के प्रति उत्साह की कमी।
कोर्ट कचहरी , बिना मतलब के लड़ाई झगड़ा , बिना किसी कारण के बात में कलह की स्थिति पैदा होना।
अगर इस तरह के लक्षण दिखाई पड़े तो समझ जाना चाहिए यह सब तंत्र अभिचार का प्रभाव है , तथा उसका निदान करने का उपाय करना चाहिए |
🍶 आरोग्य संजीवनी 🍻
कई बीमारियों में फायदेमंद आंवला आंवले की खास बात ये है कि इसका सेवन डायबिटीज, हाई बीपी समेत कई बीमारियों से से बचाव में मदद करता है। इसका विटामिन सी धमनियों के लिए एक स्क्रब की तरह काम करता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। ये खून को पतला करता है, साथ ही हाई कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर के खतरे को भी कम करता है। इसके अलावा जिनको स्किन और लिवर आदि से जुड़ी समस्याएं हैं उनके लिए भी आंवला एक सुपरफूड है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज अग्निदेव से धन एवं तेज प्राप्त करने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।
विश्वकर्मा को आठ वसुओं में कनिष्ठतम प्रभास तथा देवगुरु बृहस्पति की भगिनी वरस्त्री के पुत्र हुए प्रजापति विश्वकर्मा। विश्वकर्मा अनेक हस्त-कलाओं के आविष्कारक तथा उनमें पारङ्गत माने जाते हैं; काष्ठ-कला इनमें से एक है। विश्वकर्मा के पाँच पुत्रों के वंशज लोहार, सुनार, काँस्यकार, शिल्पकार, तथा काष्ठकार के व्यवसाय करने वाली जातियों में विकसित हुए। संयुक्त रूप से यह सभी विश्वकर्मा ब्राह्मण कहलाते हैं। यह विश्व-ब्राह्मण, पाञ्चाल ब्राह्मण, जाङ्गीड ब्राह्मण, आदि नामों से भी जाने जाते हैं।
यह 1818 की बात है। इस वर्ष दक्षिण भारत में एक विवाद हुआ, जिसमें एक ब्राह्मण, पञ्चानन कौण्डिन्य, ने एक लुहार पण्डित द्वारा एक विवाह सम्पन्न करवाने पर आपत्ति की; कि यह अधिकार मात्र ब्राह्मणों को ही प्राप्त हैं तथा लुहार ब्राह्मण नहीं हैं। किन्तु, पंचनमवरु के सामूहिक नाम से जाने जाने वाले सुनार, काष्टकार, लोहार, ताम्रकार और पत्थर काटने वाले शिलावट) स्वयं को विश्वकर्मा और उनके पाँच पुत्रों (मनु, मय, शिल्प, त्वस्त्र, और दैवज्ञ) के वंशज मानते हुए स्वयं को विश्व-ब्राह्मण अथवा विश्वकर्मा ब्राह्मण कहते हैं; तथा इस प्रकार उन्हें विवाह आदि संस्कार करवाने का भी अधिकार है। इस बात पर विवाद छिड़ा और यह बात चित्तूर के न्यायालय में गई। जहाँ, पौराणिक साक्ष्य के आधार पर विश्वकर्मा समाज को ब्राह्मणों के रूप में मान्यता मिली।
वस्तुतः कार्य के आधार पर जाति का निर्माण और जातियों को वर्ण से जोड़ना एक ऐसी परम्परा है जिसमें शास्त्रानुसार एक ही पिता की विभिन्न सन्तानों के वंशजों को उच्च और शूद्र वर्णों में बाँट दिया गया। बहुधा यह तर्क दिया जाता है कि इसमें माता का वर्ण भी सन्तान का वर्ण निश्चित करता है; और इस आधार पर विश्वकर्मा के वंशज अपनी आदि-माता का वर्ण उच्च सिद्ध करने में सफल रहे।
समस्या यह है कि जिन लोगों ने अपनी जीविका के लिए अन्य व्यवसाय चुने (पौरुषेय ब्राह्मण), किन्तु, विद्याभ्यास भी करते रहे, उन्हें शास्त्रजीवी (आर्ष ब्राह्मण, चाहे उन्होंने विद्या पाई भी न हो) अपने समकक्ष मानने से कोताही करते आ रहे हैं। मध्य-युग की इसी मान्यता ने भारतीय समाज में विभाजन किया है।
भारत से हिन्दू धर्म इंडोनेशिया गया और फिर वहाँ वह स्वतन्त्र रूप से पनपा। वहाँ के हिन्दू जाति प्रथा न मान कर वर्ण-व्यवस्था मानते हैं। पिता का उपनाम न अपना कर यदि पुत्र किसी अन्य व्यवसाय में जाता है तो वे उस व्यवसाय के अनुकूल उपनाम अपनाते हैं। वहीँ, भारत में वर्ण-व्यवस्था के विकृत स्वरूप को अपना कर हमने जातिप्रथा का जो विषवृक्ष बोया है उसके फल हम अब भोग रहे हैं। अतः निवेदन है कि जाति और जाति के आधार पर वर्ण का भेद करते हुए किसी को अपने से कमतर अथवा स्वयं को श्रेष्ठतर सिद्ध करने का प्रयास हमारे समाज के लिए विनाशकारी होगा। हम सब मानव हैं; हम सभी समान मानवाधिकारों की अर्हता रखते हैं। इस अधिकार का सबसे सरलतम स्वरूप है, सभी का मानवों के रूप में समान उचित सम्मान।

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