Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 15 दिसम्बर 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 15 दिसम्बर 2024
15 दिसम्बर 2024 दिन रविवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। आज स्नान-दानादि से पुण्य प्राप्ति की पूर्णिमा है। साथ ही आज माता षोडशीत्रिपुरसुन्दरी जी की जन्म जयन्ती है। आप सभी सनातनी बंधुओं को “पूर्णिमा एवं माता षोडशीत्रिपुरसुन्दरी जी के जन्म जयन्ती” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌝 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 02:31 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 02:20 AM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। तथा वहीं इसके देवता चंद्रमा हैं।
⚜️ योग – शुभ योग 02:03 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : बव – 02:31 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 01:25 ए एम, दिसम्बर 16 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 07:07:34
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:58:53
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:17 ए एम से 06:12 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:44 ए एम से 07:06 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:37 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:41 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:24 पी एम से 05:51 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:26 पी एम से 06:48 पी एम
💧 अमृत काल : 06:06 पी एम से 07:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:44 ए एम, दिसम्बर 16
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को सवाकिलो गुड़ भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – स्नान दान पूर्णिमा/खरमास (मलमास) प्रारंभ/ पूर्णिमा समाप्ति दोपहर 02.31/ माता षोडशीत्रिपुरसुन्दरी जन्म जयन्ती”/ स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी सरदार वल्लभ भाई पटेल स्मृति दिवस, कुशल पत्रकार गौर किशोर घोष पुण्य तिथि, भारतीय महिला पहलवान गीता फोगाट जन्म दिवस, भारतीय पार्श्व गायिका उषा मंगेशकर जयन्ती, आचार्य श्रीतुलसी दीक्षा दिवस (जैन), अभिनेता रविंदर कपूर जन्म दिवस, हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इस पूर्णिमा तिथि के देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णिमा तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🛕 Vastu tips_ 🗽
भूमि दोष को दूर करने के उपाय
भूमि दोष को दूर करने के लिए आपको वास्तु शांति करवानी चाहिए। अगर आप साल में एक बार भी घर में वास्तु शांति करवाते हैं तो भूमि से जुड़े कई दोष दूर हो जाते हैं।
अगर आप भूमि को डेढ़ या दो फिट खुदवाते हैं और इसकी मिट्टी को कहीं दूर फिंकवा देते हैं, तो वास्तु के अनुसार भूमि दोष दूर हो जाता है।
भूमि दोष को दूर करने के लिए आपको केले, तुलसी आदि के पौधे जमीन पर लगाने चाहिए।
भूमि दोष से बचने के लिए घर में काले और लाल रंग का प्रयोग कम करना चाहिए।
हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती और गीता का घर में पाठ करने से भी भूमि दोष दूर होने लगता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां_ ⚜️
त्वचा और शरीर की सफाई चंद्रप्रभा वटी शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे त्वचा पर होने वाले मुहांसों, फुंसी और पिगमेंटेशन जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यह रक्त को शुद्ध करती है और शरीर में अंदर से सफाई का काम करती है, जिससे त्वचा में निखार आता है।
मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में राहत यह वटी जोड़ों और मांसपेशियों में होने वाले दर्द को कम करने में सहायक है। यह वात दोष को संतुलित करती है, जिससे गठिया, सियाटिका और अन्य दर्दनाक स्थितियों में राहत मिलती है। यह शरीर में सूजन को भी कम करती है और दर्द को कम करने के लिए एक प्राकृतिक उपाय के रूप में काम करती है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
सफेद मूसली को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली प्रजनन टॉनिक के रूप में जाना जाता है। यह पुरुषों की प्रजनन क्षमता को सुधारने और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में अत्यधिक प्रभावी होती है। इसके नियमित सेवन से यौन स्वास्थ्य में सुधार होता है और शारीरिक ताकत भी बढ़ती है।
कैसे उपयोग करें: सफेद मूसली का चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम लिया जा सकता है।
शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक दवाएँ एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प प्रदान करती हैं। शिलाजीत, अश्वगंधा, कौंच बीज, गोक्षुर और सफेद मूसली जैसी जड़ी-बूटियाँ इस समस्या में काफी प्रभावी होती हैं।
स्वास्थ्य और शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए आयुर्वेद का मार्ग अपनाएं और प्राकृतिक तरीकों से अपनी प्रजनन क्षमता को सुधारें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
पौराणिक काल की बात है, जब सृष्टि के रचयिता और पालनकर्ता ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों में व्यस्त थे, उस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर गहन ध्यान में लीन थे। उनके साथ माता पार्वती भी थीं, जो हमेशा शिव के साथ रहकर उनकी सेवा में तल्लीन रहती थीं। लेकिन एक दिन कुछ असामान्य हुआ।
माता पार्वती को अचानक अत्यधिक भूख लग गई। भूख की वेदना इतनी तीव्र थी कि उन्होंने भगवान शिव को पुकारा और भोजन की याचना की। परंतु भगवान शिव उस समय गहरी तपस्या में थे और उन्होंने माता की बात का उत्तर नहीं दिया। पार्वती की भूख असहनीय होती जा रही थी, और चारों ओर देखने पर भी उन्हें भोजन का कोई साधन नहीं मिला।
माता पार्वती ने बार-बार भगवान शिव को पुकारा, लेकिन जब उत्तर नहीं मिला, तो उनकी भूख ने उन्हें क्रोधित कर दिया। क्रोध के आवेग में, उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया जिसे इतिहास में कभी नहीं भुलाया गया। माता पार्वती ने अपनी शक्ति का उपयोग करके स्वयं भगवान शिव को ही निगल लिया! यह घटना इतनी असामान्य और अद्भुत थी कि सारा कैलाश पर्वत जैसे थम गया।
जैसे ही भगवान शिव उनके शरीर के अंदर गए, उनकी शक्तियों के कारण माता पार्वती के शरीर से धुआं निकलने लगा। यह धुआं अत्यंत रहस्यमय था, मानो ब्रह्मांड की गूढ़ शक्तियां माता पार्वती के भीतर से प्रकट हो रही हों। उनके शरीर का स्वरूप बदलने लगा। उनकी सुंदरता की जगह एक विकृत और उग्र रूप ने ले लिया। उनकी आंखें तेज चमकने लगीं, और उनके चेहरे पर वैराग्य का भाव उभर आया।
भगवान शिव, जो योग और माया के स्वामी हैं, ने इस स्थिति को समझा। उन्होंने अपनी माया का उपयोग करके माता पार्वती के शरीर से बाहर आने का उपाय किया। जब वे बाहर निकले, तो उन्होंने माता पार्वती के उस अद्वितीय और धूम्र से व्याप्त स्वरूप को देखा। भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए माता से कहा:
“हे देवी, आपने मुझे निगल लिया और इस रूप को धारण किया। अब से आपका यह रूप ‘धूमावती’ नाम से जाना जाएगा। धुएं (धूम्र) से व्याप्त होने के कारण आपका नाम धूमावती होगा।”
उन्होंने आगे कहा: “जब आपने मुझे निगल लिया, तब आप विधवा का रूप धारण किया। अतः अब आप इस विधवा रूप में ही पूजी जाएंगी। यह रूप दु:ख, वैराग्य, और कठिन परिस्थितियों का प्रतीक होगा।”
भगवान शिव के इन शब्दों के बाद देवी धूमावती का स्वरूप और अधिक गूढ़ और रहस्यमय हो गया। वे एक वृद्ध स्त्री के रूप में प्रकट हुईं, जो विधवा का वेश धारण किए थीं। उनके केश खुले हुए थे, और उनके वस्त्र श्वेत थे। उनके हाथ में एक फटा हुआ झंडा था, जो सांसारिक माया के विनाश का प्रतीक था। उनका वाहन कौवा बना, जो मृत्यु और रहस्यमय शक्तियों का द्योतक है।
भगवान शिव ने देवी धूमावती को यह वरदान दिया कि जो भी सच्चे हृदय से उनकी आराधना करेगा, वह अपने दु:खों से मुक्ति पाएगा। देवी का संबंध ज्येष्ठा नक्षत्र से है, इसलिए उन्हें “ज्येष्ठा” भी कहा जाता है।
ऋषि दुर्वासा, भृगु, और परशुराम जैसे तपस्वियों ने देवी धूमावती की शक्ति को अपनी साधना में पाया। वे सृष्टि के कलह और कठिन परिस्थितियों की देवी मानी जाती हैं। इस कारण उन्हें “कलहप्रिय” भी कहा जाता है।
देवी धूमावती का उग्र स्वरूप भले ही भयावह प्रतीत हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी हैं। उनकी पूजा से भक्तों को दु:ख, दरिद्रता, और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। वे उन साधकों को विशेष कृपा प्रदान करती हैं, जो सांसारिक मोह-माया से मुक्त होकर वैराग्य का मार्ग अपनाते हैं।
देवी धूमावती की कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन की कठिनाइयों और दु:खों का सामना करने के लिए धैर्य और वैराग्य का होना आवश्यक है। उनका स्वरूप हमें यह याद दिलाता है कि सांसारिक चीजें क्षणभंगुर हैं, और असली सुख आत्मा की शांति और मुक्ति में है।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज शरद पूर्णिमा है और आज ही के दिन सांसारिक जीवन एवं आध्यात्मिक जीवन का अंतर भगवान श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में गोपियों के साथ रास रचाकर बताया था। इसीलिये आज के दिन देश के बहुधा क्षेत्रों में रात्रि में लोग नृत्य-गीतादि के आयोजनों के साथ खुले आसमान के तले खीर बनाकर भगवान को समर्पित कर उसे प्रसाद की तरह मिल-बाँटकर खाते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस रात्रि आसमान से चन्द्रमा अपनी किरणों के साथ अमृत की वर्षा करता है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा तिथि में उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।

