पिता की हत्या के बाद 13 साल की उम्र में संभाली घर परिवार की जिम्मेदारी
भाई बहनों को पढ़ा कर आर्थिक रूप से मजबूत किया अपना परिवार
पिता नहीं रहे तो बेटी ने उनका फर्ज निभाया संकट में परिवार को संभाला
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष
रिपोर्टर : विशाल शिल्पकार
बेगमगंज । आज के दौर में जहां बेटे एक समय बाद माता-पिता को छोड़कर चले जाते हैं। वहीं बेटियां बढ़चढ़कर उनकी देखभाल कर पूरे घर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही है यहां तक की अपनी चार बहिनो और सबसे छोटे भाई को पढ़ा लिखाकर उनका भविष्य संभाल रही है और स्वयं दिन-रात अपने खेतों में बोनी बखरी से लेकर सिंचाई के समय फसलों की स्वंय पानी देती है। स्वंय ने अपनी पढ़ाई छोड़ परिवार को संभाल लिया है। यह कहानी है बेग़मगंज तहसील के ग्राम नैनविलास की रहने वाली एक लड़की की। जिसने अपने पिता की हत्या के बाद न केवल खुद को संभाला बल्कि अपनी मां और तीन बहिनों सबसे छोटे भाई के लिए दिन रात एक कर आज परिवार को आर्थिक एवं शिक्षित बना लिया है स्वयं ने बी काम तक पढ़ाई की और छोड़ दी तीनों बहनों और भाइयों के लिए ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर आ रही ।
13 साल की उम्र में संभाली घर की जिम्मेदारी
बेगमगंज नगर से सात किलोमीटर दूर ग्राम नैनबिलास निवासी प्रियंका राजपूत उम्र 24 वर्ष शिक्षा बीकॉम ने बताया कि वर्ष 2013 में गांव के ही परिवार के कुछ लोगों द्वारा पुरानी रंजिश के चलते पिता जी की हत्याकर दी गई थी, उस समय मेरी उम्र लगभग तेरह वर्ष थी। तीन बहिन और सबसे छोटे भाई माँ के पालन पोषण की जिम्मेदारी पिता ही किया करते थे। पिता की मौत के बाद पूरा परिवार एक तरह से अनाथ सा हो गया था उस समय मां को ऐसा लग रहा था कि अब घर की देखभाल और जिम्मेदारी कोंन संभालेगा उसी समय मैंने अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालना शुरू किया छोटी सी उम्र मैं खेती किसानी से लेकर सभी भाई बहिनो को पढ़ा लिखाकर आर्थिक रूप से भी परिवार को संपन्न बनाया मैं स्वयं ट्रैक्टर से बोवनी बखरनी करती हू सिंचाई के समय अपनी फसलों को स्वयं पानी देती है। दूसरे नंबर की बहिन सोनम की शादी 2020 मैं कर दी तीसरे नंबर की बहन रजनी एसआई की कोचिंग कर रही है चौथे नंबर की बहिन समीक्षा एमए की पढ़ाई कर रही है सबसे छोटा भाई अभिषेक कक्षा 12वीं मैं है घर में 15 एकड़ सिंचित भूमि हैं मैं स्वयं बीकॉम सेकंड ईयर पढ़ रही थी लेकिन मैंने पढ़ाई छोड़ दी मेरा मानना है कि दोनों तीनों बहिनो की शादी करने के बाद छोटा भाई पढ़ लिखकर कुछ बन जाए।
इसके बाद ही मैं अपनी शादी के बारे में विचार करुँगी क्योंकि घर परिवार का सबसे बड़ा होने के लिए यह जिम्मेदारी मेरी बनती है।
पिता की कमी हमेशा होती है महसूस
प्रियंका बताती हैं कि तब मैं छोटी थी तब ही मेरे पिताजी इस दुनिया से चले गए वह मानती हैं कि जीवन में पिता की कमी हमेशा महसूस होती है लेकिन मेरी मां की हिम्मत और उनकी प्रेरणा से आज परिवार संभालना आसान हुआ है। वही प्रियंका ने बताया हम सबकी जिम्मेदारी मेरी मां के ऊपर थी लेकिन उनका निश्चय इतना मजबूर था की उन्हें इन सब हालातों से लड़ने की इच्छा शक्ति मिली और उनके ही मार्गदर्शन में आज हमारा परिवार सभी तरह से खुशहाल है । वैसे तो पिता ही उनके रोल मॉडल हुआ करते थे पिता ही बच्चों को जीना सिखाते हैं हालात का सामना करने का हौसला भी वही जगाते हैं देखा जाए तो पिता एक बरगद के उस वृक्ष की तरह होता है जिसके नीचे उसका परिवार पलता बढ़ता है।




