वन विभाग की कार्रवाई से आजीविका संकट में, भूमिहीन महिलाओं ने माँगे पट्टे
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । वन परिक्षेत्र गौरझामर द्वारा प्लांटेशन (वृक्षारोपण) के लिए वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई के बाद, समीपस्थ ग्राम गोपालपुरा की बड़ी संख्या में भूमिहीन खेतिहर महिलाओं ने उप-खंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को एक हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपकर भूमि के पट्टों की मांग की है।
क्या है मामला?
ज्ञापन में बताया गया है कि गोपालपुरा के 50 से अधिक परिवार भूमिहीन हैं और वे कृषि मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। इन परिवारों ने कथित तौर पर वन भूमि पर कब्जा करके उसे कृषि योग्य बनाया और पीढ़ियों से खेती कर अपना भरण-पोषण करते आ रहे थे।
महिलाओं ने आरोप लगाया है कि वन परिक्षेत्र गौरझामर ने 2 और 3 नवंबर को बिना किसी पूर्व सूचना के कब्जे वाली वन भूमि की फसलों को नुकसान पहुँचाया और प्लांटेशन के लिए गड्ढे खोदना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई से उनकी आजीविका पर बड़ा संकट आ गया है।
भूमि के पट्टों की मांग
प्रभावित महिलाओं ने एसडीएम से मांग की है कि सभी खेतिहर मजदूरों को न्याय देते हुए उन्हें खेती के लिए भूमि के पट्टे उपलब्ध कराए जाएं।
जनप्रतिनिधि का समर्थन
इस गंभीर मामले पर जिला पंचायत सदस्य जनकरानी करण सिंह गौड़ ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “आदिवासी और गरीब परिवारों पर बिना सूचना के ऐसी कार्यवाही उचित नहीं है। ये लोग पीढ़ियों से इसी भूमि पर रहकर खेती कर रहे हैं। वन विभाग की कार्यवाही से उनकी आजीविका पर संकट आ गया है।”
श्रीमती गौड़ ने सरकार से आग्रह किया कि इन परिवारों को सम्मानजनक जीवन यापन सुनिश्चित करने के लिए शीघ्रता से भूमि के पट्टे उपलब्ध कराए जाएँ।
ज्ञापन सौंपने वाली महिलाओं में आशा रानी, अमर, दशरथ, मालती, नबवी, प्रीति, गीता, नीमा, कुवरवाई, अनीता, लक्ष्मी, वंदना सहित बड़ी संख्या में खेतिहर मजदूर महिलाएं शामिल थीं।



