ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 11 जुलाई 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 11 जुलाई 2024
11 जुलाई 2024 दिन गुरुवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष कि पञ्चमी तिथि है। आज स्कन्धपञ्चमी का पावन व्रत है। आज की इस पञ्चमी को उड़ीसा में हेरपञ्चमी के नाम से जाना जाता है। आप सभी सनातनियों को “स्कन्धपञ्चमी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 10:03 AM तक उपरांत षष्ठी
🖍️ तिथि स्वामी – षष्ठी तिथि के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 01:04 PM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। नक्षत्र के देवता भग और स्वामी शुक्र होता है।
⚜️ योग – वरीयान योग 04:09 AM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : बालव – 10:03 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 11:16 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:15:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:45:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:10 ए एम से 04:51 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:30 ए एम से 05:31 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:54 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 05:55 ए एम से 07:42 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 12 से 12:47 ए एम, जुलाई 12
❄️ रवि योग : 01:04 पी एम से 05:32 ए एम, जुलाई 12
🚓 यात्रा शकुन – बेशन की मिठाई खाकर यात्रा पर निकले।
👉🏽 आज का मंत्र – ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरुवै नमः।
🤷🏻 आज का उपाय – किसी विप्र को पीले वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय – पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विद्यारंभ, “स्कन्धपञ्चमी व्रत”, कुमार षष्ठी, पारसी अस्पंदार्मद मासारंभ, हेरा पंचमी (उड़िसा), सांई टेउऀराम जयन्ती, विश्व जनसंख्या दिवस, लेखक अमिताव घोष जन्म दिवस, (परमवीर चक्र से सम्मानित) सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे स्मृति दिवस, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सरदार बलदेव सिंह, राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सी. एस. वेंकटाचार जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी बाबा कांशीराम जन्म दिवस, अभिनेत्री उमा देवी खत्री (टून टून ) जन्म दिवस, अभिनेता कुमार गौरव जन्म दिवस, राष्ट्रीय 7-इलेवन दिवस
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।।
🗽 Vastu tips_ 🗺️
वास्तु शास्त्र में पेड़ों की दिशा के बारे में विस्तार से बताया गया है जिसके अनुसार ऊंचे और घने पेड़ों को दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए और इन्हें घर की दीवार से थोड़ा दूर लगाना चाहिए, जिससे उन्हें पर्याप्त सूर्य का प्रकाश मिल सके। पहले से उपस्थित पेड़ों को कभी नहीं काटना चाहिए बल्कि उनकी देख रेख करनी चाहिए।
घर में पूर्व दिशा में फूलों के पौधे, घास और मौसमी पौधे लगाने से घर के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं होती है। पान, हल्दी, चंदन आदि कुछ पौधों को पश्चिम-उत्तर के कोने में लगाने से परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम बढ़ता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आयुर्वेद के मतानुसार भाङ्गरे का पौधा कटु, उष्णवीर्य, धातु परिवर्तक, कृमि नाशक और विष नाशक होता है। यह बालों के सौंदर्य को बढ़ाने वाला, नेत्रों की ज्योति को तेज करने वाला और दांतो को मजबूत करने वाला होता है। यह सूजन, हर्निया, नेत्र रोग, कफ, वात, खांसी, दमा, श्वेत कुष्ठ, पाण्डुरोग, हृदयरोग, चर्मरोग, खुजली, रतौंधी, उपदंश और विष को नष्ट करने वाला होता है। गर्भपात और गर्भस्राव को रोकने के लिए तथा प्रसूति के पश्चात गर्भाशय में होने वाली पीड़ा को रोकने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
▪️अजवाइन के 4 रत्ती फूल, 4 रत्ती गिलोय सत्व के साथ मिलाकर चर्म रोगों में, ऊंगलियों के काम न करने पर, वायु के दर्द, रक्तचाप और ब्लडप्रेशर में लाभप्रद सिद्ध होता है।
▪️बिगड़े लाइफस्टाइल के चलते आजकल हर दूसरा आदमी डायबिटीज की बीमारी से घिरा हुआ है। अजवाइन या अजवाइन का पानी डायबिटीज जैसी घातक बीमारी को जड़ से खत्‍म करने में कारगार है।
▪️अजवाइन का पानी नियमित रूप से पीने से दिल की बीमारियों से निजात पाई जा सकती है।
▪️अजवाइन में पाया जाने वाला थाइमोल पेट से गैस्ट्रिक रिहाई जूस बाहर निकालता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है। यह अपच, पेट फूलना व मतली आदि को भी दूर करता है।
▪️अजवाइन हजम शक्ति को बढ़ाने में भी मदद करता है। इसका इस्तेमाल बदहजमी, कब्ज़, शिशुओं के पेट में दर्द आदि के इलाज में उपयोग किया जाता है।
▪️अजवाइन को उबालने पर या फिर इसके पानी को पीते समय नाक के माध्यम से जाने वाली भाप से सिर दर्द ठीक होता है और कंजेशन की समस्या से भी राहत मिलती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कर्म से भाग्य भी बदल जाते हैं…
जब भगवान् श्री कृष्ण ने सुदामा जी को तीनों लोकों का स्वामी बना दिया तो, सुदामा जी की संपत्ति देखकर यमराज से रहा न गया और यम भगवान् को नियम कानूनों का पाठ पढ़ाने के लिए अपने बहीखाते लेकर द्वारिका पहुंच गये | और भगवान् से कहने लगे कि- अपराध क्षमा करें भगवन लेकिन सत्य तो ये है कि यमपुरी में शायद अब मेरी कोई आवश्यकता नही रह गयी है
इसलिए में पृथ्वी लोक के प्राणियों के कर्मों का बही खाता आपको सौंपने आया हूँ और इस प्रकार यमराज ने सारे बहीखाते भगवान् के सामने रख दिये. भगवान् मुस्कुराए और बोले यमराज जी आखिर ऐसी क्या बात है जो इतना चिंतित लग रहे हो.यमराज कहने लगे कि प्रभु आपके क्षमा कर देने से अनेक पापी एक तो यमपुरी आते ही नही है वे सीधे ही आपके धाम को चले जाते हैं और.. फिर आपने अभी अभी सुदामा जी को तीनों लोक दान दे दिए हैं सो अब हम कहाँ जाएं.
यमराज भगवान् से कहने लगे कि प्रभु सुदामा जी के प्रारब्ध में तो जीवन भर दरिद्रता ही लिखी हुई थी. लेकिन आपने उन्हें तीनों लोकों की संपत्ति देकर विधि के बनाये हुए विधान को ही बदलकर रख दिया है अब कर्मों की प्रधानता तो लगभग समाप्त ही हो गयी है. भगवान् बोले कि यम तुमने कैसे जाना कि सुदामा के भाग्य में आजीवन दरिद्रता का योग है
यमराज ने अपना बही खाता खोला तो सुदामा जी के भाग्य वाले स्थान पर देखा तो चकित रह गए. देखते हैं कि जहां ‘श्रीक्षय’ सम्पत्ति का क्षय लिखा हुआ था, वहां स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ने उन्ही अक्षरों को उलटकर उनके स्थान पर ‘यक्षश्री’ लिख दिया अर्थात कुबेर की संपत्ति,भगवान् बोले कि यमराज जी शायद आपकी जानकारी पूरी नही है..
क्या आप जानते हैं कि सुदामा ने मुझे अपना सर्वस्व अपर्ण कर दिया था तो मैने तो सुदामा के केवल उसी उपकार का प्रतिफल उसे दिया है, यमराज बोले कि भगवान् ऐसी कोन सी सम्पत्ति सुदामा ने आपको अर्पण कर दी उसके पास तो कुछ भी नही.
भगवान् बोले कि सुदामा ने अपनी कुल पूंजी के रूप में बड़े ही प्रेम से मुझे चावल अर्पण किये थे जो मैंने और देवी लक्ष्मी ने बड़े प्रेम से खाये थे, और जो मुझे प्रेम से कुछ खिलाता है उसे सम्पूर्ण विश्व को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है, बस उसी का प्रतिफल सुदामा को मैंने दिया है.
ऐसे दयालु हैं हमारे प्रभु श्री द्वारिकाधीश भगवान्.. जिन्होंने न केवल सुदामा जी पर कृपा की, बल्कि द्रौपदी की बटलोई से बचे हुए साग के पत्ते को भी बड़े चाव से खाकर दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों सहित सम्पूर्ण विश्व को तृप्त कर दिया था ओर पांडवो को श्राप से बचाया था।
बोलिये द्वारिकाधीश भगवान की जय हो… 🙏🙏
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
⚜️ षष्ठी तिथि यदि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है। परन्तु ऐसे जातक छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।

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