भागवत कथा में सुनाया, श्रीकृष्ण- रुकमणी विवाह प्रसंग, श्रद्धालुओं ने की पुष्पवर्षा

रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सिलवानी । साईखेड़ा के श्री लक्ष्मीनारायण बड़ा धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक रिंकू शास्त्री ने श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुकमणि का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। कथा के मुख्य यजमानो ने दीप प्रज्जवलित किया। प्रसंग में शास्त्री ने कहा कि रुकमणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुकमणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुकमणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुकमणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया।



