मध्यप्रदेश सरकार नौकरी, रोजगार देने मे नाकाम साबित, बेरोजगार युवको का रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेशो मे बेजा पलायन

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव की भाजपा डबल इंजन की सरकार पदारूढ होने के बावजूद प्रदेश मे बेरोजगारो को रोजगार नौकरियों देने मे नाकाम नाकारा साबित हो रही है यहां के युवको लोगो को नौकरी स्वरोजगार के अवसर नही मिलने के कारण उनके पलायन का सिलसिला बडे पैमाने पर आज भी जारी है यहां से रोजी रोटी के लिये काम की तलाश मे पलायन कर कामकाजी पढे लिखे डिग्रीधारी युवक दूसरे प्रदेशो मे काम करने को मजबूर है अथवा वहां जाकर काम की तलाश मे यहां वहां भटक रहे है युवको का पलायन रोकने के लिये समाज सेवक कुंदनलाल चौरसिया ने केन्द्र व राज्य का ध्यान आकर्षित करते हुए सुझाव दिया है की सरकार लोगो के पीढी दर पीढी चले आ रहे जमेजमाये पुरातन जातिगत धन्धो को बढावा दे इसके लिये सरकार बिना ब्याज या बिल्कुल कम व्याज पर ऋण बैको से दिलाने की सरल व सहज सुविधा, आधुनिक तकनीकी ज्ञान व आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था हो लुहार, लुहरगढिया बढई, बरई, पंसारी पान बरेजे, सुनार, सोनी स्वर्णकार, तमेरे, धोबी, सेन, साहू, तेली, पटैल, काछी, टेलर, सिलाई, कढाई, दर्जी, किसान, चर्मकार, कर्मकार, हलवाई, बीडी उद्योग, किराना दुकान, लकडी प्लास्टिक के खिलौना उद्योग, फोटो कापी, फोटोग्राफी, साईकिल दुकान, बल्कनाईजिग, पन्चर सुधार, बाइक मकेनिक, बाईडिग का काम, प्रेस प्रिंटिग कार्य, दूध डेरी, बकरी पालन, भेड पालन, मुर्गी पालन, भैस पालन, गाय पालन, सुअर पालन, अगरबत्ती उद्योग, मोमबत्ती, चरखा, फूलबत्ती उद्योग, मेडीकल, देशी दवा, हथकरघा उद्योग, मसाला उद्योग, रस्सी उद्योग, बुनकर,फल सब्जी बिक्रेता, दौना पत्तल निर्माण, कागज लिफाफा बनाना पेन्टिग, आटो, बस, ट्रक, लघु तिपहिया, माल वाहक के लिये सस्ते सुलभ लोन, रेशम उद्योग, मछली पालन, सिघाडा खेती, ईट भट्टा उद्योग, सौर ऊर्जा को बढावा, रूई धुनकाई तगाई, कपासी काम, बरी पापडण उद्योग, अचार चटनी उद्योग, आटा दाल चक्की, चाय पान, दूकान आदि ऐसे उद्योग है जिनके माध्यम से हजारो बेरोजगारो को घर बैठे स्वरोजगार दिये जा सकते है जिन्हे चलाने खोलने स्थापित करने जगह आबन्टन की भी जरुरत नही पडेगी व प्रशिक्षण भी ज्यादा नही देना पडेगा, सरकार को इस तरफ सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है तभी प्रदेश से लोगो का पलायन रोका जा सकता है, बता दें कि केंद्र व राज्य सरकारों का प्रमुख दायित्व व अधिकार है कि वह देश और प्रदेश के लोगों को आजीविका के लिये पर्याप्त रोजगार स्वरोजगार नौकरियां दे तथा इनके लिये पूरे संसाधन वित्तीय ऋण तकनीकी ज्ञान प्रशिक्षण आदि की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराये।



